वीडियो का गोहत्या या तस्करी से कोई लेना-देना नहीं है, हिंसा एक दर्जी की पिटाई को लेकर हुई थी…

Communal False

सोशल मीडिया पर 1 मिनट 26 सेकंड का एक वीडियो साझा किया जा रहा है। जिसमें आक्रोशित हुई भारी भीड़ दिखाई दे रही है। भीड़ एक पुलिस स्टेशन में अधिकारियों को घेर रही है और उन्हें परेशान करती नजर आ रही है। वीडियो के साथ  दावा किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के दमोह में पुलिस ने जब गाय तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की तो मुस्लिमों ने पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया। 

वायरल वीडियो के साथ यूजर ने लिखा है- मध्यप्रदेश में हज़ारों की संख्या में जिहादियों का दमोह पुलिस स्टेशन पर इकट्ठा होकर हमले की कोशिश। पुलिस कर्मियों के साथ बत्तमीज़ी,धमकियाँ दी गई। भीड़ गौ तस्करों के ख़िलाफ़ कार्यवाही से बिलबिलाई हुई थी। 

ट्विटरआर्काइव

अनुसंधान से पता चलता है कि…

पड़ताल की शुरुआत में हमने वायरल वीडियो के बारे में जानने के लिए अलग अलग कीवर्ड का इस्तेमाल किया। परिणाम में हमें एमपी दृष्टि न्यूज़ पर वायरल वीडियो की खबर मिली। 4 फरवरी को प्रकाशित इस खबर में वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट है। जिसके  मुताबिक, दमोह जेल के पास स्थित एक मस्जिद परिसर में अंसार खान नाम के दर्जी की चार लोगों ने पिटाई कर दी, जिसके बाद ये हंगामा शुरु हुआ। 

मिली जानकारी की मदद लेते हुए हमने आगे की जांच की। दैनिक भास्कर में भी वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट के साथ खबर प्रकाशित देखा। 3 फरवरी को कपड़े सिलने में देरी को लेकर एक स्थानीय दर्जी और उसके ग्राहक के बीच हुए विवाद के दौरान एक मौलवी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी।

दरअसल लल्लू शर्मा नाम का एक आदमी, अंसार की दुकान पर अपने कपड़े लेने आया था।  लल्लू ने अपने कपड़े दो महीने पहले सिलने दिए थे। अंसार ने कुछ कपड़े बना दिये थे और कुछ बाकी थे।  इसी बात पर लल्लू शर्मा और उनके साथ आये राजू ठाकुर, विक्की शर्मा की अंसार से लड़ाई हो गई। 

उन्होंने अंसार को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया और उनके साथ मारपीट की। इस मारपीट में बीच बचाव करने के लिए मस्जिद के पेश इमाम हाफिज रिजवान आए। उनके साथ भी चारों ने मारपीट की। 

इसे लेकर इमाम और दर्जी दोनो  दमोह कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराने गए।  जब आसपास के लोगों को दोनों की पिटाई की खबर मिली तो थाने के बाहर भीड़ जमा हो गई और मौलवी के साथ मारपीट करने के आरोपी लोगों की गिरफ्तारी की मांग हुई।

वहीं भीड़ में से एक व्यक्ति, अकरम खान राईन ने लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करते हुए 24 घंटे में कार्रवाई नहीं करने पर हिंसा की धमकी दी।

घटना से जुड़ी अन्य खबरें यहां, यहां और यहां पर भी देखी जा सकती हैं। खबरों के अनुसार दमोह में मस्जिद के मार्केट में कपड़े सिलने में देरी होने को लेकर कुछ लोगों ने एक टेलर के साथ मारपीट की। कुछ देर बाद इस मारपीट ने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। विवाद इतना बढ़ा कि हिंदू-मुस्लिम दोनों तरफ से काफी लोग इकट्ठा हो गए और मामले ने हिंसा का रूप ले लिया। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जांच के निर्देश देते हुए कहा कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 इन खबरों में से किसी में भी यह उल्लेख नहीं है कि गौ तस्करों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद मुस्लिमों ने एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया था।  

वहीं daily pioneer में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने इस मामले में लल्लू शर्मा, राजू ठाकुर, विक्की शर्मा के साथ 40 लोगों के खिलाफ धारा 153ए, 143 और 147 के तहत मामला दर्ज किया।  साथ ही अकरम खान और उनके दो सहयोगियों को हिरासत में लिया गया है।

स्पष्टीकरण के लिए हमने दमोह के एसपी सुनील तिवारी से संपर्क किया। उन्होंने हमें इस बात की पुष्टि कर दी कि इस मामले का गौ तस्करी या गौहत्या से कोई संबंध नहीं है।  वायरल दावा फर्जी है। 

निष्कर्ष- तथ्य-जांच के बाद हमने पाया कि, वीडियो का गौ तस्करी से कोई लेना देना नहीं है। ये वीडियो तब का है जब दमोह में कुछ लोगों ने एक मुस्लिम दर्जी और एक मस्जिद के मौलवी के साथ मारपीट कर दी थी, जिसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भीड़ ने थाने के सामने जमा हो कर हंगामा कर दिया था। 

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Title:वीडियो का गोहत्या या तस्करी से कोई लेना-देना नहीं है, हिंसा एक दर्जी की पिटाई को लेकर हुई थी…

Written By: Sarita Samal 

Result: False

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