असंबंधित बुज़ुर्ग व्यक्ति की तस्वीर JNU छात्र के नाम से वायरल हो रही है |

False National Political
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२२ नवंबर २०१९ को “Shastra Veer” नामक फेसबुक यूजर ने एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा है कि “मुफ्त में रहते वालें लोगों को पता है कि मुफ्त का खाना और रहना कहा मिलता है, और मौका देखते ही वो वोही जाते है | ७० वर्ष के मोईनुद्दीन जे.एन.यू से पी.एच.डी खातं करके लौटे |” तस्वीर में हम एक बुसुर्ग आदमी और एक पोलिसकर्मी को देख सकते है | इस तस्वीर के ऊपर लिखा गया है कि एक पुलिस कर्मी को जे.एन.यू के पी.एच.डी स्टूडेंट के साथ विवाद करते समय उनके लापता चाचा मिल गये जो जे.एन.यू  कैंपस में पढ़ते है | इस तस्वीर के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि तस्वीर में दिखाए गये बुज़ुर्ग जे.एन.यू के पी.एच.डी के छात्र है जिनका नाम मोईनुद्दीन है | 

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

अनुसंधान से पता चलता है कि…

जाँच के शुरुआत में हम आपको इस पोस्ट में गौर करने वाली कुछ चीजें दिखाते है | तस्वीर में दिखाए गये पुलिसकर्मी ने अपनी वर्दी नही पहनी हुई है परंतु उनके सिर पर हम पुलिस की टोपी देख सकते है | 

इसके पश्चात हमने इस तस्वीर का स्क्रीनशॉट लेकर गूगल रिवर्स इमेज सर्च किया, जिसके परिणाम से हमें १२ मई २०१९ को द हिन्दू द्वारा प्रकाशित खबर मिली | इस तस्वीर के शीर्षक में “रहत अली और उनके बेटे लुकमान अली” लिखा हुआ है | इस तस्वीर में युवक को हम सफ़ेद स्ट्राइप शर्ट पहने हुए देख सकते है | खबर के अनुसार फोरेनेर एक्ट १९४६ के तहत रहत अली को बंगलादेशी होने के कारण ३ साल के लिए गिरफ्तार करते हुए असम के गोअलपारा सेंट्रल जेल में रखा गया था | यह  तस्वीर उनके ३ साल बाद रिहा होने की है | साथ ही इस तस्वीर के फोटो क्रेडिट्स- द हिन्दू को ही दिया गया है |

आर्काइव लिंक 

इससे हमें यह स्पष्ट होता है कि यह मूल तस्वीर में युवक के पहनावे से साथ फोटोशोप कर पुलिस कर्मी के वर्दी का रंग और पुलिस कैप को जोड़ा गया है | नीचे आप दोनों तस्वीरों की तुलना देख सकते है | यह व्यक्ति कोई पुलिसकर्मी नही है |

इसके पश्चात हमने सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर के ऊपर टेक्स्ट को गूगल सर्च करते हुए ढूँढा, जिसके परिणाम से हमें सटाएर टुडे नामक एक वेबसाइट का लिंक मिला |  इस वेबसाइट पर हम एडिटेड तस्वीर को देख सकते है | इस वेबसाइट के नाम के साथ ही लिखा हुआ है कि सारी घटना काल्पनिक है | 

साथ ही वेबसाइट के डिस्क्लेमर में साफ़ साफ़ लिखा गया है कि इस वेबसाइट पर कोई भी खबर सच नही है | यह एक मजाकिया वेबसाइट है | यह वेबसाइट का पूरी तरह से काल्पनिक और विनोदपूर्ण होने का इरादा रखती है | 

आर्काइव लिंक 

इस सटाएर वेबसाइट द्वारा प्राकशित खबर को सोशल मीडिया यूजर सच मानते हुए साझा कर रहे है | 

निष्कर्ष: तथ्यों के जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत है | तस्वीर को फोटोशोप के माध्यम से एडिट कर साझा किया गया है | इस तस्वीर में हम राहत अली और उनके बेटे लुकमान अली को देख सकते है | यह युवक कोई पुलिसकर्मी नहीं है ना ही यह बुज़ुर्ग आदमी जे.एन.यू का पी.एच.डी छात्र है |

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Title:असंबंधित बुज़ुर्ग व्यक्ति की तस्वीर JNU छात्र के नाम से वायरल हो रही है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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