जयपुर के प्रताप नगर इलाके में डॉक्टर दंपति और कुछ लोगों के बीच हुई झड़प को सांप्रदायिकता से जोड़कर वायरल किया जा रहा है।

Communal False
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वर्तमान में राजस्थान से संदर्भित एक वीडियो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें आप एक महिला को उनके व उनके पति के साथ घटी घटना के बारे में बात करते सुन सकते है। वीडियो में महिला बता रही है कि जयपुर के प्रताप नगर थाना इलाके में कुछ लोगों ने उन्हें छेड़ा व उनके पति के साथ मारपीट की, जिसके बाद पुलिस ने उनके पति को गिरफ्तार कर लिया। सोशल मंचों पर इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों ने इस महिला के पति को मारा वे लोग मुस्लिम समुदाय से है। दावे में यह भी लिखा है कि ये पति- पत्नी डॉक्टर है व ब्राह्मण समुदाय के लोग है।

वायरल हो रहे वीडियो के शीर्षक में लिखा है, 

“जयपुर में, प्रताप नगर थाना इलाके में कल ब्राह्मण डॉक्टर पति पत्नी की मुसलमानों द्वारा पिटाई की गयी अकारण जबरदस्त पिटाई होने पर डॉक्टर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने थाने को घेर लिया।

मुसलमानो के दबाव में आए थानेदार ने डॉक्टर शर्मा को धारा 151 में हवालात में बंद कर दिया।

यह स्थिति करोड़पति परिवार की है वह भी एक राज्य की राजधानी में है।

इसलिए कोई यह न समझे कि मेरा व्यापार दुकानदारी बहुत अच्छा चल रहा है या मैं सरकारी सेवा में बहुत ऊंची पोस्ट पर पदस्थापित हूँ, मेरी आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत है, इसलिए मुझे कोई कुछ नहीं कह सकता और न ही मुझे समाज की जरूरत है बल्कि समाज को मेरी जरूरत ही रहती है।“

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान पाया कि वायरल हो दावा गलत है। इस प्रकरण में दोनों में से कई भी पक्ष मुस्लिम समुदाय से नहीं है व इस घटना का सांप्रदायिकता से कोई संबद्ध नहीं है।

जाँच की शुरुवात हमने वायरल हो रहे दावे को गूगल पर कीवर्ड सर्च कर की, परिणाम में हमें ईटीवी भारत द्वारा प्रकाशित किया गया एक समाचार लेख मिला। समाचार लेख के मुताबिक यह राजस्थान में स्थित जयपुर के प्रताप नगर थाने क्षेत्र की घटना है। 

वीडियो में दिख रही पीड़ित महिला एक डॉक्टर है व उनके पति भी डॉक्टर है। वे रात में अपनी गाड़ी में एक अस्पताल में चेकअप करने के लिए रुके थे, महिला के पति किसी मरीज़ को देखने के लिए अस्पताल के अन्दर गये व महिला और उनका बच्चा गाड़ी में ही बैठे थे, उसी दौरान पीछे से एक अन्य गाड़ी ने हार्न बजाया व उसके बाद उनके बीच इस बात को लेकर कहासुनी हुई व दूसरी गाड़ी के लोगों ने कथित तौर महिला के साथ गाली गलौच व अभद्र व्यवहार किया, जिसके चलते महिला ने अपने पति को बुलाया व उनके पति और इन लोगों के बीच हाथापाई हुई, इसके पश्चात पुलिस वहां पर पहुंची व दोनों पक्षों को अपने साथ थाने ले गई।

इसी से सम्बंधित आपको ईटीवी के इस समाचार लेख में जयपुर ईस्ट के डी.सी.पी अभिजीत सिंह का वीडियो भी देखने को मिलेगा, जहाँ वे इस प्रकरण के सन्दर्भ में जानकारी दे रहे है।

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आपको बता दें कि उपरोक्त समाचार लेख में व अभिजीत सिंह के द्वारा दी गयी जानकारी में कही भी ये नहीं बताया गया है कि इस प्रकरण में सांप्रदायिकता या मुस्लिम समुदाय के लोगों की भूमिका है।

इसके बाद फैक्ट क्रेसेंडो ने राजस्थान के जयपुर में स्थित प्रताप नगर थाने के एस.एच.ओ श्रीमोहन मीना से संपर्क किया। उनसे हमने वायरल हो रहे दावे के संबद्ध में जानकारी ली। उन्होंने हमें बताया कि, “वायरल हो रहा दावा सरासर गलत है। इस मामले में दोनों ही पक्ष हिंदू समुदाय के हैं और इसका सांप्रदायिकता से कोई संबद्ध नहीं है। दोनों पक्षों के बीच गाड़ी की पार्किंग को लेकर झड़प हुई थी और इस प्रकरण में डॉक्टर दंपति की ओर से एफ.आई.आर दर्ज करायी गयी है। उस एफ.आई.आर में चार लोगों के नाम लिखे हुए है और वे नाम है, रामअवतार गुर्जर, राम विलास सेनी, रामजीलाल सेनी और मांगीलाल गुर्जर।“

तदनंतर अधिक जानकारी पाने के लिए फैक्ट क्रेसेंडो ने वायरल हो रहे वीडियो में दिख रही महिला अनामिका शर्मा के पति आशिष शर्मा से संपर्क किया व उनसे भी वायरल हो रहे दावे की जानकारी ली। उन्होंने वायरल हो रहे दावे को गलत बताते हुए कहा कि, ये वीडियो मेरी पत्नी ने बनाया है परंतु इसके साथ वायरल हो रही जानकारी गलत है। जिन लोगों ने मेरी पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार किया व मुझ पर हमला किया वे मुस्लिम समुदाय से नहीं है, वे लोग हिंदू ही है। दावे में जो लिखा है कि मैं और मेरी पत्नी ब्राह्मण समाज से है, ये बात सच है। परंतु इस घटना का सांप्रदायिकता से कोई संबद्ध नहीं है।

इसके पश्चात डॉ. आशिष शर्मा ने हमें इस मामले में उनके द्वारा दर्ज की गयी एफ.आई.आर की कॉपी भी उपलब्ध करायी है।

तत्पश्चात फैक्ट क्रेसेंडो ने जयपुर ईस्ट के ए.सी.पी नेमिचंद खारिया से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि, “वायरल हो रहे दावा गलत व भ्रामक है, इस घटना का सांप्रदायिकता से कोई संबद्ध नहीं है। जिन लोगों के खिलाफ एफ.आई.आर दर्ज हुई है वे मुस्लिम समुदाय से नहीं है।“

आखिर में फैक्ट क्रेसेंडो ने उपरोक्त सारे सबूतों की पुष्टि करने हेतु व अधिक जानकारी पाने के लिए जयपुर ईस्ट के डी.सी.पी अभिजीत सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि, 

“इस घटना के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों को गिरफ्तार भी कर भी लिया गया है। प्रताप नगर में एक छोटा सा अस्पताल है जिसमें पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। डॉक्टर दंपति अस्पताल गये थे व कार को उन्होंने गलत तरीके से पार्क किया था, जिस वजह से दूसरों के लिए रास्ता अवरुद्ध हो गया था। कुछ लोग जो दूसरी गाड़ी से यात्रा कर रहे थे, उन्होंने महिला डॉक्टर को उनकी गाड़ी को एक तरफ ले जाने के लिए कहा ताकि वे आगे बढ़ सकें। मामला बढ़ गया और महिला द्वारा अपने पति को फोन कर बुला लिया गया। उसके पति का उन लोगों से झगड़ा हो गया व दोनों पक्षों (3 स्थानीय लोग और महिला चिकित्सक के पति) को धारा 151 सी.आर.पी.सी के अंतर्गत थाने लाया गया। डॉक्टर महिला ने अगले दिन मामला दर्ज किया और हमने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वायरल हो रहा दावा सरासर गलत है क्योंकि आरोपी हिंदू हैं व मुस्लिम समुदाय से नहीं हैं।“

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया कि उपरोक्त प्रकरण के साथ किया जा रहा दावा गलत है| इस प्रकरण में दोनों में से कई भी पक्ष मुस्लिम समुदाय से नहीं है व इस घटना का सांप्रदायिकता से कोई संबद्ध नहीं है।

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. हरियाणा के करनाल में हुई एक वैब सीरिज़ की शूटिंग के वीडियो को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

२. टाइल फैक्टरी में सामान्य बीमार मजदूरों के इलाज के वीडियो को महाराष्ट्र में करोना की भयावह स्थिति का बता वायरल किया जा रहा है।

३. किसानों द्वारा भाजपा विधायक अरुण नारंग की पिटाई के वीडियो को शिया नेता वसीम रिजवी का बताया जा रहा है|

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Title:जयपुर के प्रताप नगर इलाके में डॉक्टर दंपति और कुछ लोगों के बीच हुई झड़प को सांप्रदायिकता से जोड़कर वायरल किया जा रहा है।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False


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