यह कंकाल रेजांग ला की लड़ाई में शहीद हुए सैनिकों नहीं; जानिए क्या है इस का सच…

False Social

तस्वीर में दिख रहा कंकाल एक आर्टिस्ट ने बनाई हुई प्रस्तुति है। उस कलाकार ने फैक्ट क्रेसेंडो ने इस बात की पुष्टि की है।

सोशल मंचों पर कंकाल (Human Skeleton) की एक तस्वीर काफी तेज़ी से वायरल रही है। उस तस्वीर के साथ साथ दावा किया जा रहा है कि इसमें दिख रहा मानव कंकाल रेजांग ला की लड़ाई में शहीद हुए सैनिकों का है। पोस्ट में एक खबर का भी स्क्रीनशॉट है जिसका शीर्षक है – “तीन माह बाद शहीदों के शव मिले तो ट्रिगर पर थीं अंगुलियां.”

वायरल हो रहे पोस्ट के साथ दी गई जानकारी में लिखा है, “इतिहास हमारा पढ़ लेना, “हमने रक्त से शब्द सजाए हैं! सर कटते थे, धड़ लड़ते थे, तब हम अहीर कहलाये हैं! रेजांग ला के अमर शहीद बलिदानी रणबाँकुरे वीर अहीरों को शत – शत नमन!”

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

आपको बता दें कि इस पोस्ट में दो तस्वीरें प्रकाशित की गई है। पहली तस्वीर मानव कंकाल की है और दूसरी तस्वीर एक समाचार लेख की है। सबसे पहले हमने कंकाल की तस्वीर को गूगल रीवर्स इमेज सर्च किया। 

हमें यह तस्वीर दिलीप सरकार एम.बी.ई द्वारा उनके ट्वीटर हैंडल पर इस वर्ष 2 अक्टूबर को प्रकाशित की हुई मिली। ट्वीट में इस तस्वीर के साथ तीन और तस्वीर प्रकाशित की हुई है। इस ट्वीट में दी गई जानकारी के मुताबिक तस्वीर में दिख रहा मानव कंकाल उनके द्वारा बनाया गया है।

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इसके बाद फैक्ट क्रेसेंडो ने दिलीप सरकार से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि, “मैंने 2016 में, पूर्व Military Modelling मैगझिन के लिए एक फीचर के रूप में ये मॉडल का निर्माण किया था। मैंने इसका निर्माण किया ताकि द्वितीय विश्व युद्ध में अभी भे लापता लाखों लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। इस तस्वीर में दिख रहा मॉडल रूस में पूर्वी मोर्चे पर तैनात एक जर्मन मशीन गनर को दर्शा रहा है। यह मॉडल मेरे पास ही है।“

उन्होंने हमें यह भी बताया कि उन्होंने इस मॉडल की तस्वीर भी ली थी जो एक पत्रिका में प्रकाशित की गई थी और उन्होंने वह तस्वीर फेसबुक पर मौजूद कुछ पेज पर भी पोस्ट की थी।

आपको बता दें कि दिलीप सरकार इंग्लैंड में स्थित एक कलाकार है।  

इस जानकारी को ध्यान में रखते हुए हमने गूगल और फेसबुक पर और कीवर्ड सर्च किया। हमें दिलीप सरकार द्वारा फेसबुक पर किया गया एक और पोस्ट मिला। उस पोस्ट में भी उन्होंने वायरल हो रही तस्वीर के साथ और भी कई तस्वीरें प्रकाशित की थी। यह पोस्ट उन्होंने 28 दिसंबर 2017 में किया था। इस मॉडल का विवरण मिलिटरी मॉडलिंग मैगझिन के पृष्ठ 18 से 21 में दिया गया है। 

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इसके बाद हमने वायरल हो रहे पोस्ट में दिख रहे समाचार लेख की तस्वीर के बारे में जाँच की। हमें 19 नवंबर 2019 को अमर उजाला द्वारा प्रकाशित किया गया एक लेख मिला। लेख में लिखा है कि लखनऊ में सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 18 नवंबर 1962 को चीनी आक्रमण में शहीद हुए भारतीय सैनिकों का स्मरण किया व उनको श्रद्धांजली दी। यह लड़ाई रेजांग ला लड़ाई के नाम से जानी जाती है। इस लड़ाई में युद्ध के तीन महीने बाद शहीद हुए सैनिकों के पार्थिव शरीर मिले तब कई मृत शरीरों की उंगलियां ट्रिगर पर थी।

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निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया कि वायरल हो रही तस्वीर के साथ किया गया दावा गलत है। उसमें दिख रहा मानव कंकाल रेजांग ला की लड़ाई में शहीद हुए सैनिकों का नहीं है। यह एक कलाकार द्वारा बनाया गया मॉडल है। इसका रेजांग ला की लड़ाई से कोई संबन्ध नहीं।

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Title:यह कंकाल रेजांग ला की लड़ाई में शहीद हुए सैनिकों नहीं; जानिए क्या है इस का सच…

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False

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