क्या तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता को कोलकाता में विद्यासागर कॉलेज के सामने पथराव करते हुए पकड़ा गया?

False Political
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१७ मई २०१९ को अश्व्थ नामक एक फेसबुक यूजर ने एक विडियो पोस्ट किया | विडियो के शीर्षक में लिखा गया है कि “असली नाम – मोहम्मद निसार, नारंगी टी-शर्ट, माथे पर तिलक | अब आप कई चीजों को समझ सकते हैं ! आप अमित शाह के रोड शो के दौरान # कोलकाता में होने वाले “भगवा गुंडों” को हिंसात्मक रूप से संबोधित करने के लिए इसे कनेक्ट कर सकते हैं | वे सभी #TMC गुंडे थे | पोस्ट क्रेडिट: रवि सिंह”

विडियो में एक लड़के को हम भगवा रंग के कपडे पहने हुए देख सकते है | लड़के को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है और वो खून से सना हुआ है | पुलिस को कहते हुए सुन सकते है कि इस लड़के ने पत्थरबाजी की है | विडियो के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि यह लड़का तृणमूल कांग्रेस का गुंडा है और कोलकाता में अमित शाह के रोड शो के दौरान हिंसा फैलाते हुए देखा गया | यह विडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा में है | फैक्ट चेक किये जाने तक इस विडियो ने ९५० से ज्यादा व्यूज प्राप्त कर चुकी थी |

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हाल ही में कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के एक रोड शो के दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल में तनाव का माहोल है | क्या वास्तव में यह लड़का तृणमूल कांग्रेस का कार्यकर्ता है और इसीने कोलकाता में चलने वाली तनाव के बीच हिंसा फैलाने की कोशिश की? जानिए सच |

संशोधन से पता चलता है कि..

जांच की शुरुआत हमने इस विडियो को बारीकी से जांचने से की | वीडियो में कई संकेत दिए गए हैं जो बताते हैं कि यह कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज में हिंसा के बाद का चित्रण नहीं करता है | सबसे पहले, पुरुष पश्चिम बंगाल में असामान्य बोली बोल रहे हैं | यह उच्चारण हिंदी भाषी पूर्व भारतीय राज्यों- बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश या छत्तीसगढ़ के लोगों की भाषा के समान है | दूसरी बात, जिस स्थान पर आदमी को पकड़ा गया था, वह कोलकाता की सड़कों से मिलता-जुलता नहीं है (जहां शाह के रोड शो के दौरान हिंसा हुई थी) | तीसरी बात, विडियो में हम पुलिस को नीले रंग की वर्दी में देखा जा सकता है जो बंगाल पुलिस का पोशाक नहीं है | यह तथ्य इसके दावें पर संदेह पैदा करता है |

इसके पश्चात विडियो के शीर्षक में यह लिखा गया है कि इस विडियो का क्रेडिट रवि सिंह नामक व्यक्ति का है | हमने फेसबुक पर ढूँढने की कोशिश की परंतु हमें कुछ नहीं मिला | इसके पश्चात हमने ट्विटर पर रवि सिंह नामक यूजर के अकाउंट पर यह ट्वीट मिला |

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इसके बाद हमें वीडियो पर एक कमेंट मिला, जिसमें उल्लेख किया गया है कि यह घटना मूल रूप से जमशेदपुर का है और १२ मई को चुनाव को लेकर दो समूहों के बीच टकराव हुआ था |

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ट्विटर पर हमें यह विडियो काफ़ी चर्चा में मिली | सुनील बैत्मंगलकर नामक एक ट्विटर यूजर ने इस विडियो को पोस्ट करते हुए लिखा है कि “कल #कोलकाता में अमित शाह के रोड शो के दौरान #TMC ने हिंसा का तांडव किया | इस क्लिप में यह लड़का मोहम्मद निसार है | उसे ज़बरदस्ती भगवा रंग का शर्ट और माथे पर तिलक लगवाया गया है | इसे अमित शाह के रोड शो में पथराव करते पकड़ा गया है |”

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इस ट्वीट पर हमें एक कमेंट मिला जिसमे लिखा गया है कि “नहीं, यह एक बूथ पर १२ मई को मतदान के दिन जुगसलाई # जामशेदपुर # झारखंड में पथराव की घटना का है | उसका नाम मोहम्मद  इरशाद है और उसे  गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया |”

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जब हमने उक्त घटना पर मीडिया रिपोर्टों की तलाश की, तो हम एक न्यूज़१८ बिहार झारखंड द्वारा प्रसारित न्यूज़ बुलेटिन मिला, जहां इसी आदमी को २ मिनट १९ सेकंड पर पुलिस द्वारा पकड़ते हुए  देखा जा सकता है | हम आरोपी को पुलिस के साथ बातचीत करते हुए देख सकते है, जबकि उसके सिर से गहरा खून बहते हुए देखा जा सकता है | विडियो के शीर्षक में लिखा गया है कि “पुलिस ने टियर गैस के गोले फेके, जमशेदपुर के जुगसलाई में झड़प के बाद लाठीचार्ज का आदेश |”

इसके पश्चात हमने इस घटना से जुडी खबर ढूँढने की कोशिश की | हमें टाइम्स ऑफ़ इंडिया द्वारा प्रकाशित खबर मिली | खबर के अनुसार १२ मई को मतदान केंद्र के बाहर भाजपा और जेएमएम् कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं | एक भारी पुलिस बल को तैनात किया गया था जिसने हिंसा को नियंत्रित करने के लिए आंसू आने वालें गैस का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज का सहारा लिया | रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने दो पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया था |

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प्रभात खबर नामक एक स्थानीय अख़बार की खबर के अनुसार जब १२ मई को चुनाव के कारण दो गुट आपस में भिड़ गए तब जमशेदपुर का जुगसलाई एक युद्ध के मैदान में बदल गया था और स्थानीय पुलिस को आंसू लाने वाला गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा | झड़प के दौरान सात को हिरासत में लेने के बाद इलाके में धारा १४४ लागू कर दी गई |  

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अवेन्यू मेल नामक एक स्थानीय न्यूज़ वेबसाइट ने भी इस खबर को प्रकशित किया |

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गूगल सर्च से हमें पता चला कि नीले वर्दी वालें पुलिस रैपिड एक्शन फ़ोर्स से थे | दंगा और भीड़ स्थितियों से निपटने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) भारतीय सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) का एक विशेष विंग है |

निष्कर्ष: तथ्यों की जांच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | यह विडियो १२ मई २०१९ को जमशेदपुर में हुए दंगे में पकडे गये आरोपी का है | इस वीडियो का विद्यासागर कॉलेज हिंसा के साथ या पश्चिम बंगाल में हुई झड़पों से संबंध नहीं है |

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Title:क्या तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता को कोलकाता में विद्यासागर कॉलेज के सामने पथराव करते हुए पकड़ा गया?

Fact Check By: Drabanti Ghosh 

Result: False


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