नोगांव में लोगों द्वारा बच्चा चोरी के आरोप में पकड़ी गई वृद्ध महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ है।

False National Social
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१ अगस्त २०१९ को फेसबुक पर ‘Rahul Gautam’ नामक फेसबुक यूजर ने एक तस्वीर की थी, इस पोस्ट में एक वृद्ध महिला की तस्वीर दिखाते हुये ये ख़बर दी गयी थी कि “आज दोपहर नोगांव में बच्चा चोरी की असली घटना आई सामने जा डुकरिया एक बच्ची को चोरी करके ले जा रही थी जब लोगो ने बच्ची के रोने चिल्लाने की बात सुनी तो लोगो ने इस महिला को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया इस महिला के बैंग में कुछ नशीली दवाइयाँ ओर चाकू जैसे औजार मिली सगिन्ध व्यक्तियों से सावधान रहें अपने बच्चों पर नजर रखे” इस पोस्ट के द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि ‘तस्वीर में दिखाई देने वाली वृद्ध महिला बच्चा चोरी करते वक़्त रंगे हाथों पकड़ी गयी और पुलिस के हवाले कर दी गयी है |’ क्या सच में ऐसा है ? आइये जानते है इस पोस्ट के दावे की सच्चाई |

सोशल मीडिया पर प्रचलित कथन:

FacebookPost | ArchivedLink

संशोधन से पता चलता है कि…

हमने सबसे पहले उपरोक्त पोस्ट में किये गए दावे को अलग-अलग कीवर्ड्स से गूगल पर ढूंढा, तो हमें ‘Thenetizennews’ नामक वेबसाइट मिली | १ अगस्त २०१९ को प्रसारित ख़बर के मुताबिक नौगांव शहर के रामकुटी क्षेत्र में एक महिला को बच्चा चोरी करते वक़्त गांव वालों ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया | इसके अलावा इस महिला को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया है, पूरी ख़बर को पढने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें |

TheNetizenNewsPost | ArchivedLink

इस ख़बर के बारे में और ढूँढने पर हमें गूगल पर और अधिक जानकारी नहीं मिल पायी, इसके चलते हमने छत्तरपुर की नोगांव पुलिस से संपर्क किया, वहां के प्रधान आरक्षक राम गोपाल जी ने हमें बताया कि, “यह ख़बर गलत तरीके से बताई जा रही है | तस्वीर में दिखाई गयी महिला इसी गांव की निवासी हैं और मानसिक रूप से अस्वस्थ है | पहले वो एक अस्पताल में नर्स का काम करती थी, मगर नौकरी से निकाल देने पर उन्हें सदमा पहुंचा और उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया | गाँव के लोगों ने ये झूठी अफवाह फैलाई थी कि वो बच्चा चुराती है | उनका नाम उषा अहिरवार है और वह एक अवकाश प्राप्त आर्मी ऑफ़िसर की बेटी हैं | उषा का भाई पद्म सिंह अहिरवार भी एक पुलिस सिपाही है और छत्तरपुर जिले में तैनात है| यहां के लोग इसे ज़बरदस्ती पकड़ कर ले आये और कहने लगे कि यह बच्चा-चोर है, दावे अनुसार उसके पास किसी भी क़िस्म के नशीले या ज़हरीले पदार्थ नहीं मिले | लोगों द्वारा उषा को पुलिस के हवाले करने के पश्चात हमने उनका मेडिकल परीक्षण यहाँ के सरकारी अस्पताल में कराया था, डॉक्टरों द्वारा इन्हें मानसिक रोग से ग्रसित बताया गया है| 

कुछ दिन पहले भी एक ऐसी ही अफवाह फैली थी, लोग एक गूंगे व निर्दोष मानसिक रोगी को मारपीट कर थाने लेकर आये और कहा कि वह एक बच्चा-चोर है | जांच-पड़ताल से मालूम हुआ कि आरोप गलत था | उषा के सम्बंध में भी ये इल्ज़ाम महज़ एक अफ़वाह थे,उषा बच्चा-चोर नहीं है |”   

नोगांव पुलिस से हमने उषा के भाई पद्म सिंह अहिरवार जी की जानकारी प्राप्त कर उनसे संपर्क साधा, उन्होंने कहा बताया कि, “आजसे ढाई-तीन साल पहले वह जिला चिकित्सालय में नर्स का काम करती थी।अपनी सीन्यर से अनबन के चलते जब उसे नौकरी निकाला गया, तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। उसका इलाज हम करवा रहें हैं, मगर पुलिस की नौकरी में होने के कारण मेरा उसके साथ हमेशा रहना सम्भव नहीं होता है | मौका मिलते ही वो कभी भी, कही भी चली जाती है | लोगों से खाना मांगकर खाती है | उस दिन भी वो एक लड़की के पास से खाना मांग रही थी, आस पास से गुजरने वाले लोगों को लगा की वो बच्चे को अगवा करने का प्रयास कर रही है | उषा के उपचार की जो भी दवाइयां उसके पर्स में उन्हें लोगों ने ज़हरीला और नशीला पदार्थ समझा, हमने उषा को इस घटना के बाद ग्वालियर के मानसिक चिकित्सालय में आगे की चिकित्सा के लिए भेज दिया है और २ तारिख अगस्त को उसका दाखिला भी हो गया है |

घर के सारे सदस्य भी इस हादसे से काफी परेशान हैं | गांव वालों को सब पता रहने के बावजूद भी, मदद करने के जगह, सब मेरी बहन के मानसिक असन्तुलनीयता का मज़ा लेते हैं | हमारी सबसे बिनती है कि किसी के लाचारी पर ऐसा व्यंग न करें और न ही उन पर ऐसा कोई झूठा आरोप लगाए |”

उषा के भाई के दावे अनुसार उषा  का दाखिला ग्वालियर मानसिक आरोग्यशाला में हुआ है या नहीं, यह जानने के लिए जब हमने ग्वालियर मानसिक आरोग्यशाला में संपर्क साधा, तो हमें बताया गया कि उषा राहुल नामक एक मानसिक रोगी का दाखिला २ अगस्त को सुबह ११:३० बजे उनके मानसिक आरोग्यशाला में हुआ है।

नाम अलग होने के वजह से जब हमने उषा के भाई से इस बात की जांच कि तो उन्होंने कहा कि उषा शादी के पहले अहिरवार थी और शादी के बाद राहुल लगाने लगी | मगर उसके पति को गुज़रे कई साल हो गए हैं, मगर उषा अभी भी अपना नाम उषा राहुल लिखती है |

इस संशोधन से यह बात स्पष्ट होती है कि पोस्ट में साझा तस्वीर में दिखने वाली महिला मानसिक रूक से अस्वस्थ हैं और उनके गांव वालों ने गलत इलज़ाम लगाकर अफवाह फैलायी थी| उनके पास से कोई भी नशीला या ज़हरीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था |

जांच का परिणाम :  उपरोक्त पोस्ट मे किया गया दावा ‘तस्वीर में दिखाई देने वाली वृद्ध महिला बच्चा चोरी करते वक़्त रंगे हाथों पकड़ी गयी और पुलिस के हवाले कर दी गयी |’ ग़लत है |

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Title:नोगांव में लोगों द्वारा बच्चा चोरी के आरोप में पकड़ी गई वृद्ध महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ है।

Fact Check By: Natasha Vivian 

Result: False


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