नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कर रहे ABVP कार्यकर्ताओं की यह छवि एडिटेड है ।

False National Social
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वर्तमान में मीडिया व सोशल मीडिया पर नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध एवं समर्थन को लेकर पूरे देश से ख़बरें आ रहीं है, ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन की तस्वीर सोशल मिडिया पर काफी प्रतिक्रियायें बठोर रही है, तस्वीर इस दावे के साथ साझा की जा रही है कि ये तस्वीर भा.ज.पा के छात्र संघठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों द्वारा असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में अपने ही राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर मोर्चा खोल दिया है। 

जहाँ एक तरफ भा.ज.पा / संघ परिवार के लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में मार्च कर रहे हैं, वही पर भा.ज.पा की असम छात्र इकाई इसके विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं, यह संशय का विषय है ।

ये तस्वीर 1 जनवरी, 2020 से सोशल मीडिया में फ़ैल रही रही है, तस्वीर में दिख रहे बैनर में निम्नलिखित वाक्य पढ़ा जा सकता है (हिंदी अनुवाद): “हम NRC, CAB और CAA का समर्थन नहीं करते हैं। मोदी गो बैक, टकला अमित गो बैक” जिसे एबीवीपी असम के साथ टैग किया गया है। लेकिन क्या वाकई में केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ उन्हीं के छात्रसंघ द्वारा विरोध प्रदर्शन की यह तस्वीर सही है? आइए जानते हैं इस तस्वीर की असलियत।

सोशल मीडिया पर प्रचलित कथन:

FacebookPost 

अनुसंधान से पता चलता है कि…

गूगल रिवर्स इमेज सर्च में इस तस्वीर की तलाश करने पर हमें AhmedabadMirror द्वारा 19 दिसम्बर 2019 को प्रकाशित एक लेख मिला । जिसमें ए.बी.वी.पी. द्वारा किये गए प्रदर्शन की तस्वीर तो दिखी, मगर बैनर पर लिखे वाक्य अलग थे। लेख और उसमें प्रकाशित तस्वीर का स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते है ।

ArchivedLink

ऊपर दिए गए स्क्रीनशॉट में हम देख सकते हैं कि ए.बी.वी.पी. ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में बैनर पकड़ा है। लेख में दी गयी जानकारी के मुताबिक, 18 दिसंबर 2019 को भा.ज.पा के छात्र संगठन एबीवीपी के लगभग 500 कार्यकर्ताओं ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में अहमदाबाद के साबरमती आश्रम के पास एक रैली का आयोजन किया था। नागरिकता संशोधन अधिनियम का समर्थन करते हुए गुजरात के कई जिलों से आये ए.बी.वी.पी. कार्यकर्ताओं ने रैली में CAB/NRC के समर्थन वाले बैनर और तख्तियों के साथ भाग लिया। यह तस्वीर इसी रैली की है।

दोनों तस्वीरों की तुलना करने पर पता चलता है कि, वायरल होने वाली तस्वीर, असली तस्वीर के साथ छेड़-छाड़ कर तैयार की गयी है ।

अहमदाबाद टाइम्स के लेख में ए.बी.वी.पी. राज्य सचिव निखिल मेथिया का उल्लेख किया गया है। निखिल मेथिया गुजरात ए.बी.वी.पी. के राज्य सचिव हैं। जब हमने उनके फेसबुक पोस्ट की तस्वीरों की तुलना पोस्ट में दी गई तस्वीर के साथ की, तो पाया कि तस्वीर में नीले रंग का कुर्ता पहने ए.बी.वी.पी. का ध्वज हाथ में पकडे दायें तरफ खड़े प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ता निखिल ही है।

निखिल मेथिया से संपर्क करने पर उन्होंने इस बात की पुष्टि की, कि यह तस्वीर उन्हीं की  है और यह रैली असम से नहीं बल्कि अहमदाबाद में CAA के समर्थन में निकाली गयी रैली थी । हमारे द्वारा पोस्ट के बारें में बताये जाने के उपरांत निखिल ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर इन तस्वीरों की सच्चाई उजागर करते हुए नीचे दिया गया पोस्ट डाला ।

फेसबुक पोस्ट

इस तस्वीर को फैक्ट क्रेसेंडो मलयालम टीम ने सबसे पहले 2 जनवरी 2020 को फैक्ट चेक किया है । मलयालम में फैक्ट चेक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ।

Malayalam.factcrescendo

अनुसंधान से ये पुष्टि होती है कि, उपरोक्त पोस्ट में साझा छवि एडिटेड है। 

जांच का परिणाम :  उपरोक्त पोस्ट मे किया गया दावा “असम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने CAA व NRC का विरोध किया ।” हमारी जांच में पूरी तरह से ग़लत पाया गया है ।

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Title:नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कर रहे ABVP कार्यकर्ताओं की यह छवि एडिटेड है ।

Fact Check By: Natasha Vivian 

Result: False


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