बांग्लादेश पुलिस के एक पुराने वीडियो को उत्तर प्रदेश पुलिस की बर्बरता के नाम से वाइरल किया जा रहा है।

False International Social
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The War Report’ नामक एक युजर ने 3 जनवरी 2019 को पुलिस कारवाई का एक वीडियो ट्वीट करते हुए दावा किया कि, यह वीडियो उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मदरसे में घुसकर की गयी बर्बरता का है। पुलिस द्वारा इस हमले में 5 से अधिक लोग मारे गए और कई सारे छात्र व शिक्षक घायल हुये हैं।

चूँकि मामला गंभीर है व वर्तमान में जब एक और पुलिस द्वारा CAB/NRC के विरोधों के चलते कई जगह बल प्रयोग करना पड़ रहा है, ऐसे माहौल में पुलिस द्वारा किसी शैक्षणिक संस्थान में जबरन घुस लोगो की हत्या करना वर्तमान माहौल को अत्याधिक तनावपूर्ण बना सकता है, फैक्ट क्रेसेंडो ने इस वीडियो की सत्यता की जांच की, और पाया कि उपरोक्त दावा गलत है, आइये जानते है इस वीडियो का सच्चाई।

सोशल मीडिया पर प्रचलित कथन:

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जब हमने इस वीडियो को अन्य सोशल मंचो पर दूंढा तो हमें सदृश्य वीडियो असम से सम्बंधित भी मिले जहाँ येही वीडियो NRC में नाम ना होने के कारण पुलिस द्वारा जबरन निकाले जाने के नाम से बताया जा रहा है, वीडियो यहा देख सकते है.

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

इस ट्वीट के नीचे एक यूजर ने कमेंट कर के लिखा है की, वीडियो में दिखने वाली पुलिस बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) है। 

इसके बाद हमने इस वीडियो को यांडेक्स इमेज सर्च पर ढूंढा, तो हमें YouTube पर 2013 में अपलोड किया गया हुबहू वीडियो मिला ।

C:\Users\Fact5\Desktop\UP Police attack on Madarsa\screenshot-yandex.com-2020.01.03-11_16_51.jpg

इस के अनुसार, बांगलादेशी बॉर्डर गार्ड्स (BGB) व रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने ढाका में 5 मई 2013 रात को हिफाज़त-ए-इस्लाम के प्रदर्शनकारियों पर गोलिया चलायी थी। वीडियो में पुलिस की वर्दी पर RAB लिखा हुआ देखा जा सकता है।

इस से यह बात स्पष्ट है कि यह वीडियो 2013 से ही इंटरनेट पर मौजूद है। गूगल पर इस घटना के बारे में सर्च करने पर BBC और Aljazeera की 6 मई 2013 को प्रकाशित ख़बरें मिली। इस के अनुसार बांग्लादेश में हिफाज़त-ए-इस्लाम नामक एक संगठन ने बांगलादेश में सख्त ईशनिंदा क़ानून (Anti-Blasphemy Law) के साथ अन्य माँगो के लिए 5 मई को प्रदर्शन किया था।  ‘हिफाजत’ ने मोतीझील में चलने वाले बांग्लादेश के मुख्य व्यापार भी बंद करवाने की धमकी दी थी। मगर जब यह विरोध हिंसक होने लगा, तब पुलिस ने इस को रोकने के लिए पहले लाठीचार्ज किया। 6 मई की सुबह ढाई बजे पुलिस ने शापला चौक में जमा प्रदर्शनकर्ताओं को वहाँ से जाने को कहा। किंतु, प्रदर्शनकर्ताओं द्वारा पथराव और दंगे शुरू किये जाने पर पुलिस द्वारा गोलियां चलाई गयी,  इस घटना पर पूरी जानकारी के लिए सिटिझन इंटरनैशनल की यह रिपोर्ट पढे । 

इस वीडियो के वाइरल होने पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर पर इस दावे को खारिज करते हुए इसे झुठी खबर कहा है, पुलिस ने लिखा की, यह वीडियो उत्तर प्रदेश पुलिस का नहीं। वीडियो में दिख रही वर्दी यू.पी. पुलिस की नहीं है।

TwitterArchivedLink

इस अनुसंधान से यह बात स्पष्ट होती है कि, उपरोक्त पोस्ट में साझा वीडियो उत्तर प्रदेश पुलिस का नहीं है। यह वीडियो बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन कर रहे हिफाज़त-ए-इस्लाम संघठन के लोगों पर वहाँ की पुलिस द्वारा की गई कारवाही का है। जिसे गलत विवरण के साथ लोगों को भ्रमित करने के उद्देश्य से फैलाया जा रहा है।

जांच का परिणाम :  उपरोक्त पोस्ट में किया गया दावा “उत्तर प्रदेश पुलिस ने मदरसे में हमला कर पांच लोगों को मार गिराया व ये उसी बर्बरता का वीडियो है ।” ग़लत है । 

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Title:बांग्लादेश पुलिस के एक पुराने वीडियो को उत्तर प्रदेश पुलिस की बर्बरता के नाम से वाइरल किया जा रहा है।

Fact Check By: Natasha Vivian 

Result: False


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