सर्जिकल मास्क को गर्म भाप में रख महीन फैब्रिक के रेशों को कीटाणु बता लोगों में भय व भ्रामकता फैलाई जा रही है|

Coronavirus False
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देश में कोरोना महामारी की दूसरी व तीसरी लहर वर्तमान में अपने चरम पर है | २०२१ में आई कोरोना की लहर में संक्रमितों की संख्या प्रतिदिन तीन लाख को पार कर चुकी है | डॉक्टरों और विशेषज्ञों की माने तो लोग अगर लापरवाह बने रहें तो मई के महीने में मरीजों की संख्या और भी तेजी से बढ़ सकती है | विश्व स्वास्थ्य संगठन व अन्य जाने माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस महामारी से मुक्ति पाने के सबसे कारगार उपाय मास्क पहनना और सामाजिक दुरी बनाये रखना है

वर्तमान में घर से बाहर मास्क पहनने को लेकर भारतीय सरकार व राज्य सरकारों द्वारा सख्ती बरती जा रही है व मास्क पहनना COVID गाइडलाइन्स के अंतर्गत एक अनिवार्य नियम रखा गया है व मास्क न पहनने वालों पर क़ानूनी कार्यवाही की जा रही है, इन्ही सब के बीच सोशल मंचो पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल होता दिख रहा है जिसमे बाजार में मिलने वाले आम सर्जिकल मास्क से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला दावा किया जा रहा है | इस वीडियो के माध्यम से कहा जा रहा है कि इन सर्जिकल मास्क में कीटाणु होते हैं और ईन मास्कों को लगाने से इंसान बीमार हो सकता है | 

वायरल हो रहे इस वीडियो में एक सामान्य सर्जिकल मास्क को एक गर्म पानी से भरे मग के ऊपर रखा जाता है, इसके बाद एक कैमरे के लेंस को मास्क की सतह पर जूम किया जाता है | ऐसा करने से मास्क की सतह पर कुछ काले रेशे हिलते हुए नजर आते हैं | कहा जा रहा है कि यह मास्क चीन में बने है जहाँ से यह कीड़े मास्क के जरिये हमारे मुहँ से होते हुए शरीर में अंदर जा रहें है |  

वीडियो में एक आदमी कह रहा है, 

“ये मास्क से ये पता चला कि इसके अंदर बहुत ही बारीक-बारीक कीड़े होते हैं, जर्म्स होते हैं जो कि गर्म से, गर्मी मिलने से बाहर आते हैं | जैसे आप ये मास्क लगाते हो अपने मुंह पर और आपके मुंह से जो गर्म भाप निकलती है, गर्म सांस निकलती है, वो गर्म सांसों से ये कीड़े जो इस मास्क से, जो इसके बारीक-बारीक छेद हैं, उससे बाहर आते हैं | और फिर जब आप सांस अंदर लेते हो, तो ये बारीक-बारीक छेद से ये जो कीड़े हैं, जो आपको आम आंख से दिखाई नहीं देता, वो आपकी सांसों के जरिये आपके फेफड़े में चले जाते हैं और इसी से बीमारी ज्यादा फैलती है | इसी से लोग ज्यादा बीमार होते हैं और इसी के जरिये लोग ज्यादा मरे हैं | जितने भी लोग मरे हैं, ज्यादातर मास्क लगाने से ही मरे हैं |” इसके बाद वीडियो में ये प्रयोग घर पर करने का तरीका बताया जाता है |”

इस वीडियो के अंत में बाजार के मास्क इस्तेमाल न करने का अनुरोध किया जाता है और कहा जाता है कि कोरोनावायरस केवल एक रचाई गयी कहानी है|

हालाँकि हमारी पड़ताल में ये दावा गलत पाया गया है, वीडियो में जिस महीन चीज़ को कीटाणु बताया जा रहा है वो असल में फैब्रिक(कपड़े) के रेशे हैं, हम अपने पाठकों से ये विनती करतें हैं कि वे इस प्रकार के भ्रामक व असत्य ख़बरों पर यकींन न करें व विश्व स्वास्थ्य संगठन , भारतीय सरकार व स्वास्थ्य विशेषज्ञों के द्वारा दी जा रही जानकारियों का अनुपालन करें | 

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने पाया है कि सर्जिकल मास्क को भाप के ऊपर रखने से जो काले रंग के रेशे हिलते हुए नजर आते हैं वो मास्क के ही फैब्रिक के महीन रेशे हैं, न कि कीटाणु |

उपरोक्त दावे की जाँच की शुरुवात हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर मास्क से संबंधित दी गई जानकारी को ढूँढकर की जिसके परिणाम से हमें मास्क से संबंधित कई सवालों का जवाब मिला | वेबसाइट में दी गई जानकारी में लिखा गया है कि.. 

निम्नलिखित समूहों के लिए मेडिकल मास्क के इस्तेमाल की सिफारिश की जाती है, क्योंकि वे COVID-19 के साथ गंभीर रूप से बीमार होने का अधिक जोखिम में हैं और मरने की संभावना है:

  1. ६० या इससे अधिक उम्र के लोग।
  2. अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों के साथ किसी भी उम्र के लोग, जिनमें क्रोनिक श्वसन रोग, हृदय रोग, कैंसर, मोटापा, प्रतिरक्षात्मक रोगी और मधुमेह मेलेटस शामिल हैं |

गैर-चिकित्सा के लोग, आम जनता जो ६० वर्ष से कम आयु के है और जिनके पास अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियां नहीं हैं, वे कपड़े से बने हुए मास्क का उपयोग में कर सकतें है |

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोनावायरस बीमारी से जंग में मास्क एक अहम हथियार है | उनके अनुसार ट्रांसमिशन को काबू करने के लिए और जीवन को बचाने के उपायों की एक व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में मास्क का उपयोग किया जाना चाहिए | 

इसके बाद फैक्ट क्रेसेंडो ने ‘हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च’ के एपिडीमियोलॉजिस्ट डॉ यासिर अल्वी से संपर्क कर इस वीडियो के सन्दर्भ में बात की, उनके द्वारा हमें बताया गया कि,

 “इस वीडियो में मास्क की सतह पर दिख रहे काले रेशे कीटाणु नहीं हैं | ये मास्क के ही फैब्रिक के रेशे हैं | किसी भी मास्क को गंदे हाथों से इस्तेमाल किया या फिर अगर उसमे धुल या मिटटी लगी तो यह कहना गलत होगा की मास्क में कीटाणु है | मास्क को पहनने से पहले हमेशा अपने हाथों को सैनिटाईज़ करे या फिर साबुन से धोकर मास्क को हाथ लगाए | साथ ही यह बात भी ध्यान रखना है कि कीटाणु माइक्रोस्कोपिक ओर्गानिस्म्स है जिन्हें खाली आँखों से नही देखा जा सकता है नाही मोबाइल फ़ोन के ज़ूम से | वीडियो में दिख रहे काले रेशे कपड़े की फैब्रिक के रेशे हैं जो गरम भाप या पानी से हिलते हुए दिख रहे है |”

फैक्ट क्रेसेंडो ने इस विषय में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि से संपर्क किया जिन्होंने हमें बताया कि “सोशल मीडिया पर चल रहे दावे सरासर गलत है | कोरोनावायरस संक्रमण एक वायरस द्वारा होता है जो 50 एनएम (नैनोमीटर) से 140 एनएम साइज़ में होता है | खाली आंखों या साधारण माइक्रोस्कोप में दिखाई नहीं देता | पैरासाइट याने कीटाणु- विभिन्न संक्रमणों के लिए जिम्मेदार सूक्ष्मजीवों का एक और समूह है, जो कोरोना वायरस के साथ बिल्कुल भी संबंध नहीं रखता है |”

‘चेक एकेडमी ऑफ साइंसेज’ के बायोलॉजिकल सेंटर की इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी लैबोरेट्री में असिस्टेंट प्रोफेसर जाना नेबेसरोवा ने मास्क में दिखते काले रेशों वाले एक ऐसे ही मिलते-जुलते वीडियो के बारे में ‘एएफपी’ को बताया, “ये काले रेशे कपड़े के रेशे लग रहे हैं | इस तरह के रेशे हवा में तैरते रहते हैं | वायरल वीडियो में ये रेशे हिलते हुए दिखाई दे रहे हैं, चूँकि ये रेशे हिल रहे हैं तो इन्हें हिलता हुआ देख ये दावा करना कि ये कीटाणु हैं गलत है |”

उपरोक्त वीडियो हमें एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया हुआ भी मिला जहाँ एक महिला किसी विदेशी भाषा में बात कर रही है | इस वीडियो के रूसी कैप्शन का हिंदी अनुवाद है, ‘मास्क में बिखरे कीड़े’, जिससे इस बात की पुष्टि हो जाती है कि वीडियो मूल रूप से भारत का नहीं है व इस वीडियो में विदेशी भाषा को हटाकर हिंदी भाषा का वाईसओवर किया गया है|  

यह वीडियो कई अलग अलग देशों में ऐसे ही मिलते जुलते दावे के साथ फैलाया गया है | इस संबंध में और अधिक और संबंधित की वर्ड सर्च करने पर हमें पता चला कि कजाकिस्तान के स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी एस भी वीडियो का खंडन किया जा चूका है, कजाकिस्तान की वेबसाइट ‘अर्नाप्रेस’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार कजाकिस्तान के स्वास्थ्य विभाग की ‘कमेटी ऑफ सैनिटरी एंड एपिडीमियोलॉजिकल कंट्रोल ऑफ दि मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ’ द्वारा ये स्पष्ट किया गया है कि मास्क में कीड़े होने की जो बात इस वीडियो में कही जा रही है, वो एकदम गलत है |

उपरोक्त दावे के अनुसार जब फ़ैक्टक्रेसेंडो ने एक साधारण सर्जिकल मास्क की परतों को खोल गर्म पानी की भाप के ऊपर रखा तो हमें विडियो मैं किए जा रहे दावे जैसा कुछ दिखाई नहीं दिया, इस विडियो को आप नीचे देख सकतें हैं।

निष्कर्ष:तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त वीडियो में किये जा रहे दावों को गलत पाया है | सर्जिकल मास्क को भाप के ऊपर रखने से जो काले रंग के रेशे हिलते हुए नजर आते हैं वो मास्क के ही फैब्रिक के महीन रेशे हैं, न कि कीटाणु |

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Title:सर्जिकल मास्क को गर्म भाप में रख महीन फैब्रिक के रेशों को कीटाणु बता लोगों में भय व भ्रामकता फैलाई जा रही है|

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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