देवस्थानम एक्ट के विरोध में तीर्थ पुरोहितों द्वारा भा.ज.पा नेता को घेरने के प्रकरण को किसान आंदोलन से जोड़कर वायरल किया जा रहा है।

False Political
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वर्ष 2022 में उत्तराखण्ड में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर इंटरनेट पर वर्तमान से ही कई गलत व भ्रामक खबरें वायरल होती दिख रही है। इन दिनों एक वीडियो सोशल मंचों पर काफी साझा किया जा रहा है, इस वीडियो में आप एक भीड़ को देख सकते है, इस भीड़ ने एक सफेद रंग की गाड़ी को घेरा हुआ है। वीडियो में कुछ समय बाद एक शख्स गाड़ी से उतरकर लोगों से बचने के लिये एक इमारत पर चढ़ जाता है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि उत्तराखण्ड में भा.ज.पा नेता को किसानों ने घेरा व उन्हें वहाँ से भगा दिया।

वायरल हो रही पोस्ट के शीर्षक में लिखा है, 

भाजपा के लीडर की उत्तराखंड में भी किसानों ने स्पीड चेक की। बीजेपी सरकार मुर्दाबाद मुर्दाबाद। किसान एकता ज़िदाबाद ज़िदाबाद।“

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान पाया कि वीडियो में दिख रही घटना का किसान आंदोलन से कोई सम्बन्ध नहीं है। जिन लोगों ने नेता को घेरा है वे तीर्थ पुरोहित है व देवस्थानम एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे है।

जाँच की शुरुवात हमने वायरल हो रहे वीडियो को ध्यान में रखते हुये हमने गूगल पर कीवर्ड सर्च किया परिणाम में हमें न्यूज़18 हिंदी द्वारा इस वर्ष 14 जुलाई को प्रकाशित किया हुआ एक समाचार लेख मिला जिसमें वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहे दृश्य की तस्वीर छपी हुई है। लेख के मुताबिक उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग में देवस्थानम एक्ट का विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहितों ने भा.ज.पा नेता पंकज भट्ट की गाड़ी को घेर लिया व धक्का-मुक्की की और साथ ही मारपीट भी की। इस दौरान मौका पाते ही पंकज भट्ट अपनी गाड़ी से निकले व वहाँ भागकर एक इमारत पर चढ़ गये।

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तदनंतर हमने अधिक जानकारी पाने के लिये यूट्यूब पर कीवर्ड सर्च किया व हमें वायरल हो रहा यही वीडियो द लाइव टी.वी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर इस वर्ष 15 जुलाई प्रसारित किया हुआ मिला। वीडियो के शीर्षक में लिखा है, “बीजेपी नेता को उत्तराखंड में खदेड़ा, नेता ने दीवार फांदकर बचाई जान!”

इस वीडियो में भा.ज.पा नेता पंकज भट्ट के साथ हुई इस घटना के बारे में पूरी जानकारी बतायी गयी है व देवस्थानम एक्ट क्या है इस बात की भी जानकारी दी हुई है।

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आपको बता दें कि उपरोक्त समाचार लेख व यूट्यूब वीडियो में कहीं भी ऐसा नहीं कहा गया है कि किसानों ने भा.ज.पा नेता को घेरा व उन्हें वहाँ से भगा दिया।

तत्पश्चात उपरोक्त सारे सबूतों की पुष्टि करने हेतु फैक्ट क्रेसेंडो ने उत्तराखण्ड में रुद्रप्रयाग में स्थित उखीमठ पुलिस स्टेशन के एस.एच.ओ मुकेश थलेडी से संपर्क किया व उन्होंने हमसे कहा, “वायरल हो रहा दावा गलत है। वीडियो में दिख रही लोगों की भीड़ किसानों की नहीं है बल्की तीर्थ पुरोहितों की है जो देवस्थानम एक्ट के खिलाफ उखीमठ तहसील में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे और रास्ते के बीच भा.ज.पा नेता पंकज भट्ट की गाड़ी खड़ी थी। विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहितों ने आक्रोश जताया व पंकज भट्ट की गाड़ी को घेर लिया व परिस्थिति की गंभीरता देख उन्हें गाड़ी से उतरकर भागना पड़ा। इस घटना का किसानों व उनके आंदोलन से कोई सम्बन्ध नहीं है।

जानिये देवस्थानम एक्ट क्या है व तीर्थ पुरोहित इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

देवस्थानम एक्ट को त्रिवेंद्र रावत सरकार की ओर से केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों को एक आई.ए.एस अधिकारी द्वारा शासित देवस्थानम बोर्ड के दायरे में लाने के लिए पेश किया गया था। आपको बता दें कि त्रिवेंद्र रावत अब उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री नहीं हैं और अब उत्तराखंड का पुजारी/पंडा वर्ग इस एक्ट का विरोध कर रहे हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया कि वायरल हो रहे वीडियो के साथ किया गया दावा गलत है। इस घटना से किसानों से कोई सम्बन्ध नहीं है। जिन लोगों ने नेता को घेरा है वे तीर्थ पुरोहित है व उत्तराखंड देवस्थानम एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे है।

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. ज्योतिरादित्य सिंधिया के दो वर्ष पुराने वीडियो को वर्तमान में हुये केंद्रीय मंत्रालय फेरबदल से जोड़ वायरल किया जा रहा है।

२. २०१९ की बांग्लादेश में के ईद-ए- मिलाद- उन नबी के जलूस की तस्वीर को उत्तर प्रदेश में ओवैसी के रैली के नाम से फैलाया जा रहा है|

३. सुप्रीम कोर्ट के वकील ऍड. भानू प्रताप सिंह के भाषण के वीडियो को हिमालया कंपनी के मालिक का बता वायरल किया जा रहा है।

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Title:देवस्थानम एक्ट के विरोध में तीर्थ पुरोहितों द्वारा भा.ज.पा नेता को घेरने के प्रकरण को किसान आंदोलन से जोड़कर वायरल किया जा रहा है।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False


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