FACTCHECK:- स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग के कारण आंखों में कीड़े नहीं पड़ते है |

False Social
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

सोशल मीडिया पर एक चिकित्सा प्रक्रिया का विचलित करने वाला वीडियो, जिसमें एक व्यक्ति की आंख से एक लंबा कीड़ा निकाला जा रहा है काफी तेजी से फैलाया जा रहा है | इस वीडियो के साथ कहा जा रहा है कि लंबे समय तक स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से यह कीड़ा आंख के अंदर विकसित हो गया था |

इस वीडियो के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि ये मरीज की आंखों से कीड़े हटाने का वीडियो हैं ,जो कीड़े हटाये जा रहें हैं वे स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग के कारण विकसित होतें है, साथ ही इस वीडियो से सबक ले कर बच्चों को मोबाईल से दूर रखने की बात भी की जा रही है |

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि 

लंबे समय तक मोबाइल फोन पर गेम खेलने से आंखों में चले जाने वाले पैरासाइट नामक कीड़े को दूर करने का दृश्य। आवश्यक रूप से देखें | कृपया इसे सभी के ग्रुप में भेजें। भेजने वाले को बहुत-बहुत धन्यवाद… बच्चों को दिखाने और समझाने के लिए |”

फेसबुक पोस्ट 

अनुसंधान से पता चलता है कि….

फैक्ट क्रेसेंडो ने पाया कि वायरल वीडियो में जिस मरीज की आंख का ऑपरेशन किया जा रहा है, वह लोआ लोआ कीड़े से पीड़ित था। यह कीड़ा इंसानों में कुछ खास तरह की मक्खियों से फैलता है न कि स्मार्टफोन से |

जाँच की शुरुवात हमने उपरोक्त वीडियो को इन्विड वी वेरीफाई टूल की मदद से छोटे कीफ्रेम्स में तोड़कर व गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने से की, जिसके परिणाम से हमें वायरल हो रहे वीडियो का एक लंबा वर्शन मिला जिसे १८ अप्रैल २०१३ को डॉ एशले मुलमुत्तिल के आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट किया गया था | डॉ एशले थॉमस जैकबमुलमूत्तिल नेत्र अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, केरल के चिकित्सा निदेशक और मुख्य सर्जन हैं | ” | पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि “लोआ लोआ संक्रमण को देखा जा सकता है जो पश्चिम अफ्रीका में पाए गये कीड़े के परिणामस्वरूप आंखों में नज़र आ रहे है | वे एशिया, यूरोप और अमेरिका में क्यों दिखाई दिए? हम इसे फैलने से रोकने के लिए क्या कर रहे हैं? क्या हम इसे रोक सकते हैं? तुम क्या कर सकते हो?”

WarningSensitive Content 

मूल वीडियो में, डॉ. मुलमूत्तिल समझा रहे थे कि जिस मरीज की आंख का ऑपरेशन किया जा रहा था, वह आंखों में तेज दर्द के साथ आया था। करीब से देखने पर उन्हें आंख के अंदर किसी जीवित परजीवी की मौजूदगी का अहसास हुआ। आगे जाँच के बाद उन्होंने यह पाया कि यह लोआ लोआ नामक ८ इंच लंबा कीड़ा है, जो मूल रूप में पश्चिमी अफ्रीका में पाए जाते है |

आगे वीडियो में, उन्होंने कहा कि लोआ लोआ कीड़े का संक्रमण मुख्य रूप से कुछ प्रकार की मक्खियों के कारण होता है। ये मक्खियां इंसान की त्वचा काटती हैं और खून को चाटती हैं | इस प्रक्रिया के दौरान, वे कीड़े के लार्वा को मानव शरीर में स्थानांतरित करते हैं | यह कीड़ा ज्यादातर आंख के अंदर बढ़ता है लेकिन मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े या यहां तक कि त्वचा के नीचे भी पाया जा सकता है। इस कीड़ा को दूर रखने के लिए अपने आस-पास के वातावरण को साफ रखना चाहिए |

इससे यह स्पष्ट होता है वायरल वीडियो स्मार्टफोन से आये पैरासाइट इन्फेक्शन का नही है बल्कि लोआ लोआ नमक एक परजीवी कीड़े का है जो से पीड़ित था जो मक्खियों के काटने से फैलता है |

क्या स्मार्टफोन से हो सकता है आंखों के कीड़े का संक्रमण?

हमने गूगल पर कीवर्ड सर्च के मदद से यह जानने की कोशिश की कि स्मार्टफोन और पैरासाइट के बीच क्या संबंध है | परिणाम से हमें जाना कि यूसी डेविस आई सेंटर के अनुसार, स्मार्टफोन से निकलने वाली लगातार नीली रोशनी के संपर्क में आने से रेटिना के  सेल को नुकसान हो सकता है और यहां तक कि मोतियाबिंद और आंखों का कैंसर भी हो सकता है | साथ ही, साइंस डेली के अनुसार, लंबे समय तक स्मार्टफोन पर गेम खेलने से डिप्रेशन हो सकता है |

आगे हमने यह पता लगाने के लिए इंफीगो आई केयर हॉस्पिटल, माहिम के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप देशपांडे से संपर्क किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से आंखों में कीड़े हो सकते हैं या नहीं | ऐसी किसी भी संभावना से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, “स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से कई मनोवैज्ञानिक और शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन यह आंखों के कीड़े होने का कारण नहीं हो सकता है | सोशल मीडिया पर किये गये दावे गलत है |”

यह उल्लेखनीय है कि जहां वास्तविक वीडियो में डॉ. मुलमूत्तिल का उचित वॉयसओवर और मग शॉट है, वहीं वायरल वीडियो में कोई ऑडियो नहीं है |

पैरासाइट क्या है?

एक परजीवी या पैरासाइट एक ऐसा जीव है जो एक परपोषी जीव पर या उसमें रहता है और अपना भोजन अपने मेजबान की कीमत पर या उससे प्राप्त करता है। एक व्यक्ति के मल में पाए जाने वाले परजीवी दूसरे व्यक्ति द्वारा निगल लिए जाते हैं, इसे फेकल-ओरल ट्रांसमिशन कहा जाता है |

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट के साथ किये जा रहे दावे को गलत पाया है | वायरल वीडियो में जिस मरीज की आंख का ऑपरेशन किया जा रहा है, वह लोआ लोआ कीड़े से पीड़ित था। यह कीड़ा इंसानों में कुछ खास तरह की मक्खियों से फैलता है न कि स्मार्टफोन से |

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. ज्योतिरादित्य सिंधिया के दो वर्ष पुराने वीडियो को वर्तमान में हुये केंद्रीय मंत्रालय फेरबदल से जोड़ वायरल किया जा रहा है।

२. २०१९ की बांग्लादेश में के ईद-ए- मिलाद- उन नबी के जलूस की तस्वीर को उत्तर प्रदेश में ओवैसी के रैली के नाम से फैलाया जा रहा है|

३. सुप्रीम कोर्ट के वकील ऍड. भानू प्रताप सिंह के भाषण के वीडियो को हिमालया कंपनी के मालिक का बता वायरल किया जा रहा है।

Avatar

Title:स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग के कारण आंखों में कीड़े नहीं पड़ते है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •