बिहार के कटिहार में मुर्हरम जुलूस के दौरान घटी मारपीट की घटना को हिन्दू-मुस्लिम कोण दे सांप्रदायिकता से जोड़ साझा किया जा रहा है |

Communal False
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सोशल मीडिया पर भीड़ के बीच में फंसी एक स्कॉर्पिओ गाड़ी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल होता दिख रहा है | इस वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाते हुए दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो बिहार के कटिहार से है जहाँ मुहर्रम के एक जुलुस में शामिल लोगों ने इस स्कार्पियो गाड़ी पर हमला कर दिया, ये तब हुआ जब इस गाड़ी के लोग एक बीमार का इलाज करवा कर लौट रहे, सोशल मंचों पर ये दावा किया जा रहा है कि गाड़ी में बैठे लोग हिन्दू समुदाय के थे व गाड़ी को मुहर्रम के उपलक्ष में निकले जलूस के बीच से निकालने के चलते इस गाड़ी व उमसे बैठे हिन्दुओं पर लाठी डंडों से जान लेवा हमला किया गया | इस वीडियों में हम स्कॉर्पिओ गाड़ी को सैकड़ों लोगों द्वारा घेर कर व गाड़ी के अन्दर बैठे कथित हिन्दू परिवार के लोगों पर लाठी डंडों हमला करते हुए देख सकते है, कहा जा रहा है कि इस स्कॉर्पिओ में बैठे कथित हिन्दू परिवार के लोगों के साथ एक बीमार व्यक्ति भी था, इस हमें में परिवार के सदस्यों को काफी चोट आई है व साथ ही गाड़ी काफी क्षतिग्रस्त हुई है|

पोस्ट में लिखा गया है कि “कटिहार — 

#मोहर्रम में दिखा मुसलमानों का तांडव #हिंदू अब* कहीं भी सुरक्षित नहीं* पूर्णिया से इलाज करवा लौट रहे हिंदू परिवार पर हुआ हमला। बीमार के साथ परिजन स्कॉर्पियो से लौट रहे थे, इसी दौरान मोहरम जुलूस में शामिल लोगों के द्वारा स्कॉर्पियो पर किया गया हमला। स्कॉर्पियो छतिग्रस्त। कई लोग जख्मी। घटना कोढ़ा थाना क्षेत्र के मूसापुर के निकट की है |”

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक

अनुसंधान से पता चलता है कि..

फैक्ट क्रेसेंडो ने शोध कर जाँच में पाया की कटिहार में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुई इस घटना का साम्प्रदायिकता से कोई सम्बन्ध नहीं है, गाड़ी में मौजूद लोग व मुहर्रम में मौजूद लोग एक ही समुदाय से हैं, इस घटना को हिन्दू-मुस्लिम कोण दे सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की मंशा से गलत विवरण के साथ साझा किया जा रहा |

जाँच की शुरुवात हमने इस वीडियो को इनविड वी वेरीफाई टूल की मदद से छोटे-छोटे कीफ्रेम्स में तोड़कर व गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने से की, जिसके परिणाम में हमें इस वीडियो में दिख रहे दृश्यों की तस्वीर भास्कर द्वारा प्रकाशित एक खबर में उपलब्ध मिली | २१ अगस्त २०२१ को प्रकाशित खबर के अनुसार यह घटना बिहार के कटिहार के कोढ़ा क्षेत्र से है | खबर के अनुसार मूसापुर के पास NH-31 पर मोहर्रम के जुलूस में शामिल लोगों ने स्कॉर्पियो सवार मुस्लिम परिवार पर लाठी-डंडे से हमला कर दिया। इस भीड़ ने गाड़ी में बैठे लोगों से नकद व उनके मोबाइल फोन भी लूट लिये | रिपोर्ट में दी जानकारी के अनुसार गाड़ी में बैठे परिवार मुस्लमान समुदाय से थे और उनके साथ पूर्णिया से इलाज़ करवाकर घर लौट रही एक बीमार महिला भी थी | इस घटना के चलते इस मुस्लमान परिवार के ४ सदस्य घायल हो गए, जिसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोढ़ा में भर्ती कराया गया। खबर के अनुसार कोरोनावायरस महामारी के चलते सामाजिक दूरी को कायम रखने के लिए मुहर्रम के जुलुस निकलने की अनुमति वहां के पुलिस द्वारा नहीं दी गई थी |

तत्पश्चात फैक्ट क्रेसेंडो ने कटिहार के SDPO अमर कांत झा से इस प्रकरण के सम्बन्ध में संपर्क किया जिन्होंने हमें इस घटना के बारे में स्पष्ट करते हुए बताया कि “सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर चले रहे दावे सरासर गलत है | यह घटना अभी हाल ही की  मुसापुर में मुहर्रम के दिन से है जब लोगों द्वारा मुहर्रम के जुलुस निकालाया और इस जुलुस के बीचोबीच एक मुस्लमान परिवार अपनी स्कॉर्पिओ अंदर ले गए थे  जिसके चलते जलूस में शामिल लोग गुस्से में आ गए और गाड़ी पर लाठीयों से हमला कर दिया| सोशल मीडिया पर किये गए दावे फ़र्ज़ी है क्योंकि गाड़ी में बैठे लोग मुस्लिम समुदाय से ही थे | वे डुमर के निवासी थे जिनका नाम  मोहम्मद मसूद आलम है | उनके साथ  गाड़ी में उनकी माँ भी मौजूद थी जो कि  बीमार थी व पूर्णिया के इलाज करवाकर गाड़ी से लौट रही थी

साथ ही उन्होंने हमें बताया कि जुलूस कोविड प्रोटोकॉल को नज़रअंदाज़ कर बिना किसी अनुमति के निकाला गया था और इस मामले के चलते तीन अलग अलग मुक़दमे कोढ़ा पुलिस द्वारा दायर किये गये हैं | पहली शिकायत पीड़ित परिवार द्वारा दर्ज कराई गई है, दूसरी शिकायत भीड़ पर  वहां मारपीट के आरोप में की गई है और तीसरी शिकायत बिना किसी अनुमति के महामारी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुये जुलूस निकालने और भीड़ को इकट्ठा करने के आरोप में की गई है | इन मामलों के चलते कुल २७ से ३० लोगों की गिरफ़्तारी की गई है | यह बात सही है की जुलूस में मौजूद लोगों द्वारा गाड़ी में बैठे परिवार पर हमला किया गया परन्तु इस घटना के साथ साम्प्रदायिकता का कोई संबंध नहीं है |”

फैक्ट क्रेसेंडो ने कटिहार के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार जी  से संपर्क कर उनसे सोशल मंचों पर  साझा किये जा रहे दावों पर उनकी टिप्पणी ली, उन्होंने भी वायरल हो रहे दावों का खंडन करते हुए हमें बताया कि इस घटना के साथ सांप्रदायिकता के साथ कोई संबंध नहीं  है | गाड़ी में बैठे परिवार और गाड़ी के चालक सब मुस्लिम समुदाय से थे ना कि किसी हिन्दू परिवार से, इस घटना के चलते लगभग २४ लोगों की गिरफ़्तारी कोढ़ा पुलिस द्वारा की गई है | 

इस घटना को बिहार तक ने भी रिपोर्ट किया है जिन्होंने इस घटना के संबंध में मसूद आलम से भी संपर्क किया | नीचे दिए गए वीडियो में आप पीड़ित मसूद आलम को इस घटना का विवरण रिपोर्टर द्वारा देते हुए सुन सकते है | वे कहते है कि वह पूर्णया से कटिहार के मजदिहा गावं लौट रहे थे और रास्ते में मुहर्रम के जुलुस के कारण जाम लगा हुआ था | इसी बीच उनकी गाड़ी से किसी को हलकी सी टक्कर लगी और उसी वक़्त भीड़ ने गुस्से में आकर उनपर हमला कर दिया |

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त वीडियो के माध्यम से किये गये दावे को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो का साम्प्रदायिकता से कोई संबंध नहीं है | कटिहार में निकाले गए मुहर्रम के जुलुस में मौजूद लोगों ने एक मुस्लिम परिवार की गाड़ी पर हमला किया था जिसे हिन्दू परिवार पर किये गए हिंसा के नाम से भ्रामक दावों के साथ सोशल मंचों पर फैलाया जा रहा है |

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. वर्ष 2015 में सीरिया में एक महिला को अल-कायदा द्वारा गोली मारने के वीडियो को वर्तमान अफगानिस्तान से बता वायरल किया जा रहा है।

२. ब्राज़िल के पेरोला शहर के एक वीडियो को श्रीनगर (जम्मू कश्मीर) का बता गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

३. ब्रिटेन में हुये २०१४ के एक नुक्कड़ नाटक वीडियो को अफगानिस्तान में मुस्लिम महिलाओं की सरेआम नीलामी का बता फैलाया जा रहा है|

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Title:बिहार के कटिहार में मुर्हरम जुलूस के दौरान घटी मारपीट की घटना को हिन्दू-मुस्लिम कोण दे सांप्रदायिकता से जोड़ साझा किया जा रहा है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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