भागलपुर में हुये मोक ड्रिल के वीडियो को कोरोनावायरस से संक्रमित पुलिस अधिकारी के नाम से फैलाया जा रहा है |

Coronavirus False
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सोशल मंचो पर एक वीडियो जहाँ हम एक व्यक्ति को फर्श पर पड़े खांसते और छींकते हुये देख सकतें हैं, इस व्यक्ति के इर्द-गिर्द पुलिस अधिकारियों को देखा जा सकता है, इस वीडियो को इस दावे के साथ ऑनलाइन साझा किया जा रहा है कि बिहार के भागलपुर सेंट्रल जेल में एक पुलिस अधिकारी कोरोनावायरस के संक्रमित हो चूके हैं |

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि “भागलपुर सेंट्रल जेल के बरा बाबु को कोरोना हुआ |”

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

अनुसंधान से पता चलता है कि..

जाँच की शुरुवात हमने बिहार के भागलपुर सेंट्रल जेल के सुपरिन्टेन्डेन्ट रूपक कुमार से संपर्क करने से की, उन्होंने हमें बताया कि “सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो असल में भागलपुर जेल में हुये एक मोक ड्रिल का है | यह मोक ड्रिल १० या ११ तारिख को जेल में बिहार पुलिस द्वारा आयोजित किया गया था | इस मोक ड्रिल का उद्देश्य कोरोनावायरस के संक्रमित पेशेंट कि चिकित्सा और देखभाल कैसे करना है, ये दर्शाना था | जेल में कोई भी कैदी या पुलिसकर्मी कोरोनावायरस से संक्रमित नही है |”

इस वीडियो को ११ अप्रैल २०२० को नेशन भारत नामक एक यूट्यूब चैनल से प्रसारित किया था | इस खबर के अनुसार यह वीडियो बिहार के भागलपुर सेंट्रल जेल में हुए मोक ड्रिल का है | इस वीडियो के शीर्षक में लिखा गया है कि “Bihar के Bhagalpur Central Jail में हुआ कोरोना का मॉक ड्रिल, ऐसे ही तड़पता है कोरोना का मरीज |”

निष्कर्ष: तथ्यों के जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के माध्यम से किये गये दावे गलत है | यह वीडियो बिहार के भागलपुर सेंट्रल जेल में कोरोनावायरस से संक्रमित पुलिसकर्मी को नही दर्शाता है बल्कि यह एक मोक ड्रिल का वीडियो है |

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Title:भागलपुर में हुये मोक ड्रिल के वीडियो को कोरोनावायरस से संक्रमित पुलिस अधिकारी के नाम से फैलाया जा रहा है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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