क्या जवाहरलाल नेहरु – मोहम्मद अली जिन्ना और शेख ओमार अब्दुल्लाह के सौतेले भाई थे ?

False International Political
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२० अगस्त २०१९ को फेसबुक पर ‘Sunil Dubey’ नामक एक यूजर द्वारा एक पोस्ट किया गया था, जिसमे जवाहरलाल नेहरु के परिवार से जुड़ी कई बातें, जो की कथित तौर पर एम.ओ.मथाई के द्वारा लिखी गयी किताब से ली लीं गयीं गयी है, को सच्चाई कहकर साझा किया जा रहा है |

इस पोस्ट के अनुसार यह दावा किया जा रहा है किजवाहरलाल नेहरु-मोहम्मद अली जिन्ना और शेख ओमार अब्दुल्लाह के सौतेले भाई थे |’ क्या सच में ऐसा है ? आइये जानते है इस पोस्ट के दावे की सच्चाई |

सोशल मीडिया पर प्रचलित कथन:

FacebookPost | ArchivedLink

संशोधन से पता चलता है कि…

हमने पाया कि उपरोक्त पोस्ट में किया गया दावा २०१३ से अलग-अलग भाषाओं में इन्टरनेट पर वायरल हो रहा है | दावे अनुसार यह बातें एम.ओ.मथाई के द्वारा १९७८-१९७९ के दौरान लिखी किताबों में मौजूद है | 

हमारी फैक्ट क्रिसेंडो मराठी टीम द्वारा २२ अगस्त २०१९ को इस दावे पर फैक्ट-चेक की गयीकिया गया था है, जहां हमने यह ऐसे ही कुछ दावों को दावा गलत पाया था  | आइये देखते हैं फैक्ट क्रिसेंडो टीम द्वारा पाए गए उपरोक्त दावे की सच्चाई | 

जवाहरलाल नेहरु 

एम.ओ.मथाई द्वारा लिखी गई किताबें :

मूल पुस्तक यहाँ पढ़ें – Reminiscences of the Nehru Age (1978) | My Days with Nehru (1979)

दोनों पुस्तकों से पता चला है कि मथाई ने कभी भी मोतीलाल नेहरू की पांच पत्नियों या नेहरू, जिन्ना और अब्दुल्ला शेख के सौतेले भाई होने का दावा नहीं किया है |

दोनों किताबों में न तो तुषु रहमान बाई और न ही मुबारक अली का उल्लेख है | यहां तक ​​कि मथाई ने मोतीलाल नेहरू के बारे में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लिखा | विशेष रूप से, फिरोज गांधी और शेख अब्दुल्ला के बारे में अलग-अलग मामले लिखे गए हैं | 

फ़िरोज़ गांधी स्पष्ट रूप से एक पारसी थे | नेहरू का परिवार इंदिरा-फिरोज की शादी का विरोध कर रहा था, लेकिन उन्होंने लिखा कि नेहरू को अपनी बेटी की जिद के आगे हार माननी पडी थी | अधिक जानकारी के लिए शशि भूषण की पुस्तक फिरोज गांधी पढ़ें |नेहरू के साथ मेरे दिनपृष्ठ संख्या२३४ पर मथाई लिखते हैं कि राष्ट्रीय सम्मेलन की स्थापना के बाद शेख अब्दुल्ला पहली बार नेहरू के संपर्क में आए थे | अब्दुल्ला जिन्ना पर विश्वास नहीं करते थे | वह नेहरू की धर्मनिरपेक्ष नीतियों पर मोहित थे | मगर कहीं भी उन्होंने नेहरु का जिन्ना या अब्दुल्ला के साथ कोई पारिवारिक संबंध के बारे में नहीं लिखा है |

इसका मतलब है कि मथाई ने मोतीलाल और नेहरू परिवारों के बारे में कोई भी आपत्तिजनक दावे नहीं किए थे |

मोतिलाल नेहरू 

इसके अलावा पोस्ट में कहा गया कि मोतीलाल की प्रथम पत्नी स्वरुप कुमारी बक्शी व द्वितीय पत्नी थुस्सू रहमान बाई थी (जिनसे जवाहरलाल नेहरु और शैयद हुसैन पैदा हुए थे |)

लेकिन, मोतीलाल नेहरू के बारे में उपलब्ध विभिन्न पुस्तकों का अध्ययन करने से पता चलता है कि सच्चाई अलग है | 

बी आर नंदा द्वारा लिखित : The Nehrus: Motilal and Jawaharlal (1963), मोतीलाल नेहरू के पिता का नाम गंगाधर था | वह एक कश्मीरी ब्राह्मण थे | वह अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय के दरबार में दिल्ली के कोतवाल थे | हालांकि, १८५७ के विद्रोह के बाद, गंगाधर की नौकरी चली गई और वह आगरा में बस गए | १८६१ में उनका निधन हो गया | मोतीलाल का जन्म उनके पिता की मृत्यु के तीन महीने बाद ६ मई, १८६१ को हुआ था |

मोतीलाल की पहली शादी काफ़ी कम उम्र में हुई थी | हालाँकि, बच्चे के जन्म के बाद, बच्चा और उनकी पहली पत्नी दोनों की मृत्यु हो गई | मोतीलाल ने बाद में स्वरूप रानी थुस्सू से शादी की | स्वरुप रानी भी एक कश्मीरी ब्राह्मण थी | मोतीलाल और स्वरुपरानी का १४ नवंबर १८८९ को एक बेटा हुआ और वह जवाहरलाल नेहरू थे | बाद में उनकी दो बेटियां हुई, विजयलक्ष्मी (१९००) और कृष्णा (१९०७) | इसका मतलब है कि मोतीलाल की दूसरी पत्नी से तीन संतानें थीं | इस खोज से पता चलता है कि, मोतीलाल जवाहरलाल के सौतेले पिता नहीं थे | 

आगे के संदर्भ के लिए आप उपेंद्रचंद्र भट्टाचार्या व शोवेंदूसुंदर चक्रवर्ती संपादित  Pandit Motilal Nehru: His Life and Work (1931) और विजयालक्ष्मी पंडित द्वारा लिखित The Scope of Happiness : A Personal Memoir (1979) किताब पढ़ सकते हैं | मगर यह बात कहीं भी उल्लेखित नहीं है कि नेहरू की पाँच पत्नियाँ थीं |

जिन्ना और अब्दुल्लाह के साथ नेहरु के संबंध

पोस्ट ने दावा किया कि मोतीलाल नेहरू की दो और संतानें थीं- मोहम्मद अली जीना उनकी चौथी पत्नी से और शेख अब्दुल्ला उनकी पांचवी पत्नी से | मोहम्मद अली जीना १८७५ या १८७६ में पैदा हुए थे और मोतीलाल नेहरू १८६१ में पैदा हुए थे | अर्थात्, मोतीलाल जीना के जन्म के समय १४-१५ वर्ष के थे | अकबर अहमद लिखित Jinnah, Pakistan and Islamic Identity: The Search for Saladin पुस्तक के अनुसार जिन्ना के पिता का नाम जिन्नाभाई पुंजा था और वह गुजरात से कराची चले गए थे | जिन्ना के पूर्वज हिंदू थे और गुजरात में लोहाना समुदाय से थे | हालांकि, जाति से बहिष्कृत होने के कारण जिन्ना के दादा इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे | इसका मतलब है कि मोतीलाल जिन्ना के पिता नहीं हो सकतें है |

सईद तफाझुल्ल हुसैन लिखित Sheikh Abdullah-A Biography: The Crucial Period 1905-1939 के अनुसार, शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का जन्म ५ दिसम्बर १९०५ के दिन कश्मीर के सौरा नामक एक गांव में हुआ था | उनके पिता का नाम शेख मोहम्मद इब्राहिम था और वह एक कश्मीरी शॉल निर्माता और विक्रेता थे | न्यूयॉर्क टाइम्स  ने उनकी मृत्यु की ख़बर प्रसारित की थी |

इन अनुसंधान से हमें यह साफ़ पता चलता है कि मोहम्मद अली जीना और शेख अब्दुल्ला – जवाहरलाल नेहरु के सौतेले भाई नहीं है | मोतीलाल की शादी पांच नहीं, बल्कि सिर्फ़ दो शादी हुई थी | फिरोज गांधी का असली नाम जहांगीर संजय खान नहीं है | आप नीचे दिए गए फॅमिली ट्री को देखकर नेहरू परिवार का एक संक्षिप्त सारांश प्राप्त कर सकते हैं | शशी थरूर लिखित Nehru: The Invention of India (2003) किताब में यह फॅमिली ट्री दिया गया है | अधिक जानकारी के लिए आप भारत सरकार के नेहरू पोर्टल पर जा सकते हैं |

जांच का परिणाम : इस खोज से हम इस निष्कर्ष पर आते हैं कि उपरोक्त पोस्ट मे किया गया दावा ‘जवाहरलाल नेहरु-मोहम्मद अली जिन्ना और शेख ओमर अब्दुल्ला के सौतेले भाई थे |’ ग़लत है |

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Title:क्या जवाहरलाल नेहरु – मोहम्मद अली जिन्ना और शेख ओमार अब्दुल्लाह के सौतेले भाई थे ?

Fact Check By: Natasha Vivian 

Result: False


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