तमिलनाडु में महा पुष्करम के लिये छोड़े गये कावेरी नदी के पानी के वीडियो गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

False Social

इंटरनेट पर एक वीडियो काफी तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पानी बहता हुआ दिख रहा है जो कि धीरे-धीरे एक नदी का रूप लेता जा रहा है व आगे की तरफ बह रहा है , इसके साथ दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिख रही नदी चमत्कारिक है जो कि पितृ पक्ष की अमावस्या को प्रकट होती है और दिवाली के दिन (अमावस्या) को अदृश्य हो जाती है। 

वायरल हो रहे इस पोस्ट के कैपशन में लिखा है, 

“दक्षिण भारत की यह नदी पितृ पक्ष की अमावस्या को प्रकट होती है और दीपावली के दिन अमावस्या को विलीन हो जाती है। सिर्फ एक महीना। है ना प्रकृति का अदभुत चमत्कार?”

(शब्दशः)

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान इस दावे को गलत पाया है। वीडियो में दिख रहा पानी कावेरी नदी का है जो तमिलनाडु के मयिलादुथुराई में महा पुष्करम के लिये कर्नाटका सरकार द्वारा छोड़ा गया था। इसका पितृ पक्ष व दिवाली से कोई संबन्ध नहीं है। यह वीडियो पुराना है।

जाँच की शुरुवात हमने यूट्यूब पर कीवर्ड सर्च से की। नतीजतन हमें यह वीडियो यूट्यूब पर एक यूज़र द्वारा अपलोड किया हुआ मिला। इस वीडियो को अभिजीत नामक एक चैनल ने 20 सितंबर 2017 को प्रसारित किया था। इसके शीर्षक में लिखा है, “कावेरी नदी की बाढ़ तमिलनाडु के मायावरम जिले में पहुंची।“ इसके साथ दी गयी जानकारी में लिखा है, “कावेरी का पानी तमिलनाडु के मायावरम जिले में पहुंच गया। वर्ष में पहली बार नदी में प्रवाहित होने पर श्रद्धालु ग्रामीण नदी को नमस्कार करते हैं। सूखी बंजर जमीन पर नदी का ऐसा उद्गम कभी नहीं देखा।“

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आगे बढ़ते हुये फैक्ट क्रेसेंडो ने यूट्यूब चैनल के संचालक अभिजीत परुई से संपर्क किया व इस वीडियो के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की। उन्होंने हमें बताया कि, “यह वीडियो तमिलनाडु के मायावरम (मयिलादुथुराई) जिले का है। वहाँ पर सरकार द्वारा बांध के पानी को सुखी ज़मीन पर छोड़ा गया था। यह वीडियो वही दर्शा रहा है।“

उन्होंने हमें यह भी बताया कि उन्होंने यह वीडियो इंटरनेट से लिया था।

इसको ध्यान में रखते हुये हमने गूगल पर कीवर्ड सर्च किया हमें द हिंदू द्वारा 19 सितंबर 2017 को प्रकाशित एक लेख मिला। उस लेख के मुताबिक तमिलनाडु में स्थित मयिलादुथुराई में मनाये गये महा पुष्करम में आने वाले भक्तों के लिये मेट्टूर बांध से कावेरी नदी का पानी छोड़ा गया था। यह पानी एक सूखी ज़मीन पर छोड़ा गया था व लोग उसका स्वागत करते हुये पूजा कर रहे थे।

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इसके बाद हमने ये जानने की कोशिश की कि महा पुष्करम क्या होता है?

पुष्करम एक त्योहार है जिसमें नदियों की पूजा की जाती है। यह भारत की 12 प्रमुख नदियों के समीप स्थित मंदिरों में पूर्वजों की पूजा, आध्यात्मिक प्रवचन, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रूप में मनाया जाता है। 

वर्ष 2017 में 144 वर्षों के बाद एक विशेष ज्योतिष संजोग हुआ था, इसलिये मयिलादुथुराई में महा पुष्करम मनाया गया था और वहाँ स्थित पुजारियों ने सरकार से कावेरी नदी का पानी छोड़ने की मांग की थी। 

इस बारे में आप द हिंदू के लेख को पढ़ सकते है।

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया कि वायरल हो रहे वीडियो के साथ किया गया दावा गलत है। वीडियो में दिख रहा पानी यह कावेरी नदी का है जो तमिलनाडु के मयिलादुथुराई में महा पुष्करम के लिये कर्नाटका सरकार द्वारा छोड़ा गया था। इसका पितृ पक्ष व दिवाली से कोई संबन्ध नहीं है। यह वीडियो पुराना है।

तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़े से संबंधित अन्य फैक्ट चेक को आप नीचे पढ़ सकते है|

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Title:तमिलनाडु में महा पुष्करम के लिये छोड़े गये कावेरी नदी के पानी के वीडियो गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False

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