एक शख्स द्वारा लोगों के हाथ में बंधे कलावे को काटने के वीडियो को समाजवादी पार्टी व सांप्रदायिकता से जोड़ गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

Communal False Political
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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के चलते सोशल मंचों पर राजनीतिक दलों को लेकर कई गलत व भ्रामक दावे वायरल होते चले आ रहे है। फैक्ट क्रेसेंडो ने ऐसे कई दावों की जाँच कर उनकी प्रमाणिता अपने पाठकों तक पहुंचाई है। इन दिनों इसी से सम्बंधित एक वीडियो इंटरनेट पर काफी तेज़ी से साझा किया जा रहा है, उस वीडियो में आप कुछ लोगों को खड़े हुये देख सकते है व उनमें से एक शख्स वहाँ खड़े लोगों के हाथों में बंधे धार्मिक धागों को कैंची से काट रहा है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि जो शख्स धागे को काट रहा है वह समाजवादी पार्टी के नेता शिवशंकर सिंह यादव है और वह वीडियो में दिख रहे लोगों के हाथों में बंधे कलावे को काटकर उन्हें कभी मंदिर न जाने की कसम दिला रहे हैं।

वायरल हो रहे पोस्ट के शीर्षक में लिखा है, 

समाजवादी पार्टी के शिव शंकर यादव ने हिन्दुओं का कलावा काटा और कभी मंदिर ना जाने की कस्म भी दिलाई। ऐसे ही अधर्मी गद्दार लोगों की वजह से मुसलमान कौम सर उठाती है। पता नही इन हरामियों को धर्म से क्या चिढ़ है ,सत्ता सुख के लिए कुछ भी करोगे तो जनता माफ कर देगी? गहराई से सोचिए , विचार करिये ये आपके संस्कृत व सभ्यता पर चोट है।“

फेसबुक | आर्काइव लिंक

आर्काइव लिंक

अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान पाया कि वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा शख्स समाजवादी पार्टी का नेता शिवशंकर सिंह यादव नहीं है और उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई सम्बंध नहीं है, इस वीडियो के साथ किया गया दावा गलत व भ्रामक है और इसे सांप्रदायिकता से जोड़ा जा रहा है।

जाँच की शुरुवात हमने वायरल हो रहे वीडियो में दी गयी जानकारी को ध्यान में रखते हुये गूगल पर कीवर्ड सर्च किया तो हमें यही वीडियो अचल सिद्धार्थ यादव “बहुजन चिंतक” नामक एक फेसबुक पेज पर 30 नवंबर 2020 को प्रकाशित किया हुआ मिला। वीडियो के शीर्षक में लिखा है, “अब यादव भी पाखण्ड मुक्त होगा। सामाजिक क्रान्ति के पुरोधा श्रद्धेय शूद्र शिवशंकर सिंह यादव जी ने अंधविश्वास और पाखण्ड में जकड़े हुए यादव बंधुओं के लोगों को जाग्रत कर पाखण्ड और अंधविश्वास का प्रतीक कलावा काटकर उन्हें अपनी शक्ति व ज्ञान से परिचित कराया। गांव बढ़हरा, नंदगंज, जिला गाजीपुर में यादव बन्धुओं के हाथ पर बंधे मानसिक गुलामी रूपी कलवा धागे को काटते हुए शूद्र शिवशंकर सिंह यादव जी”

आर्काइव लिंक

इसके बाद उपरोक्त पोस्ट के शीर्षक में दी गयी जानकारी को ध्यान में रखकर हमने गूगल पर सम्बंधित कीवर्ड सर्च किया व शुद्र शिवशंकर सिंह यादव से संपर्क किया व इस वीडियो में दिख रहे प्रसंग के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने की कोशिश की, हमने उनसे वायरल हो रहे दावे के संदर्भ में भी बात की, उन्होंने हमें बताया कि, 

वायरल हो रहा दावा सरासर गलत व भ्रामक है। मेरा असल नाम शिवशंकर रामकमल सिंह है, मैं मुंबई से सटे विरार में स्थित नायगांव में रहता हूँ। ये प्रसंग तब का है जब मैं गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) के नंदगंज के बढ़हरा गांव में अपने चचेरे भाई की बेटी के शादी में गया था , जब मैं वहाँ गया तब मैंने देखा कि लोगों ने हाथों में कलावे पहने हुये थे व मैंने उनसे उसे पहने के पीछे का कारण पुछा व किसी को भी नहीं पता था कि उस धागे को पहनने का महत्व क्या है, वहाँ शादी का माहौल था हंसी मज़ाक चल रहा था और उनके मन में इस धागे के पीछे के अंधविश्वास को मिटाने के लिये मैंने उनके हाथ से वे कलावे काट दिये। मेरे ऐसे करने के पीछे कोई धार्मिक उद्देश्य नहीं था। दरअसल मैं कुछ सालों से गर्व से कहो हम शूद्र हैं मुहिम चला रहा हूँ व उसके तहत हर जगह मेरा नाम शूद्र शिवशंकर सिंह यादव रखा गया है। इस मुहिम के तहत मैं समाज की बुराइयाँ, अंधविश्वास आदि के खिलाफ काम कर रहा हूँ।

हमें उन्होंने यह भी बताया कि, “मैंने वायरल हो रहे मेरे वीडियो और उसके साथ वायरल हो रहे गलत दावे के खिलाफ वसई के वालिव पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है और इसकी एक कॉपी गाजीपुर के नंदगंज थाने में भी भेजी है।

इसके बाद उन्होंने हमें उनके द्वारा दर्ज की गयी शिकायत की कॉपी भी उपलब्ध करवायी।

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तदनंतर फैक्ट क्रेसेंडो ने वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहे प्रसंग के दौरान मौजूद लोगों में से गोलु यादव नामक एक शख्स से संपर्क किया व उसने हमें यह बताया कि, “मेरी बहन की शादी के शिवशंकर सिंह यादव जो मुंबई में रहते है वे बढ़हरा गांव आये थे व शादी के प्रसंग के दौरान वहाँ मौजूद पुरोहितों को हमारे हाथों में कलावे बांधना था, और इसके चलते हमारे हाथों में बंधे कलावों को शिवशंकर जी काट रहे थे और पारिवारिक हँसी मज़ाक चल रहा था व इसी दौरान यह वीडियो लिया गया। उन्होंने हमें धर्म के खिलाफ कुछ करने के लिये नहीं बोला व मंदिर जाने से भी नहीं रोका है।

आखिर में फैक्ट क्रेसेंडो ने उपरोक्त पूरे सबूतों की पुष्टि करने हेतु उत्तर प्रदेश में स्थित गाजीपुर के नंदगंज पुलिस थाने के एस.ओ सत्येंद्र कुमार राय से संपर्क किया तो उन्होंने हमें बताया कि, “वायरल हो रहा दावा गलत है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद हमारे पास खबर आयी थी बढ़हरा गांव में कुछ लोगों ने अपने हाथों से कलावे काट दिये है व हिंदु धर्म छोड़ दिया है तो हम इसी के बारे में जानकारी हासिल करने के लिये गांव में गये थे व हमने वहाँ के लोगों से पूछताछ की, तो हमें वहाँ ऐसी किसी भी घटना के होने की जानकारी नहीं मिली।

इसके बाद हमने ये जानने की कोशिश की कि समाजवादी पार्टी में किसी नेता का नाम शिवशंकर सिंह यादव है क्या।

गूगल पर कीवर्ड सर्च कर हमने पाया कि समाजवादी पार्टी में एक नेता का नाम शिवशंकर सिंह यादव है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के माझवा में स्थित है।

आप नीचे दिख रही तस्वीरों के तुलनात्मक विश्लेषण में समाजवादी पार्टी के नेता शिवशंकर सिंह यादव और शुद्र शिवशंकर सिंह यादव में अंतर देख सकते है।

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया कि वायरल हो रहे वीडियो के साथ किया गया दावा गलत है। इस वीडियो में दिख रहे शख्स समाजवादी पार्टी का नेता शिवशंकर सिंह यादव नहीं है और उसका किसी भी राजनीतिक दल से सम्बंध नहीं है। इस वीडियो के साथ किया गया दावा गलत व भ्रामक है और इसे सांप्रदायिकता से जोड़ भ्रामक दावों के साथ फैलाया जा रहा है।

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. भारतीय महिला हॉकी टीम के टोक्यो ओलंपिक के फाइनल में पहुँचने वाली ख़बर गलत है।

२.  महिलाओं द्वारा फिल्म डायरेक्टर की पीटाई के वीडियो को भा.ज.पा से जोड़ गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

३.  मेक्सिको में मगरमच्छ के महिला पर हमला करने के वीडियो को भारत का बताकर फैलाया जा रहा है |

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Title:एक शख्स द्वारा लोगों के हाथ में बंधे कलावे को काटने के वीडियो को समाजवादी पार्टी व सांप्रदायिकता से जोड़ गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False


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