क्या ईराक में हुई खुदाई में प्रभु श्रीराम, लखन और सीताजी की प्राचीन मूर्तियां मिली है?

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१४ जून २०१९ को “प्रदीप ताम्हनकर” नामक एक फेसबुक यूजर ने एक तस्वीर पोस्ट की | तस्वीर के शीर्षक में लिखा गया है कि “इस्लामिक मुल्क इराक में खुदाई के दौरान प्रभु श्रीराम लखन जानकी जी निकले, अखंड भारत के सभी अंग चीख चीख कर बोल रहे है हिन्दू एक हो हम सब तेरे है |”

इस दावें के साथ एक तस्वीर साझा की गयी है | तस्वीर में हम जमीन की खुदाई से निकली तीन प्राचीन मूर्तियाँ देख सकते है | तस्वीर के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि यह मूर्तियाँ ईराक में खुदाई करते वक्त पायी गयी है | साथ ही कहा जा रहा है कि यह प्रभु श्रीराम, लखन और सीताजी की मूर्तियाँ है | यह फोटो सोशल मीडिया पर काफ़ी तेजी के साझा किया जा रहा है | फैक्ट चेक किये जाने तक यह पोस्ट १००० प्रतिक्रियाएं प्राप्त कर चुकी थी |

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक

क्या वास्तव में ईराक में खुदाई करते वक्त यह मूर्तियाँ प्राप्त हुई? हमने इस पोस्ट की सच्चाई जानने की कोशिश की |

संशोधन से पता चलता है कि..

जांच की शुरुआत हमने इस तस्वीर का स्क्रीनशॉट लेकर गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने से की | परिणाम से हमें ५ जनवरी २०१९ को द एनालिस्ट नामक एक वेबसाइट द्वारा प्रकाशित खबर मिली | हमें इस वेबसाइट पर फेसबुक में वायरल तस्वीर भी मिली | लेख में कहा गया है कि, ४ जनवरी २०१९ को राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों को भंडरा पंचायत के तहत झारखंड में खांडिरा जिले के जिलिंगा गाँव में पाया गया था | साथ ही गांववालों को एक बड़ा और एक छोटे आकार का शंख, एक धूपदानी, एक किसी धातु का बना बैल, दो छोटे गोलाकार पत्थर मिले हैं जो शालिग्राम जैसे प्रतीत होते हैं | इस वेबसाइट के लेख के साथ इस घटना की दूसरी तस्वीरें भी साझा की गयी है | इन में से एक तस्वीर में हम कुछ लोगों को इन मूर्तियों को घेरकर खड़े देख सकते है |

द एनालिस्ट | आर्काइव लिंक

उपरोक्त खबर में दी गयी जानकारी को हमने गूगल पर कीवर्ड्स के माध्यम से ढूँढा | परिणाम से हमें लोक अलोक नामक एक वेबसाइट पर ६ महीने पहले प्रकाशित खबर मिली | लेख के अनुसार खूंटी में इंद जत्रा मेला का आयोजन होने वाला था और उसी के मद्देनजर सोमा टूटी घर की लिपाई पुताई हेतु मिट्टी खोद रहे थे कि उनका गइता किसी ठोस चीज से टकराता है | आगे जब खोदते हैं तो श्री राम सीता लक्ष्मण की मूर्ति प्रकट हुई | गाँव के प्रधान झिरगा मुंडा ने बताया कि “ये मूर्तियां पाँच पीढ़ी पहले महेंद्र नाथ ठाकुर जी ने बिठाया होगा |”

लोक अलोक | आर्काइव लिंक

इसके अलावा हमें फेसबुक पर झारखण्ड दर्पण नामक पेज से भी यही तस्वीरें मिली | तस्वीरों के संदर्भ में लिखा गया है कि यह मूर्तियाँ झारखण्ड में मिली थी | आप पोस्ट नीचे देख सकते है |

झारखण्ड दर्पण फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक

इसके पश्चात हमने जिलिंगा गांव को गूगल पर ढूँढा | खूंटी जिले के आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी के अनुसार, यह गाँव झारखंड के खूंटी नगर से ११ किलोमीटर दूर है | विलेज इन्फो के वेबसाइट के अनुसार भंडरा जिलिंगा गाँव की ग्राम पंचायत है | २०११ की जनगणना के अनुसार, गाँव की जनसंख्या ६२२ है | गाँव में अनुसूचित जनजातियों के लोग अधिकांश (७०%) रहते हैं | इस सुदूर गाँव तक पहुँचने के लिए जंगल में लगभग ढाई किलोमीटर पार करना पड़ता है | आप इस गाँव को नीचे दिए गए गूगल मैप में देख सकते हैं |

आर्काइव लिंक | आर्काइव लिंक | आर्काइव लिंक | आर्काइव लिंक

इन मूर्तियों के बारें में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने खूंटी ब्लॉक पुलिस स्टेशन से संपर्क किया | ‘फैक्ट क्रेस्सन्डो’ने पुलिस सब इंस्पेक्टर कुमार शंकर से फ़ोन पर वार्तालाप किया | उन्होंने हमें इन मूर्तियों की झारखण्ड के जिलिंगा गांव में प्राप्त होने की बात की पुष्टि की |

इसके पश्चात हमने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर सुचित्रा मिंज से संपर्क किया | उन्होंने भी हमें इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह मूर्तियाँ वाकई में जिलिंगा गांव में पाया गया था |

हमने भंडरा गावं पंचायत के कर्मचारी दीपक सिंह से संपर्क किया | उन्होंने ‘फैक्ट क्रेसेन्डो’ को बताया कि ग्रामीणों को यह मूर्तियाँ साल की शुरुआत में जिलिंगा गाँव में मिली थीं | इसके अलावा, अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों ने गांव का दौरा किया है और इन मूर्तियों को देखा है | उन्होंने बताया कि उनका फोटो जिलिंगा गांव का था |

इसके बाद हम जिलिंगा के एक ग्रामीण शंख्या मुंडा तक पहूँचे | उन्होंने खुद इन मूर्तियों को देखा है | उन्होंने कहा कि “इन मूर्तियों को एक क्षेत्र में इंद जत्रा की तैयारी करते हुए पाया गया था | जहां यह मूर्तियाँ पाई गई हैं वहां बांस का शेड स्थापित किया गया हैं | विभिन्न गांवों के लोग मूर्तियों को देखने के लिए यहां आए थे |” नीचे दिखाई गयी तस्वीर में लाल सर्कल में हम शंख्या मुंडा को देख सकते है | पीले सर्कल में गाँव के सरपंच झिरगा मुंडा देखे जा सकते है |

निष्कर्ष: तथ्यों की जांच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | यह मूर्तियाँ ईराक में नहीं बल्कि जनवरी २०१९ को झारखण्ड के जिलिंगा गाँव में पाई गई थी |

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Title:क्या ईराक में हुई खुदाई में प्रभु श्रीराम, लखन और सीताजी की प्राचीन मूर्तियां मिली है?

Fact Check By: Drabanti Ghosh 

Result: False


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