क्या मुंबई में कथित कोरोनावायरस के संक्रमित मरीजों के अंगों की तस्करी चल रही है ?

Coronavirus False
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सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि मुंबई स्थित गोराई में एक व्यक्ति को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती किया गया व उसे जबरन कोरोना पॉजिटिव बताया गया | अचानक कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई और अस्पताल द्वारा उसके शरीर को जलाने की जल्दबाजी को देखकर मृतक के परिवार वालों को कुछ शक़ हुआ व उन्होंने इस पर आपत्ति जताई | जिसके बाद उन्हें पता चला कि मृतक के शरीर के कई अंग गायब थे, इस पोस्ट के माध्यम से यह भी कहा गया है कि मुंबई के कई अलग अलग क्षेत्रों में इस तरह से कथित कोरोनावायरस से मृत मरीजों के अंगों को निकलकर अवैध अंगों को बेचने का व्यापार चल रहा है | साथ ही यह भी कहाँ जा रहा है कि यह घोटाला हॉस्पिटल में डॉक्टरों की साजिश के तहत है जो कि मामूली सर्दी खांसी से ग्रसित लोगों को अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव बताकर भरती कर रहें हैं और कुछ दिनों बाद इन लोगों की अकस्मात् मृत्यु हो जाती है और इनके शरीर से अंग निकाल दिये जाते है | पोस्ट के साथ कफन में लिपटी एक लाश की तस्वीरें ​है, साथ में लाश को जलाने की भी कुछ तस्वीरें हैं |

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि

“*कोरोना के नाम पर नया घोटाला* भायंदर के गोराई मे पिछले दिनो कोई केस नही था,एक व्यक्ति को हल्का बुखार,सर्दी खाँसी हुई तो चेक करवाने गया*उसे जबरदस्ती भर्ती करके रिपोर्ट positive बताई गई*फिर अचानक उसकी आज मृत्यु हो जाती है और पूरी बाडी पैक करके जलाने की तैयारी की जाती है मगर परिवार वालो के जिद्द करने पर जब बाडी को खोला जाता है तो शरीर के सारे अंग गायब मिलते है*ये अभी महाराष्ट्र मे “मृत शरीर कैराना घोटाला”सामने आने से हाँस्पीटल मे हडकंप मचा हुआ है,आखिर कितने लोगो के साथ ऐसा खिलवाड़ किया गया है*क्या डाक्टर जिन्हे भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है वो ऐसी राक्षसों जैसी हरकत पर उतर सकते है* ईसकी पूरी CBIजाँच करवाई जाएँ और पता लगाया जाए की ऐसे तरीकों से लोगो का मर्डर करके ईस कोरोना काल मे जो मानव अंग की तस्करी कि जा रही है,ऐसे जघन्य अपराधी राक्षस दरिंदो को कडी सजा मिलनी चाहिए* |”

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

अनुसंधान से पता चलता है कि…

जाँच की शुरुवात हमने इस खबर को कीवर्ड्स के माध्यम से ढूँढकर की, जिसके परिणाम से हमे “दिल्ली क्राइम प्रेस” की वेबसाइट पर यह खबर प्रकाशित मिली | इस खबर में

  1. न तो किसी अस्पताल का नाम है,
  2. न ही किसी मरीज का

इस खबर को लिखने वालें लेखक का नाम ओम शुक्ला बताया गया है | फैक्ट क्रेसेंडो ने ओम शुक्ला से संपर्क किया जिन्होंने हमें बताया कि “यह खबर उन्हें WhatsApp पर फॉरवर्ड की गई थी जिसे उन्होंने अपनी वेबसाइट पर खबर के रूप में प्रकाशित किया है |” इस खबर की सत्यता पर उनके द्वारा कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई | यह खबर मुंबई के किसी अखबार या वेबसाइट में नहीं छपी थी परंतु दिल्ली की एक वेबसाइट ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ में उपलब्ध था जो खुद में काफी संदेहजनक था |

आर्काइव लिंक

तद्पश्चात फैक्ट क्रेसेंडो ने गोराई पुलिस थाने के सीनियर पी.आई संजीव नारकर से संपर्क किया जिन्होंने हमें बताया कि 

“गोराई इलाके में कोई भी अवैध अंगों को बेचने का व्यापार नही चल रहा है | सोशल मीडिया पर कई हफ़्तों से गोराई, भाईदर और मनोरी के नाम पर ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही है जिसमे कतई भी सत्यता नहीं है | सोशल मंचों पर गलत दावे के साथ चल रहे पोस्टों को हमने हमारे साइबर क्राईम विभाग को भेजा है, जो जाँच पड़ताल कर फेक फ़ैलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही कर सकेंगे |”

उपरोक्त संग्लित तस्वीर को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें फेसबुक यूजर “वेर्षा वर्मा” द्वारा  अपलोड की गई तस्वीरें प्राप्त हुईं | १८ जुलाई २०२० को अपलोड की गई तस्वीर के शीर्षक में लिखा गया है कि.. 

आज दिनांक 18 जुलाई 2020 दिन शनिवार को एक दिव्य कोशिश द्वारा एक अज्ञात लावारिस महिला उम्र 43 साल के दाह संस्कार की सेवा हमें प्राप्त हुई यह महिला लावारिस अवस्था में सिविल हॉस्पिटल लाई गई थी जहां इलाज के दौरान इस की डेथ हो गई पोस्टमार्टम के बाद इस की डेड बॉडी को केजीएमयू पोस्टमार्टम हाउस से लाकर भैसा कुंड स्थित इलेक्ट्रिक मशीन में संस्कार कराया गया|”

फैक्ट क्रेसेंडो ने तद्पश्चात वेर्षा वर्मा से संपर्क किया जिन्होंने हमें बताया कि वे लखनऊ की रहने वाली है और उनकी इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर दुरुपयोग कर एक अवैध अंगों के व्यापर की कहानी के साथ जोड़ा गया है | वे लखनऊ में एक सामाजिक कार्यकर्ता है जो एक NGO चलाती है, उनकी संस्था लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करती है | उनके अनुसार “तस्वीरों में जो लाश दिख रही है, वह एक महिला की थी, जिसकी बीमारी के चलते लखनऊ के एक सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी, चूंकि वह महिला बेसहारा थी,  मैंने और मेरी संस्था के सहयोगी सदस्यों ने उसका अंतिम संस्कार किया था | ये स्टोरी छपने के बाद मैंने ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ वेबसाइट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है क्योंकि उन्होंने मेरे अनुमति के बिना इस तस्वीरों का उपयोग कर एक काल्पनिक कहानी के साथ जोड़कर फैलाया है |”

फैक्ट क्रेसेंडो ने तद्पश्चात वेर्षा वर्मा से संपर्क किया जिन्होंने हमें बताया कि “वे लखनऊ की रहनेवाली है और उनके तस्वीरों को सोशल मीडिया पर दूप्योग कर एक अवैद अंगों के व्यापर की कहानी के साथ जोड़ा गया | वे लखनऊ में एक सामाजिक कार्यकर्ता है जो एक NGO चलाती है, जो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करता है | तस्वीरों में जो लाश दिख रही है, वह एक महिला की थी, जिसकी बीमारी के चलते लखनऊ के एक सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी | चूंकि वह महिला बेसहारा थी, मैंने और मेरी संस्था के सहयोगी सदस्यों ने उसका अंतिम संस्कार किया था | ये स्टोरी छपने के बाद मैंने ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ वेबसाइट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है क्योंकि उन्होंने मेरे अनुमति के बिना इस तस्वीरों का उपयोग कर एक काल्पनिक कहानी के साथ जोड़कर फैलाया है |”

वेर्षा वर्मा जी ने हमें FIR की कॉपी शेयर की, जिसके अनुसार यह शिकायत गोमती नगर थाना में दिल्ली क्राइम प्रेस के तथाकथित पत्रकार ओम शुक्ला के खिलाफ दर्ज करायी गई है | 

इसी सन्दर्भ में उनके द्वारा हमें एक वीडियो स्पष्टीकरण भी भेजा गया जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह उनके प्रोफाइल पर अपलोड की गयी तस्वीरों का दुरुपयोग कर गलत दावे के साथ फैलाया गया है | 

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | महाराष्ट्र के गोराई में कोराना के बहाने मानव अंगों की तस्करी की कोई घटना सामने नहीं आई है | सोशल मीडिया पर इस्तेमाल की गईं तस्वीरें एक सामाजिक कार्यकर्ता की वेबसाइट से ली गईं है जिनकी संस्था लखनऊ में लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करती है | 

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Title:क्या मुंबई में कथित कोरोनावायरस के संक्रमित मरीजों के अंगों की तस्करी चल रही है ?

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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