हिमाचल प्रदेश में स्थानीय सड़क विवाद को सांप्रदायिक रूप देकर उत्तराखंड के नाम से वायरल किया जा रहा है|

False Social
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सोशल मीडिया पर एक बहुचर्चित वीडियो जिसमें लोगों के एक समूह को पत्थर बिछाकर एक कच्ची सड़क के संपर्क मार्ग को बाधित करते हुये देखा जा सकता है, साथ ही इस वीडियो को रिकॉर्ड करने वाला यह कहता है कि यह एक सरकारी सड़क है और आगे आरोप लगाता है कि वीडियो में दिख रहे समूह ने अतीत में भी कई बार उन्हें धमकी दी है | साथ ही वे कहता है कि अगर उनको व उनके परिवार को कुछ होता है तो, इन्हीं लोगो जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए | फिर वह स्थानीय प्रशासन से अपने परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एसपी चंबा को विनती करता है | इस वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाते हुए दावा किया जा रहा है कि यह घटना उत्तराखंड के टिहरी से है जहाँ एक समुदाय के लोग पत्थरों के गावं का रास्ता बंद कर रहे है और गावं वालों को तलवारों से मारने की धमकी दे रहे है |

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि 

ये वीडियो देवभूमि उत्तराखण्ड के tehri का है, यहाँ शांतिप्रिय समुदाय गाँव का रास्ता बंद करके गाँव वालों को तलवार से काटने की धमकी दे रहे हैं , मुस्कुराईये आप हिंदुस्तान मे हैं |”

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

अनुसंधान से पता चलता है कि…

यह वीडियो उत्तराखंड से नही है बल्कि हिमाचल प्रदेश के चंबा से है और इस मामले का साम्प्रदायिकता से कोई संबंध नहीं है |

जाँच की शुरुवात हमने इस वीडियो को ध्यान से सुनने से की, जिससे हमें रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति को चंबा एस.पी से सुरक्षा के लिए विनती करते हुए सुन सकते है | गूगल पर चंबा सर्च करने पर हमें पता चला कि दोनों ही राज्यों (हिमांचल व उत्तराखंड) में चंबा नामक जगह है |

तद्पश्चात सबसे पहले हमने इस वीडियो के बारें में जानकारी प्राप्त करने के लिए चंबा (हिमांचल) के एस.पी अरुल कुमार से संपर्क किया जिन्होंने हमने बताया कि 

यह घटना लगभग ८ से १० दिन पुरानी है जिसका किसी भी दो धार्मिक समूह से कोई संबंध नही है | इस घटना के साथ धार्मिक हिंसा का कोई संबंध नहीं है | यह घटना किसी धार्मिक हिंसा के चलते नही हुई है |”

तद्पश्चात हमने चंबा पुलिस असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पुष्पेन्द्र ठाकुर से संपर्क किया उन्होंने हमें बताया कि 

यह सात से आठ दिन पहले हुई घटना है और तब इस मामले को बातचीत कर सुलझा लिया गया था | इसमें शामिल दोनों पक्ष मुस्लिम समुदाय से हैं | असल में उस जगह पर एक नई सड़क का निर्माण किया गया था और वीडियो में पुरानी सड़क दिख रही है, जिसे अवरुद्ध कर दिया गया था | नई सड़क के लिए लोगों ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा दान कर दिया था जिसके चलते दो समुदाय के बीच तर्क वितर्क शुरू हो गया था कि जब एक नवनिर्मित सड़क है तो पुरानी सड़क का उपयोग करने की आवश्यकता क्यों है | दोनों समुदाय के लोग एक ही धर्म से है |”

निष्कर्ष: तथ्यों के जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो उत्तराखंड से नही बल्कि हिमाचल प्रदेश से है और यह घटना का किसी भी दो अलग समुदायों से कोई सम्बन्ध नहीं है, वीडियो में दिख रहे सारे लोग मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं |

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Title:हिमाचल प्रदेश में स्थानीय सड़क विवाद को सांप्रदायिक रूप देकर उत्तराखंड के नाम से वायरल किया जा रहा है|

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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