किसान आंदोलनों से जोड़ एक असंबंधित तस्वीर को ग़लत दावे के साथ फैलाया जा रहा है |

Partly False Political
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कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को आज ५० दिन हो चुके हैं, लंबे समय से चल रहे इन आंदोलनों में सर्द मौसम की मार, शारीरिक विषमताओं व ख़ुदकुशी के कारण कई वृद्ध किसानों की मौत भी हो चुकी है, इन्हीं सब के बीच सोशल मीडिया पर एक मृत वृद्ध सिख की तस्वीर को साझा कर ये बोला जा रहा है कि किसान आंदोलन में ८ जनवरी २०२१ को एक और किसान का निधन हो गया है| 

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि

 “आज एक और किसान आंदोलन में शहीद हो गया | शहीद किसान को सत सत नमन | जीतेगा किसान हारेगा अभिमान |”

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

फैक्ट क्रेसेंडो ने पूर्व में भी इस प्रकार के दावों का शोध कर  ऐसी ही एक तस्वीर का खंडन किया है

अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने पाया है कि वायरल तस्वीर का किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है |

जाँच की शुरुवात हमने गूगल पर इस तस्वीर को रिवर्स इमेज सर्च करने से की, जिसके परिणाम में हमें पंजाब से आम आदमी पार्टी के एक विधायक सरबजीत सिंह मनुके द्वारा प्रकाशित फेसबुक पोस्ट मिला | पोस्ट में वायरल तस्वीर सहित घटनास्थल की कुछ और तस्वीरें भी प्रकाशित की गयी है | सरबजीत की पोस्ट के अनुसार भटिंडा स्थित श्री गुरु नानक देव थर्मल प्लांट के बंद होने पर किसान यूनियन के एक वरिष्ठ जिन्होंने धरना दिया था और उसके चलते उनकी मौत हो गयी | इस तस्वीर को १ जुलाई २०२० को साझा किया गया था | इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि यह तस्वीर वर्तमान में किसान आंदोलन की नहीं है |

आर्काइव लिंक

गूगल पर कीवर्ड सर्च करने पर हमें ‘द इंडियन एक्सप्रेस’  की खबरें भी मिलीं | यहां दी गई जानकारी के अनुसार, जोगिंदर सिंह १ जुलाई २०२० को सुबह सात बजे भटिंडा थर्मल प्लांट पर धरना देने बैठे थे | तीन घंटे बाद वे उसी जगह पर मृत पाए गए | पोस्ट के अनुसार जोगिंदर के पास से किसान यूनियन का एक झंडा और एक पोस्टर मिला था | पोस्टर पर लिखा गया है कि जोगिंदर थर्मल प्लांट की जमीन को बेचे जाने के फैसले के खिलाफ हैं और विरोध में अपनी जान कुर्बान कर रहे हैं | 

आर्काइव लिंक 

तद्पश्चात फैक्ट क्रेसेंडो ने भटिंडा के पूर्व एस.एस.पी डॉक्टर नानक सिंह से संपर्क किया जिन्होंने हमें इस बात की पुष्टि की कि यह तस्वीर पिछले साल जुलाई की है और इस तस्वीर का वर्तमान में चल रहे किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है | तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति किसान ही था परंतु उनकी मौत वर्तमान किसान आंदोलन में नहीं हुई है |

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को आंशिक रूप से गलत पाया है, वायरल तस्वीर का वर्तमान किसान आंदोलनों से कोई संबंध नहीं है हालाँकि जिन मृत वृद्ध व्यक्ति को वर्तमान आंदोलन से जोड़ा जा रहा है वे भी एक किसान नेता थे और उनकी मृत्यु जुलाई २०२० को भटिंडा में एक अन्य धरने के दौरान हुई थी| इनकी मृत्यु को वर्तमान आंदोलन का बता भ्रम फैलाया जा रहा है |

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Title:किसान आंदोलनों से जोड़ एक असंबंधित तस्वीर को ग़लत दावे के साथ फैलाया जा रहा है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: Partly False


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