एक मृत बुज़ुर्ग की पुरानी तस्वीर को वर्तमान किसान आंदोलन से जोड़कर वायरल किया जा रहा है।

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वर्तमान में दिल्ली के सिंघू बोर्डर पर हो रहे किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शन कर रहे कई किसानों की मृत्यू हुई है, इसी के चलते सोशल मंचो पर मृत लोगों की कई तस्वीरें वायरल होती चली आ रही है। ऐसी ही एक तस्वीर इन दिनों इंटरनेट पर काफी चर्चा में है, उस तस्वीर में आप एक सिख बुज़ुर्ग को ज़मीन पर लेटे हुए देख सकते है। तस्वीर के साथ जो दावा वायरल हो रहा है उसके मुताबिक यह तस्वीर एक मृत बुज़ुर्ग की है जिनके मृत्यू दिल्ली में आंदोलन के दौरान हुई है।

वायरल हो रहे पोस्ट के शीर्षक में लखा है, 

“दुखी मन से बता रहा हूं। दिल्ली किसान मोर्चे में एक और किसान शहीद हो गए , उनके इस शहादत को मै कोटि कोटि नमन करता हूँ। @PMOIndia ! #FarmerProtest #FarmLaws

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फेसबुक | आर्काइव लिंक 

इस तस्वीर को इंटरनेट पर काफी साझा किया जा रहा है।

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान पाया कि वायरल हो रही बुज़ुर्ग की तस्वीर 2018 से है। यह तस्वीर पंजाब के तरनतारन शहर में स्थित बोहरी चौक में मिली एक बुज़ुर्ग के शव की है। इस तस्वीर का वर्तमान में दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन से कोई संबन्ध नहीं है।

जाँच की शुरुवात हमने वायरल हो रही इस तस्वीर को गूगल रीवर्स इमेज सर्च कर की, परिणाम में हमें एक फेसबुक अकाउंट मिला जिसका नाम गुरुमुखी भाषा में लिखा हुआ है। उस अकाउंट पर वायरल हो रही यही तस्वीर २ सितंबर २०१८ में प्रकाशित की गयी थी। तस्वीर के शीर्षक में गुरुमुखी भाषा में लिखा है, यह वृद्ध जिनकी उम्र लगभग 70 वर्ष है, उनका शव तरनतारन के बोहरी चौक में मिला है, उनकी पहचान नहीं हो पाई है। कृपया साझा करें ताकि उसके परिवार को पता चल सके।

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फेसबुक | आर्काइव लिंक

इससे हम यह बता सकता है कि वायरल हो रही तस्वीर वर्तमान में दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन से नहीं है। 

इसके पश्चात हमने उपरोक्त फेसबुक पेज के मालिक रुप ढ़िल्लों से संपर्क साधा तो उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि ये बुज़ुर्ग कि तस्वीर वर्तमान की नहीं है। उन्होंने कहा, 

“वायरल हो रहा दावा सरासर गलत है। इन वृद्ध कि तस्वीर मुझे मेरे सोशल मीडिय मंच पर एक शख्स द्वारा 2 साल पहले भेजी गयी थी व मुझे इस तस्वीर को साझा करने के लिए कहा गया था। यह तस्वीर वर्तमान की नहीं है। मैं तरनतारन शहर का निवासी हूँ इसलिए दावे के साथ कह सकता हूँ कि ये तस्वीर तरनतारन में स्थित बोहरी चौक की ही है। इन बुज़ुर्ग का शव उस समय अज्ञात था जिसके कारण इनकी तस्वीर इंटरनेट पर वायरल की जा रही थी। मुझे एक शख्स का मैसेज आया था जो यह दावा कर रहा था कि वो इन बुज़ुर्ग को जानता है, परंतु इसके आगे क्या हुआ इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।“

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया है कि उपरोक्त दावा गलत है। वायरल हो रही बुज़ुर्ग की तस्वीर 2018 की है। यह तस्वीर पंजाब के तरनतारन शहर में स्थित बोहरी चौक में मिली एक बुज़ुर्ग के शव की है। इस तस्वीर का वर्तमान में दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन से कोई संबन्ध नहीं है।

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :
१. २०१३ के मुज्जफरनगर दंगो से सम्बंधित एक तस्वीर को वर्तमान किसान आन्दोलन का बता वायरल किया जा रहा है ।

२. डॉक्टर देवेंद्र शर्मा द्वारा पूर्व में किये अपराधों को वर्तमान कोरोना महामारी से जोड़ फैलाया जा रहा है।

३. इज़रायल को लेकर किये गए दावे गलत हैं व गरम पानी में नींबू और बायकार्बोनेट मिलाकर पीने सेकरोनावायरस नहीं मरता है।

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Title:एक मृत बुज़ुर्ग की पुरानी तस्वीर को वर्तमान किसान आंदोलन से जोड़कर वायरल किया जा रहा है।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False


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