चीन के नागरिकों का कुरान पढ़ने के नाम से एक पुराना और असंबंधित वीडियो हुआ वाईरल |

Coronavirus False International Medical
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सोशल मीडिया मंच दुनिया में कोरोनावायरस के प्रकोप से संबंधित खतरों और अफवाहों से भर गया है, इस वाइरस ने अब तक विश्व में ४०१२  लोगों की जान ले ली है | सबसे पहले हम यह स्पष्ट करें कि कोरोनावायरस का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है | नोवेल कोरोनावायरस  किसी भी धर्म से संबंधित लोगों को प्रभावित कर सकता है-ये सरासर हालत है | पोयन्टर की वेबसाइट के अनुसार, ” ऐसे दावों का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध नहीं है जो कि एक निश्चित जाति या धर्म के लोगों को कोरोनोवायरस २०१९ के खिलाफ मजबूत या कमजोर बनाता है | सभी लोगों का इस वाइरस से समान रूप से संक्रमित होने की संभावना रहती है, इसका संक्रमण ईसाई, यहूदी, मुस्लिम, बौद्ध, हिंदू और अन्य सभी धर्मों को मानने वालों के लिए भी समान है |”

हाल ही में हम एक वायरल वीडियो जिसमें दावा किया गया था कि महामारी COVID-19 के फैलने के कारण चीन मुस्लिमों को कुरान पढ़ने की अनुमति दे रहा है, जो पहले वहाँ प्रतिबंधित था |

इस वीडियो को हमारे पाठकों ने हमारे व्हाट्सएप नंबर- 9049053770 पर सत्यता जांचने के लिए भेजा था |

पोस्ट में लिखा है कि “चीन में क़ुरान पे पाबन्दी लगाने वालों में अब क़ुरान को पढ़ने की होड़ मची हैं | अल्लाहु अकबर या मेरे रब इस वायरस से नीजात दिला |”

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

यह वीडियो फेसबुक पर काफी चर्चा में है |

अनुसंधान से पता चलता है कि..

जाँच की शुरुवात हमने इनविड टूल के मदद से की फ्रेम्स पर गूगल रिवर्स इमेज सर्च कर के किया, जिसके परिणाम में हमें १९ मार्च २०१३ को प्रकाशित गॉस्पेल प्राइम की एक समाचार रिपोर्ट मिला | रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो उस क्षण को दिखाता है जब लोगों ने पहली बार बाइबिल देखी | हालाँकि, लेख बताता है कि यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कहाँ और कब बनाया गया था |

आर्काइव लिंक 

क्रिश्चियन पोस्ट ने १५ जनवरी २०१४ को इसी वीडियो को पोस्ट करते हुए कहा कि यह वीडियो १९८० के दशक का है, जब चीन में ईसाई पहली बार बाइबल प्राप्त करते हैं |

आर्काइव लिंक 

यह वीडियो को १७ मार्च २०१४ को अंतर्राष्ट्रीय क्रिश्चियन कन्सर्न नाम के एक यूट्यूब चैनल द्वारा भी अपलोड किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि “मिशनरी फूटेज कैप्चर इमोशन ऑफ चाइनीज क्रिस्चियन रिसीविंग बीबल्स फर्स्ट टाइम।” इसका मतलब यह है कि यह वीडियो चीन में किसी मिशनरी का है जब चीनी क्रिस्चियन लोगों को पहली बार बाइबिल दी गयी थी |

निष्कर्ष: तथ्यों के जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | सोशल मीडियो पर वायरल वीडियो कोरोना वायरस के प्रकोप के पहले से ही इन्टरनेट पर २०१३ से उपलब्ध है | यह वीडियो पुराना और असम्बंधित है |

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Title:चीन के नागरिकों का कुरान पढ़ने के नाम से एक पुराना और असंबंधित वीडियो हुआ वाईरल |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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