क्या दिल्ली की बोर्डरों पर लगाई गयीं लोहे की कीलों के बैरिकेडों का सामना करने के लिए किसान अपने ट्रैक्टरों के वास्ते लोहे के चक्के बना रहे है? जानिये सच…

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किसान आंदोलन के चलते अब दिल्ली से लगे उत्तरप्रदेश व हरियाणा के बॉर्डर पर प्रशासन ने बैरिकेड के रुप में रास्ते पर कीलें बिछा दी है, जिसके चलते सोशल मंचों पर कई वीडियो व तस्वीरें साझा की गयी है। इसी बीच इस संबद्ध में एक पोस्ट इंटरनेट पर काफी तेज़ी से वायरल होता दिख रहा है। उस पोस्ट आपको अलग-अलग ट्रैक्टरों की पाँच तस्वीरें देखने को मिलेगी, उन तस्वीरों में ट्रैक्टरों के चक्के लोहे से बने नज़र आ रहे है। इन तस्वीरों के साथ जो दावा वायरल हो रहा है उसके मुताबिक किसान अब कीलों के बैरिकेड को पार करने के लिए अपने ट्रैक्टरों के लिए बिना टायर टूयूब के चक्के बना रहे है।

वायरल हो रहे पोस्ट के शीर्षक में लिखा है,

बिना टायर ट्यूब के चक्के तैयार किए जा रहे हैं ट्रैक्टर के सरकार द्वारा सड़कों के लिए, साहिब जी यह होता है आत्म निर्भर भारत।”

फेसबुक | आर्काइव लिंक

अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान पाया कि वायरल हो रहा दावा सरासर गलत है। किसान अपने ट्रैक्टरो को लिए लोहे से बने चक्के नहीं बना रहे है। वायरल हो रही इन तस्वीरों का किसान आंदोलन से कोई संबद्ध नहीं है।

जाँच की शुरुवात हमने वायरल हो रहे दावे को गूगल पर कीवर्ड सर्च कर की, परिणाम में हमें ऐसा कोई समाचार लेख नहीं मिला जो इस बात की पुष्टि करता हो कि किसान अपने ट्रैक्टरों के लिए लोहे के चक्के बना रहे है या वे लोहे के चक्को वाले ट्रैक्टर इस्तेमाल करने वाले है।

इसके पश्चात हमने किसान नेता रुल्डू सिंह मानसा से संपर्क किया व उनसे इस बात की जानकारी ली तो उन्होंने इस दावे को गलत बताते हुए कहा, वायरल हो रहा दावा बिलकुल गलत है। हम लोहे से बने चक्को के ट्रैक्टर इस्तेमाल नहीं कर रहे है। हम तो रबर के बने चक्को के ट्रैक्टर जो अपने साधारण ट्रैक्टर होते है वही इस्तेमाल करेंगे व आगे की कार्रवाई हम अगली मिटिंग में तय करेंगे।

तदनंतर अधिक जानकारी के लिए हमने वहाँ ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे एक पत्रकार से संपर्क किया, जिनका नाम जसवीर सिंह मुक्तसर है। उन्होंने हमें बताया कि, हमने वायरल हो रहे पोस्ट में दिख रहे ट्रैक्टर जैसे कोई भी ट्रैक्टर यहाँ दिल्ली के बोर्डरो पर नहीं देखे है। चूंकि हम किसान आंदोलन को कवर कर रहे है, तो हम यह भी यकीन से बता सकते है कि अभी तक यहाँ हमने किसी को भी अपने ट्रैक्टरो के लिए लोहे के चक्के बनाते हुए नहीं देखा है।

इसके पश्चात हमने उपरोक्त दावे के साथ वायरल हो रही इन पाँच तस्वीरों को गूगल रीवर्स इमेज सर्च कर इनकी जाँच की। नीचे हर एक तस्वीर की जाँच का विवरण दिया हुआ है।

  1. पहली तस्वीर 

इस तस्वीर की जाँच के दौरान हमें यह तस्वीर पीइंटरेस्ट नामक एक वैवसाइट पर सल्वाडोर डियास नामक एक उपभोक्ता द्वारा प्रकाशित की गयी है और इसके शीर्षक में लिखा है, “स्टील के पहिये पर आधुनिक ट्रैक्टर, पुराने ऑर्डर मेनोनिट्स के साथ मेरे क्षेत्र में अधिरकतर पाये जाते है।“

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  1. दूसरी तस्वीर 

इस तस्वीर की जाँच के दौरान हमने पाया कि यह जॉन डीरे कंपनी की एक ट्रैक्टर की तस्वीर है। यह तस्वीर हमे अमेजोन पर प्रकाशित की हुई मिली।

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  1. तीसरी तस्वीर

उपरोक्त जाँच के दौरान हमें यह तस्वीर एक यूट्यूब वीडियो में प्रसारित की हुई मिली। वीडियो के शीर्षक में लिखा है, “सर्वहारा लोगों द्वारा हाथों से बनाया गया ट्रैक्टर आयरन फुल केज व्हील्स| लघु उद्योग।”

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  1. चौथी तस्वीर

इस तस्वीर की जाँच के दौरान हमने पाया कि यह मैसी-हैरिस नामक कंपनी का 55 नंबर मॉडल का ट्रैक्टर है। इस तस्वीर को ड्रीम्स टाइम नामक एक वैबसाइट ने प्रकाशित किया है और इसके शीर्षक में लिखा है, “यह मैसी-हैरिस मॉडल 55 फार्म ट्रैक्टर स्टील के पहियों के साथ आया था।“

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  1. पांचवी तस्वीर

यह तस्वीर हमें बोनट्रेगर एंटरटेंमेंट नामक एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित एक वीडियो में देखने को मिली। इस वीडियो के शीर्षक में लिखा है, “स्टील व्हील्स और न्यूयॉर्क मेनोनाइट्स” और इसके नीचे दी गयी जानकारी में लिखा है, “खेती का संक्षिप्त इतिहास और न्यूयॉर्क के घोड़े और बग्गी मेनोनाइट द्वारा स्टील के पहियों का उपयोग करने का कारण।“ इस वीडियो में आपको यह तस्वीर 1.32 से लेकर 1.36 मिनट तक देखने को मिलेगी।

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निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया है कि उपरोक्त दावा गलत है। किसान अपने ट्रैक्टरो के लिए लोहे से बने चक्के नहीं बना रहे है। वायरल हो रही इन तस्वीरों का किसान आंदोलन से कोई संबद्ध नहीं है।

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

.शिवसेना के पोस्टर का रंग बदलकर उसे गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

२.क्या पंजाब में कृषि कानूनों के विरोध के साथ-साथ हिंदी भाषा का ​भी विरोध हो रहा है? जानिये सच

३. झारखण्ड में लड़की पर हमला करने के एक पुराने वीडियो को लव जिहाद के नाम से फैलाया जा रहा है |

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Title:क्या दिल्ली की बोर्डरों पर लगाई गयीं लोहे की कीलों के बैरिकेडों का सामना करने के लिए किसान अपने ट्रैक्टरों के वास्ते लोहे के चक्के बना रहे है? जानिये सच…

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False


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