मोहन यादव का यह न्यूज ग्राफिक 2018 का है। उन्होंने यूजीसी के हालिया मामले को लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।

यूजीसी को लेकर चल रहे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है,जिसमें एक न्यूज़ चैनल के ब्रेकिंग न्यूज़ वाली ग्राफिक्स की तस्वीर दिखाई दे रही है। वहीं ग्राफिक्स में “सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग: मोहन यादव” लिखा हुआ है। यूज़र्स इस पोस्ट को UGC के हालिया विवाद से जोड़ते हुए शेयर कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि मोहन यादव ने सवर्णों के आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग होने की बात कही है। वायरल वीडियो के साथ यूज़र ने कैप्शन लिखा है…
चपरासी बनने की औकात नहीं है कृपा से मुख्यमंत्री बने हैं। पाकिस्तान से आ रही है फंडिंग। और कुछ भी ?? #UGC #UGCRollBack

अनुसंधान से पता चलता है कि…
हमने जांच की शुरुआत में वायरल पोस्ट में बंसल न्यूज का लोगो देखा। जिसको आधार बनाकर हमने खोज शुरू की। हमें एक फेसबुक पेज इससे जुड़ा वीडियो मिला और इसमें वायरल स्क्रीनशॉट जैसी 20 सितंबर की तारीख दर्ज है तथा मोहन यादव को बीजेपी विधायक बताया गया है। इससे काफी हद तक स्पष्ट होता है कि मोहन यादव का यह बयान उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले का है। वीडियो 20 सितंबर 2018 को पोस्ट किया गया था और मोहन यादव उस दौरान एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए यह कह रहे थें कि सवर्ण आंदोलनों के पीछे विदेशी फंडिंग हैं।
इसके बाद हमें बंसल न्यूज की वेबसाइट पर 31 जनवरी 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली। इसमें वायरल ग्राफिक को फर्जी बताया गया है, साथ ही लिखा गया है,”यूजीसी के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट वायरल किया जा रहा है। इस स्क्रीनशॉट में फर्जी तरीके से बंसल न्यूज के लोगो का इस्तेमाल किया गया है। स्क्रीनशॉट इसके में मुख्यमंत्री मोहन यादव की फोटो लगाकर भ्रामक खबर के तौर पेश किया जा रहा है। बंसल न्यूज इसकी कड़ी निंदा करता है। साथ ही बंसल न्यूज इस फर्जीवाड़े के खिलाफ साइबर क्राइम में शिकायत भी करने जा रहा है। बंसल न्यूज ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।“बंसल न्यूज के यूट्यूब चैनल पर भी इससे सम्बंधित रिपोर्ट साझा किए गए हैं।
इसके बाद हमने तत्कालीन एससी-एसटी एक्ट को लेकर हो रहे प्रदर्शन पर मोहन यादव के तब दिए गए विवादित बयान से सम्बंधित न्यूज़ रिपोर्टों की खोज की। परिणाम में हमें पर कुछ मीडिया रिपोर्ट मिलीं, जिसे 20 सितंबर 2018 को प्रकाशित किया गया है। इनके अनुसार, एससी-एसटी एक्ट के विरोध में हो रहे आंदोलनों पर मोहन यादव ने कहा था कि सिमी और इस्लामिक कट्टरपंथी हिंदू समाज को बांटने की साजिश रच रहे हैं। देश में समाज को तोड़ने की साजिश की जा रही है और विदेशी ताकतें फूट डालकर समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं। तभी उन्होंने यह भी कहा था कि सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग है।
जी न्यूज की रिपोर्ट में मोहन यादव का ऐसा ही एक बयान देखा जा सकता है।
आगे खोज करने पर हमने पाया कि मोहन यादव के इस बयान के बाद करणी सेना ने उनके कार्यालय के बाहर धरना दे दिया और उनके बयान पर सवाल उठाए थे। इसपर सफाई देते हुए मोहन यादव ने कहा था कि वह सवर्ण समाज या करणी सेना के बारे में ऐसा नहीं कह सकते। उनके बयान को काट-छांट कर पेश किया जा रहा है।
उन्होंने विवाद बढ़ने के बाद इस संबंध में एक पोस्ट कर के बयान का खंडन करते हुए कहा था,”कुछ चैनलों पर सवर्ण और करणी सेना को लेकर मेरे हवाले से झूठी जानकारी दी गई थी।“
निष्कर्ष
तथ्यों के जांच से यह पता चलता है कि मोहन यादव का वायरल हो रहा यह पोस्ट यूजीसी के हालिया विवाद से संबंधित नहीं है। यह न्यूज ग्राफिक 2018 का है जब उन्होंने एससी-एसटी संशोधन विधेयक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच ऐसा बयान दिया था।
Title:मोहन यादव का UGC विरोधी आंदोलन में विदेशी फंडिंग की बात नहीं कही। फेक पोस्ट भ्रामक दावे से वायरल…
Fact Check By: Priyanka SinhaResult: False


