इस घटना में कोई भी सांप्रदायिक एंगल नहीं है। वायरल दावा फर्जी है।

इंटरनेट पर जमीन पर गिरी हुई कई टूटी-फूटी अर्धनिर्मित मूर्तियों की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसे साझा करते हुए दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करते हुए सांप्रदायिक हमले किए जा रहे हैं और इसलिए ही इन मूर्तियों को भी बेरहमी से तोड़ दिया गया। पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा गया है…
बंगाल जिहादियों का गढ़ हो गया है !बंगाल में तोड़ी गयी मां सरस्वती की प्रतिमा।ममता बनर्जी लगातार कर रही हिंदू धर्म का अपमान !हिंदू विरोधी ममता सरकार हिंदू आस्था से करती है खिलवाड़! पश्चिम बंगाल में देवी सरस्वती की मूर्तियों को किया गया क्षतिग्रस्त !ममता सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण और मजहबी वोटबैंक की राजनीति में लीन। बंगाल में लगातार हिंदू आस्था के साथ लगातार हो रहा खिलवाड़।

अनुसंधान से पता चलता है कि…
हमने जांच की शुरुआत में सबसे पहले गूगल पर संबंधित कीवर्ड से ढूंढना शुरु किया। परिणाम में हमें आजतक बांग्ला की वेबसाइट पर 7 जनवरी 2026 को प्रकाशित की हुई एक रिपोर्ट मिली। इसमें बताया गया था कि यह घटना पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के शांतिपुर थाना क्षेत्र में हुई थी, जहां मूर्ति बनाने का काम करने वाले जयंत दास के कारखाने में किसी ने 60-70 मूर्तियों को तोड़ दिया था और इनमें से अधिकांश मूर्तियां मां काली और सरस्वती की थीं। घटना की जांच करने में मौके से मिले सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, अमित और असित नाम के व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आई थी। इसके बाद शांतिपुर पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की।

इस बारे में आजतक बांग्ला के यूट्यूब चैनल पर भी वीडियो रिपोर्ट अपलोड किये गए हैं।
फिर हमें 8 जनवरी 2025 को प्रकाशित टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर रिपोर्ट मिली। इसमें बताया गया था कि जयंत दास ने मूर्ति तोड़फोड़ की शिकायत की और उन्होंने दावा किया कि उनके कारखाने के पास लगे सीसीटीवी फुटेज में अमित डे और असित डे की संलिप्तता पाई गई। शांतिपुर पुलिस के अनुसार दोनों इस घटना को अंजाम देते समय नशे में थे और फ़िलहाल दोनों फरार हैं।
ईटीवी भारत बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के नादिया जिले स्थित शांतिपुर में एक मिट्टी के बर्तन बनाने की वर्कशॉप में हिंदू देवी-देवताओं काली और सरस्वती की कई मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ की गई और उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
पड़ताल के दौरान हमें पब्लिक न्यूज की वेबसाइट पर भी इससे जुड़ी वीडियो रिपोर्ट मिली, जिसमें स्थानीय पुलिस अधिकारी का भी बयान शामिल था। पुलिस अधिकारी ने इस घटना में शामिल दोनों व्यक्तियों की पहचान अमित और असित डे के रूप में की थी। बताया गया है कि घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों की पहचान की गई थी। साथ ही उन्होंने अपने बयान में किसी भी तरह के राजनीतिक और सांप्रदायिक एंगल होने से इनकार किया था। घटना से एक दिन पहले जयंत दास के पुत्र अपने कारखाने में मूर्ति तैयार कर रहे थे, उस समय अमित ने शराब पीकर उन्हें परेशान किया था। इसके बाद उसने अमित को जाने के लिए कहा लेकिन वह जाने को तैयार नहीं था, इसलिए उसने खुद ही दुकान बंद कर दिया। अगले दिन सुबह उसे अपने कारखाने में अधिकांश मूर्तियां टूटी-फूटी मिली थीं। इसके बाद पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई और कारखाने के पास लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तोड़फोड़ करने वाले की शिनाख्त अमित और असित डे के रूप में की गई।
पड़ताल के दौरान हमें राणाघाट जिला पुलिस की तरफ से स्पष्टीकरण वीडियो मिला। इसमें मूर्ति तोड़ने की घटना में किसी भी प्रकार की राजनैतिक या सांप्रदायिक कोण की संभावना से इंकार किया गया है। साथ ही बताया गया है कि शांतिपुर में लोकनाथ मंदिर के पास कुम्हार जयंत दास (उर्फ पिंटू) और अमित डे के बीच नशे में बहस हो गई थी। उसके बाद, असित डे और उसके भाई अमित डे ने मूर्ति बनाने वाली फैक्ट्री में धावा बोल दिया और मूर्तियों को तोड़ दिया। इस घटना की शिकायत शांतिपुर पुलिस स्टेशन में की गई। जिसके बाद CCTV फुटेज को चेक करने से कुम्हार ने खुद अमित डे और असित डे की पहचान की, जिन्होंने मूर्ति तोड़ी थी।
निष्कर्ष
तथ्यों के जांच से यह पता चलता है कि बंगाल में टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीर को फर्जी सांप्रदायिक दावे के साथ फैलाया जा रहा है। दोनों व्यक्तियों के नाम अमित और असित डे है।
Title:बंगाल में टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें फर्जी सांप्रदायिक दावे से वायरल…
Fact Check By: Priyanka SinhaResult: False


