
सोशल मीडिया पर एक वीडियो को इस दावे के साथ फैलाया जा रहा है कि यह हैदराबाद (तेलंगाना) के एक अस्पताल में कोरोनावायरस की स्थिति को दर्शाता है | वीडियो में गांधी अस्पताल के बाहर एक मृत व्यक्ति का शरीर जमीन पर पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है | वीडियो को कोरोनावायरस महामारी की पृष्ठभूमि में साझा किया जा रहा है | गांधी अस्पताल हैदराबाद शहर में कोरोनावायरस के संक्रमित रोगियों के इलाज के लिए नामित सुविधा है |
वीडियो में, एक व्यक्ति कह रहा है कि, “यह गांधी अस्पताल में शवों की स्थिति है | यहां एक व्यक्ति है जो मर गया है और शायद कई दिनों से यहां पड़ा है |” वीडियो शूट करने वाला व्यक्ति सबसे पहले जमीन पर लेटे एक व्यक्ति को दिखाता है, जो चादर में ढंका हुआ है, जिसके चेहरे और हाथ नज़र आ रहे हैं | एक दुसरे व्यक्ति के शव को भी दिखाया गया है जिसे रस्ते पर लापरवाही से छोड़ दिया गया है | वीडियो शूट करने वाला व्यक्ति फिर मोर्तुअरी में खड़ी एक बाइक दिखाता है और कहता है, “डॉक्टर की मोटरबाइक यहाँ है। वह आया और वाहन रखा, लेकिन शवों को अंदर स्थानांतरित करने की जहमत नहीं उठाई |”
इस वीडियो के शीर्षक में लिखा गया है कि “क्या हो रहा है ? यदि यह गाँधी अस्पताल है, तो यह सरकार की तरफ से पूरी तरह से विफल है !! हम सभी जानते हैं और देख रहे हैं कि यह टीआरएस सरकार तेलंगाना में कोरोना और विशेष रूप से हैदराबाद में कितना अक्षम है |”
अनुसंधान से पता चलता है कि….
जाँच की शुरुवात हमने उपरोक्त वीडियो को इन्विड टूल के मदद से गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने से की, जिसके परिणाम से हमें यह वीडियो यूट्यूब पर २३ अगस्त २०१९ को अपलोड किया हुआ मिला| एस आर पी न्यूज़ २४ द्वारा प्रसारित यूट्यूब वीडियो के शीर्षक में लिखा गया है कि “यह वीडियो हैदराबाद के गाँधी हॉस्पिटल की पार्किंग से है |”
तद्पश्चात हमने गूगल पर उपरोक्त वीडियो से संबंधित कीवर्ड सर्च करने से किया जिसके परिणाम से हमें २४ अगस्त २०१९ को ड न्यू इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित एक खबर प्राप्त हुई | इस खबर के अनुसार गांधी मेडिकल अस्पताल के बाहर दो शव पड़े मिले | रिपोर्ट में वीडियो में वर्णन करने वाले की पहचान मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) के प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान के रूप में की गई है | अमजद खान ने सूचित किया था कि उन्हें एक पार्टी कार्यकर्ता से वीडियो मिला था, जिसमे चारों ओर शव पड़े थे |
अमजद खान ने सूचित किया था कि उन्हें एक पार्टी कार्यकर्ता से यह वीडियो मिला था, जिसे उन्हें जमीन पे शव पड़े हुए मिले | हालांकि, गांधी अस्पताल के अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया था। गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ० पी श्रवण कुमार ने २०१९ में कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से पूरे परिसर का दौरा किया और ऐसा कुछ भी नहीं पाया। यह झूठी खबर है |” उन्होंने कहा कि शवों को आमतौर पर ७२ घंटे तक रखा जाता है | लावारिस शवों को निपटान के लिए जीएचएमसी को सौंप दिया जाता है |
निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो कोरोनावायरस महामारी से पहले का है और वर्तमान में कोरोनावायरस महामारी से कोई संबंध नही रखता है |
Title:गाँधी हॉस्पिटल के बाहर पड़े शवों के एक पुराने वीडियो को वर्तमान कोरोनावायरस महामारी का बता फैलाया जा रहा है |
Fact Check By: Aavya RayResult: False


