क्या होलिका जलाते वक़्त कपूर और इलायची जलाने से स्वाइन फ्लू के विषाणु ७०% मरते हैं ? जानिये सच |

False Medical National
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यह चित्र हमने Deccanchronicle से प्रतिनिधित्व के लिए लिया है |

१८ मार्च २०१९ को ‘फैक्ट क्रेसेन्डो’ के वाट्सऐप नम्बर पर एक मेसेज हमारे पाठक द्वारा सत्यता जाँचने के लिए भेजा गया | जब हमने इस मेसेज को अन्य सोशल मीडिया मंचों पर ढूंढा तो यह ज्ञात हुआ कि यह खबर काफ़ी चर्चा में है | दावा यह किया गया है कि, ‘होलिका दहन में कपूर और छोटी इलायची साथ में जलायें क्योंकि कपूर और छोटी इलायची की खुशबु से स्वाइन फ्लू का वायरस मर जाता है |’ आइये देखते हैं क्या है सच |

सोशल मीडिया पर प्रचलित कथन:  

FacebookPost | ArchivedLink

फेसबुक, वाट्सऐप, ट्विटर और कई अन्य सोशल मीडिया पर भी यह संदेश बड़े पैमाने पर साझा किया जा रहा हैं |

TwitterPost | ArchivedLink

होलीका दहन की प्रथा पूरे देश मे मनाई जाती है | कहा जा रहा है कि इस दिन होलिका दहन में सब अगर कपूर और छोटी इलायची साथ में जलायेंगे तो कपूर और छोटी इलायची की इतनी भारी मात्र में खुशबु से स्वाइन फ्लू के वायरस ७०% मर जाएंगे | आइये देखते हैं क्या सच मे ऐसा हो सकता है ?

तथ्यों की जांच:

गूगल पर जब हमने इस बात की खोज की तब हमें पता चला कि स्वाइन फ्लू या स्वाइन इन्फ्लूएंजा एक श्वसन संबंधी रोग / संक्रमण है जो कई प्रकार के स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस मे से किसी एक विषाणु के कारण होता है | सबसे पहले यह विषाणु संक्रमण सूअरों में पाया गया | यह विषाणु सूक्ष्मदशंक यंत्र से देखने पर नीचे दर्शाए चित्र की तरह दिखता है |

यह चित्र हमने Wikipedia से प्रतिनिधित्व के लिए लिया है |

वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हैल्थ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह वायरस अब केवल सूअरों तक सीमित नहीं है, इसने इंसानों के बीच फैलने की कुवत हासिल कर ली है। 

एन्फ्लूएंजा वायरस की खासियत यह है कि यह लगातार अपना स्वरूप बदलता रहता है। इसकी वजह से यह उन एंटीबॉडीज को भी छका देता है जो पहली बार हुए एन्फ्लूएंजा के दौरान विकसित हुई थीं। यही वजह है कि एन्फ्लूएंजा के वैक्सीन का भी इस वायरस पर असर नहीं होता।

सबसे पहले मनुष्यों में स्वाइन फ्लू मेक्सिको में 2009 में देखा गया था | इसके बाद इस विषाणु से संक्रमित लोगों की तादाद हर साल बढती ही जा रही है |

स्वाइन फ्लू के बारे मे पता करने के बाद हमने उपरोक्त लेख कि ‘कपूर और इलायची को जलने से स्वाइन फ्लू के विषाणु मर जाते हैं’ पर जांच की |

हमने इस बारे मे डॉ. आकांशा पाटिल (BAMS-Ayurveda-Auranagabad) से बात किया | उन्होंने कहा कि “आयुर्वेद मे कपूर के फायदे तो बहुत है मगर स्वाइन फ्लू जैसी बिमारी के विषाणु नहीं मरते हैं | कपूर धुमन करने पर वातावरण के जीवाणु तो नष्ट होते  है मगर विषाणु पर उसका कोई असर नहीं होता है | इलायची के धुमन से कुछ भी फायदा नहीं होता है |” उन्होंने यह भी कहा कि “अगर घर मे रोज़ कपूर जलाया जाए, तो घर के वातावरण मे जीवाणु की तादाद कम रहती है और इससे घर के सदस्यों को किसी बिमारी ने जकड़ने की आशंका कम होती है |”

इसके पश्चात हमने डॉ. शेख़ तनवीर अहमद (UNANI Doctor-Aurangabad) से बात की | उनके मुताबिक यूनानी मे कपूर और निलगिरी के तेल को बार बार सूंघने से या परफ्यूम की तरह शरीर मे छिड़कने से स्वाइन फ्लू से बच सकतें हैं, मगर तब तक ही – जब तक इन पदार्थों का प्रभाव है | एक बार प्रभाव ख़त्म हो जाये तो फिर यह कोई काम का नहीं | मगर यह स्थायी इलाज नहीं है | और इलायची और कपूर का धुमन करने पर स्वाइन फ्लू के विषाणु नहीं मरते हैं |”

हमने हमारी जांच को और पुख्ता करने के लिए जब डॉ. स्वाती लाहा (MBBS, MS-General Surgery-Kolkata) से पुछा तो उन्होंने हँसते हुए जवाब दिया कि “अगर कपूर और इलायची से स्वाइन इन्फ्लुएंजा जैसे घातक और उद्विकासी विषाणु मर जाते, तो डॉक्टर इतने सालों से इस बिमारी के दवाई आविष्कार में समय बर्बाद नहीं करते | यह विषाणु हमेशा विकसित और अनुकूलित है | इसीलिए इसका स्थायी इलाज ढूंढ निकलना काफ़ी बड़ी चुनौती है |”

उपरोक्त दावा २०१५ से होली के मौके पर हर साल साझा किया जाता है | हिंदुस्तान टाइम्स ने भी इस विषय पर एक खबर प्रकाशित की थी |

इस ख़बर को पूरा पढ़ने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें |

HindustantimesPost | ArchivedLink

२०१६ मे एबीपी न्यूज़ ने भी इस पर खबर की थी |

ख़बर को पूरा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें |

AbplivePost | ArchivedLink

रिसर्च गेट के वेबसाइट पर एक प्रकाशन दिया गया है | इस प्रकाशन मे आप स्वाइन फ्लू के बारे मे पूरी जानकारी के साथ साथ कई आयुर्वेदिक नुस्ख़े भी पढ़ सकते है, यह उपाय आपको स्वाइन फ्लू के विषाणु से काफ़ी हद तक प्रतिरक्षित करेंगे |

ResearchgatePost | ArchivedLink

निष्कर्ष : ग़लत

तथ्यों की जांच करने पर हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि कपूर जलने से जीवाणु (Bacteria) काफी हद्द तक मरते हैं मगर, कपूर और छोटी इलायचीजलाने से स्वाइन फ्लू के विषाणु (Virus) नहीं मरते हैं | उपरोक्त दावा ‘होलिका दहन में कपूर और छोटी इलायची साथ में जलायें क्योंकि कपूर और छोटी इलायची की खुशबु से स्वाइन फ्लू का वायरस मर जाता है |’ ग़लत है |

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Title:क्या होलिका जलाते वक़्त कपूर और इलायची जलाने से स्वाइन फ्लू के विषाणु ७०% मरते हैं ? जानिये सच |

Fact Check By: Nita Rao 

Result: False


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