असम के एक पुराने वीडियो को बांग्लादेशियों द्वारा अलग देश की मांग के रूप में फैलाया जा रहा है |

False Political
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वर्तमान में सोशल मंचों पर एक वीडियो वायरल होता दिख रहा है, जिसमें कई लोगों विरोध प्रदर्शन के तहत एक रैली निकाल रहे हैं, व कुछ समय बाद पुलिस द्वारा रोके जाने पर उनके व पुलिसकर्मियों के बीच गहमागहमी होती है जिसके उपरांत पुलिस द्वारा उन पर लाठीचार्ज किया जाता है। वीडियो के साथ जो दावा वायरल हो रहा है उसके मुताबिक ये लोग असम के बांगलादेशी मुस्लिम हैं जो कि अलग देश की मांग कर रहे है और पुलिस द्वारा रोके जाने पर ये लोग विवाद करते हैं जिसकी वजह से पुलिस को लाठीचार्ज कर उन्हें तितर-बितर कर दिया जाता है |

वायरल हो रहे वीडियो के शीर्षक में लिखा है, 

असम में बांग्लादेशी मुसलमानों ने की अलग देश की मांग फिर कुटाई अभियान चालू।

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक

अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने पाया कि यह वीडियो २०१७ का है, २०१७ में असमिया मुसलमानों ने राज्य के खिलाफ ‘डी’-मतदाता या ‘संदिग्ध’ मतदाता में उनके नाम होने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था।

जाँच की शुरुवात हमने इस वीडियो को इन्विड वी वेरीफाई टूल की मदद से छोटे कीफ्रेम्स में तोड़कर व गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च कर के की, जिसके परिणाम से हमें यह वीडियो यूट्यूब पर २ जुलाई २०१७ को अपलोड किया हुआ मिला , अपलोड किये हुये वीडियो के विवरण के अनुसार-“ यह घटना असम के गोलपारा से है, जहां इन प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया और अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जो कई वास्तविक भारतीयों के खिलाफ सरकार द्वारा लगाए गए ‘संदिग्ध नागरिक और मतदाता टैग’ को हटाने की मांग कर रहे थे |”

चूंकि यह वीडियो का इन्टरनेट पर २०१७ से उपलब्ध है जो इस बात की और संकेत देता है कि सोशल मंचों पर वायरल हो रहा यह वीडियो वर्तमान का नहीं है |

उपरोक्त वीडियो से संकेत लेते हुए हमने ‘गोलपारा डी वोटर २०१७’ जैसे कीवर्ड का इस्तेमाल करते हुए शोध किया, परिणामस्वरूप हमें द वायर और स्क्रॉल की खबरें मिलीं, जिनमें से दोनों में वीडियो का थोड़ा लंबा वर्शन उपलब्ध था | द वायर की खबर के मुताबिक पुलिस द्वारा राज्य (असम) में डी (संदिग्ध/डाउटफुल) -मतदाताओं की सूची में कई भारतीय नागरिकों को कथित रूप से शामिल किए जाने के विरोध में एक सार्वजनिक रैली के दौरान ३० जून २०१७  को असम के गोलपारा जिले में पुलिस गोलीबारी में एक २२ वर्षीय व्यक्ति याकूब अली की मौत हो गई | 

रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो को हुसैन अहमद मदनी नाम के व्यक्ति ने ३० जून २०१७ को शूट किया था | रिपोर्ट में लिखा गया है कि असम पुलिस और सीआरपीएफ के कर्मियों के साथ बहस कर रहे प्रदर्शनकारियों के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें पुलिस को उनके बैनर को फाड़ते हुए और फिर बिना किसी उकसावे के लाठीचार्ज का सहारा लेते हुए दिखाया गया है। पुलिस की कार्रवाई ने भीड़ को तितर-बितर किया। हालांकि कुछ स्थानीय युवकों ने पुलिस की कार्रवाई से नाराज होकर कुछ देर बाद उन पर पथराव शुरू कर दिया |

यह प्रदर्शन कथित तौर पर राज्य के मुसलमानों को ‘डी-वोटर’ होने का आरोप लगाकर राज्य द्वारा परेशान किए जाने के खिलाफ किया गया था | 

असम सरकार की वेबसाइट के अनुसार, ‘संदिग्ध मतदाता’ वे हैं जिनकी पहचान मतदाता सूची संशोधन के दौरान डी वोटर के रूप में की जाती है | उनके मामले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में लंबित हैं या ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किए गए हैं |

स्क्रॉल से बात करते हुए, एक राजनीतिक कार्यकर्ता मदनी ने कहा कि प्रदर्शनकारी यह कहते हुए नारे लगा रहे थे, “हम भारतीय मुस्लिम नागरिकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेंगे – इंकलाब जिंदाबाद।”

इसी घटना को उस समय असमिया समाचार संगठन प्राग न्यूज ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर कवर करते हुए प्रसारित किया था |

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त वीडियो के माध्यम से किये गये दावे को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर एक पुराने वीडियो को गलत दावों के साथ फैलाया जा रहा है |

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हमारे द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक को आप नीचे पढ़ सकते है :

1. सिलीगुड़ी में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनके भाषण में कहे “चोरी सम्बंधित” वक्तव्य को सन्दर्भ से बाहर फैलाया जा रहा है |

2. श्रीनगर में डल झील के किनारे अतिक्रमण हटाने के वीडियो को रोहिंग्याओं मुस्लिमों की अवैध बस्तियों को ध्वस्त करने का बता फैलाया जा रहा है|

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Title:असम के एक पुराने वीडियो को बांग्लादेशियों द्वारा अलग देश की मांग के रूप में फैलाया जा रहा है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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