क्या कर्नाटक कोर्ट ने हिजाब समर्थक याचिकाकर्ताओं का बचाव कर रहे वकील पर बैन लगा दिया? जानिये सच…

Communal False

यह वीडियो हिजाब विवाद पर हो रही कोर्ट की कार्यवाही का नहीं है। इसकी पुष्टि हमने कर्नाटक राज्य बार काउंसिल, बेंगलुरु के वरिष्ठ वकील से की है।

कोर्ट में चल रही कार्यवाही का एक वीडियो इंटरनेट पर काफी तेज़ी से साझा किया जा रहा है। उसमें एक जज वकिल को डांट रहे है। इस वीडियो को हाल ही में कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद से जोड़ा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक हाई कोर्ट में न्यायधीश ने हिजाब समर्थक याचिकाकर्ताओं का बचाव कर रहे एक मुस्लिम वकिल की प्रैक्टिस पर आजिवन बैन लगा दिया है।

वायरल हो रहे पोस्ट में लिखा है, “एक वरिष्ठ मुस्लिम वकील कर्नाटक हाई कोर्ट की बेंच को गुमराह करने की कोशिश करते भूल गया कि वह किस अदालत में बहस कर रहा। हिजाब पर याचिकाकर्ताओं का बचाव कर रहे इस वकील को कोर्ट ने आजीवन प्रैक्टिस पर बैन लगा दिया। कोर्ट ने उसके बहस करने के अंदाज पर टिप्पणी भी की, “जो हमसे इतनी जुबान लड़ा रहा, वह बाहर क्या करता होगा” और इसी बात पर उसे वकालत करने पर प्रतिबंध लगा दिया। यह ऐतिहासिक फैसला है,संदेश है कि वकील को तथ्यों पर बहस करनी होगी,ना के प्रभावों पर।“

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

सबसे पहले हमने यूट्यूब पर कीवर्ड सर्च कर इस वीडियो को ढूंढ़ने की कोशिश की। परिणाम में हमें इसका मूल वीडियो कर्नाटक उच्च न्यायालय के आधिकारिक चैनल पर 3 मार्च को प्रसारित किया हुआ मिला। 

इसमें आप 1.04.23 से आगे वायरल हो रहे वीडियो से संबन्धित भाग को देख सकते है। इसमें दी गयी जानकारी के मुताबिक यह कर्नाटक के उच्च न्यायालय के 3 तारिख सुबह 10.30 बजे शुरू हुई कोर्ट की कार्यवाही का लाइव प्रसारण है। 

आप नीचे इस वीडियो को देख सकते है।

इसको देखने पर हमें पता चला कि यह किसी प्रोपर्टी केस की कार्यवाही का वीडियो है। 

फिर हमने गूगल पर कीवर्ड सर्च कर हिजाब विवाद में चल रहे केस के बारे में थोड़ी जानकारी हासिल की। हमने पाया कि कर्नाटक उच्च न्यायालय में तीन न्यायाधीशों की पीठ हिजाब मामले में कार्यवाही कर रही थी। उसमें मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जे.एम खाजी शामिल थे।

इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने 15 मार्च को सुनवाई की। कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज करते हुये उन्होंने फैसला सुनाया कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य प्रथा के अंतर्गत नहीं आता है। उन्होंने यह भी फैसला सुनाया कि वर्दी पहनने पर प्रतिबंध उचित था और छात्र इसका विरोध नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि हेडस्कार्फ़ स्कूल की वर्दी का हिस्सा नहीं था।

आपको बता दें कि अब हिजाब मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ कर्नाटक के मुस्लिम छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उडुपी के छह मुस्लिम छात्रों ने इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

इससे हमें यह समझ आया कि वायरल हो रहे वीडियो में दो न्यायाधीशों की पीठ कोर्ट की कार्यवाही कर रही है, जबकी हिजाब मामले में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की है। दूसरी तरफ वायरल हो रहा वीडियो 3 मार्च का है। और हिजाब विवाद मामले में 25 फरवरी के बाद 15 मार्च को मामले की सुनवाई हुई है। 

इससे हमने अनुमान लगाया कि यह वीडियो हिजाब मामले की कोर्ट की कार्यवाही का नहीं है।

इसके बाद फैक्ट क्रेसेंडो ने बेंगलुरु के वरिष्ठ एडवोकेट सदाशिव रेड्डी वाई आर से संपर्क किया। हमने उनसे इस वीडियो के बारे में जानकारी ली। उन्होंने हमें बताया कि “इस वीडियो में जो कार्यवाही बतायी जा रही है उस समय मैं भी वही मौजूद था। यह कार्यवाही हिजाब मामले की नहीं है, यह बिलकुल अलग मामले की कार्यवाही का वीडियो है। जो मामले पर चर्चा हो रही थी, बिलकुल उसी से मिलते- जुलते मामले को मुख्य न्यायाधीश ने योग्यता के आधार पर बर्खास्त किया था। और वहाँ मौजूद वकील ने वैसे ही केस पर याचिका दायर की व उस पर चर्चा कर रहा था और इसलिये मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें डांटा। बार काउंसिल के अध्यक्ष को बुलाने का आदेश दिया और उस वकील की प्रैक्टिस को प्रतिबंध करने का आदेश दिया। परंतु अगले दिन उस वकील ने क्षमा याचिका दी और इस वजह उनपर की गयी कार्यवाही रोकी गयी।“


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निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया कि वायरल हो रहे वीडियो के साथ किया गया दावा गलत है। इस वीडियो में दिख रही कोर्ट की कार्यवाही हिजाब विवाद से संबन्धित नहीं है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिजाब के समर्थन में आए याचिकाकर्ताओं का बचाव कर रहे वकील पर प्रैक्टिस करने पर बैन नहीं लगाया।

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Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False