जम्मू कश्मीर में हिंसा का पुराना वीडियो वर्तमान में मुहर्रम जुलुस को रोकने के नाम से साझा किया जा रहा है |

False National Political
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९ सितम्बर २०१९ को “Firoz official” नामक एक फेसबुक यूजर ने एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसके शीर्षक में लिखा गया है कि “कश्मीर के ताजा हालात। मुहर्रम के जुलूस को रोकने का प्रयास किया जा रहा है |” इस विडियो को सोशल मीडिया पर काफी तेजी से साझा किया जा रहा है और साथ ही यह दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो कश्मीर की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है, जिसमे पुलिस लाठी चार्ज करते हुए मुहर्रम के जुलुस को रोकने का प्रयास कर रही है | फैक्ट चेक किये जाने तक यह वीडियो लगभग ३००० व्यूज प्राप्त कर चुका था |

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

अनुसन्धान से पता चलता है कि..

जाँच की शुरुआत हमने गूगल पर २०१९ मुहर्रम की तारीख ढूँढने से की, परिणाम से हमें पता चलता है कि २०१९ में १० सितंबर को मुहर्रम मनाया गया था, गौर करने की बात यह है कि यह वीडियो ९ सितंबर को अपलोड किया गया था जो कि मुहर्रम से एक दिन पहले का है जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये वीडीयो २०१९ मुहर्रम का नहीं है |

इसके पश्चात हमने इस वीडियो को यूट्यूब पर “Muharram Kashmir Muslim police AP” जैसे कीवर्ड्स का इस्तेमाल करते हुए ढूँढा | परिणाम से हमें ३१ जुलाई २०१५ को AP Archive द्वारा अपलोड किया गया वीडियो मिला, इस वीडियो के शीर्षक में लिखा गया है कि “धार्मिक जुलूसों में हिस्सा लेने वाले मुसलमानों को खदेड़ने के लिए पुलिस आंसू गैस का इस्तेमाल करती हुई देखी जा सकती है |” इस वीडियो के विवरण में लिखा गया है कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने बुधवार को भारतीय कश्मीर में धार्मिक जुलूसों में भाग लेने वाले सैकड़ों मुसलमानों को तितर-बितर करने के लिए बैटन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया | मोहर्रम पर होने वाले समारोहों को रोकने के लिए अधिकारियों ने श्रीनगर के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया था ताकि इससे भारत विरोधी विरोध प्रदर्शन न हो |

इसके पश्चात हमने २०१५ मुहर्रम की तारीख को ढूँढा, परिणाम से हमें पता चलता है कि २०१५ को २४ अक्टूबर को मुहर्रम था | इससे यह पता चलता है कि यह वीडियो २०१५ में हुए मुहर्रम से पहले का है जब कश्मीर में धार्मिक जुलूसों में भाग लेने वाले सैकड़ों मुसलमानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों ने डंडों व आंसू गैस का इस्तेमाल किया था |

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | यह वीडियो ४ साल पुराना है,और इस वीडियो का २०१९ या २०१५ के मुहर्रम के साथ कोई संबंध नही है क्योंकि यह वीडियो २०१५ के मुहर्रम से पहले लिया गया था is कारण से ये वीडीयो २०१९ का हो ही नही सकता | वीडियो २०१५ का जब पुलिस ने आंसू गैस का उपयोग करते हुए लोगों को धार्मिक जुलूसों में भाग लेने से रोकने का प्रयास किया था |

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Title:जम्मू कश्मीर में हिंसा का पुराना वीडियो वर्तमान में मुहर्रम जुलुस को रोकने के नाम से साझा किया जा रहा है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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