शाहीन बाग़ विरोध स्थल पर दिल्ली पुलिस ने १५ जनवरी २०२० के सुबह ३ बजे ‘कार्रवाई’ नहीं की थी |

False National Political
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देशभर में CAB और NRC से सम्बंधित आंदोलन चल रहे है, जिसके चलते सोशल मीडिया पर “फेकू जी” नामक एक फेसबुक पेज द्वारा एक लाइव वीडियो काफी चर्चा में है | इस वीडियो को १ मिलियन से ज्यादा लोगों ने देखा है और ६०००० से ज्यादा लोगों ने शेयर किया है | इस वीडियो के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने जनवरी १५ २०२० की देर रात को शाहीन बाग़ विरोध स्थल पर एक ‘कार्रवाई’ की थी |

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि “आधी रात को चोर की तरह शाहीन बाग़ पहुंची दिल्ली पुलिस, फिर ऐसा हुआ कि उल्टे पैर भागना पड़ा |”

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक

अनुसंधान से पता चलता है कि..
जाँच की शुरुवात हमने दिल्ली के शाहीन बाग़ में दिल्ली पुलिस द्वारा हाल ही में की गई कार्यवाही की ख़बरों को ढूँढा, परन्तु परिणाम से हमें कोई पुख्ता खबर प्राप्त नही हुई |

इस वीडियो पर हमें “लाइव टीवी” का लोगो दिखा, जिसके माध्यम से हमने यूट्यूब पर लाइव टीवी द्वारा अपलोड किये गये वीडियो को ढूँढा | इस वीडियो को १५ जनवरी २०२० को “शाहीन बाग़ ” के नाम से अपलोड किया गया था |

फैक्ट क्रेस्सन्डो ने लाइव टीवी को ई-मेल के माध्यम से संपर्क कर इस वीडियो के लोकेशन के बारें में पूछा, उन्होंने हमें जवाब में कहा कि “वीडियो हमें एक स्थानीय दिल्ली निवासी ने भेजा था, जिसमें दावा किया गया था कि वीडियो खजुरी, शाहीन बाग़ दिल्ली में शूट किया गया था |”

वीडियो को ध्यान से देखने पर हमें “जगतपुरी” लिखा हुआ डायरेक्शन बोर्ड नगर आया | जब हमने शाहीन बाग़ से जगतपूरी का फासला देखा तो पाया की यह दोनों जगह लगभग २० किलोमीटर दूर है, जिसे तय करने के लिए १ घंटे से ज्यादा समय लगता है, ये फ़ासला इस वीडियो को संदेह के घेरे में ले आता है क्योंकि अगर ये वीडियो जगतपुरी का है (जैसा की वीडियो में देखा गया है) तो फिर इसको शाहीन बाग़ का बता क्यों फैलाया जा रहा |

इसके पश्चात हमने गूगल सर्च पर “मुस्लिम कैंप दिल्ली पुलिस क्रैकडाउन नाईट ३” जैसे कीवर्ड्स के माध्यम से इस वीडियो से संबंधित खबरों को ढूँढा | परिणाम में हमें मिल्लत टाइम्स की एक खबर मिली | खबर के शीर्षक में लिखा गया है कि “खुरेजी विरोध स्थल पर दिल्ली पुलिस का देर रात में आतंक”, इस खबर में दिए गये विवरण और तस्वीर, वायरल वीडियो से काफी मिलते जुलते हैं |

आर्काइव लिंक 

इसके पश्चात् हमने गूगल मैप्स पर यह ढूँढा की खुरेजी खास और जगतपुरी के बीच कितना अंतर है, जिससे हमने पाया कि ये जगहें दो किलोमीटर से भी कम अंतर में हैं | यह मानते हुए कि जगत पुरी के निर्देशों के साथ साइन बोर्ड होने की संभावना शाहीन बाग़ की तुलना में खुरेजी ख़ास की अधिक है, इस सम्भावना से हमने अपनी खोज को सीमित कर दिया |

अधिक दूंढने पर हमें यह वीडियो फेसबुक पर “खालिद सैफी” नामक यूजर के प्रोफाइल में प्राप्त हुआ, इस लाईव वीडियो को १५ जनवरी सुबह ३:०३ मिनट पर फेसबुक पर लाईव किया गया था |

आर्काइव लिंक

खालिद सैफी यूनाइटेड अगेंस्ट हेट नामक संस्था के सह संस्थापक है | यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के फेसबुक पेज ने खालिद सैफी के लाइव वीडियो को साझा करते हुए अपने शीर्षक में लिखा है कि “खुरेजी विरोध में पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई” |

फैक्ट क्रेस्सन्डो ने खालिद सैफी से संपर्क किया, उन्होंने हमें बताया कि “१५ जनवरी २०२० की सुबह ३ बजे, मैं खुरेजी ख़ास से लाइव गया था | यह वीडियो वहीँ का है | खुरेजी ख़ास में CAB और NRC के विरुद्ध शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन चल रहे थे | प्रदर्शन के स्थल से मुझे एक प्रदर्शनकारी का कॉल आया था जिसमें उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर लगी लाइटों को बंद कर दिया गया था और पुलिस तंबू तोड़ने की कोशिश कर रही थी | मैं कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा और मैंने फेसबुक पर लाइव जाकर इस घटना को लोगों तक पंहुचाया|” 

खालिद सैफी ने फैक्ट क्रेस्सन्डो को एक एक्सक्लूसिव वीडियो (Exclusive Video) के माध्यम से अपनी बात स्पष्ट की कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो दिल्ली के खुरेजी ख़ास इलाके से है ना की शाहीन बाग़ से, इस वीडियो को गलत तरीके से शाहीन बाग़ में दिल्ली पुलिस द्वारा किये गये कार्यवाही के नाम से फैलाया जा रहा है |

निष्कर्ष: तथ्यों के जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो शाहीन बाग़ में दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही का नही है बल्कि यह घटना १५ जनवरी २०२० को सुबह ३ बजे खुरेजी खास नामक क्षेत्र से है |

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Title:शाहीन बाग़ विरोध स्थल पर दिल्ली पुलिस ने १५ जनवरी २०२० के सुबह ३ बजे ‘कार्रवाई’ नहीं की थी |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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