फरीदकोट (पंजाब) के जी.जी.एम.सी अस्पताल के स्टोर में रखे बिगड़े हुये वेंटिलेटरों की तस्वीर को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

Coronavirus False
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देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते देश भर के अस्पताल बेड, ऑक्सीजन व वेंटिलेटरों की काफी किल्लत से जूझ रहे है, इन सब के बीच इंटरनेट इनसे सम्बंधित कई गलत व भ्रामक खबरें वायरल होती चली आ रही है। वर्तमान में वेंटिलेटरों से सम्बंधित कुछ तस्वीरें इंटरनेट पर इस दावे के साथ वायरल हो रही है कि पी.एम केयर फंड द्वारा भेजे गये वेंटिलेटर/ ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर पंजाब स्थित फरीदकोट के जी.जी.एम.सी अस्पताल के स्टोर रुम में धूल खाते पड़े हुये है व राज्य सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं है। तस्वीर में आप बड़ी संख्या में वेंटिलेटर देख सकते है। 

वायरल हो रही तस्वीर के शीर्षक में लिखा है

बीमार मर रहे हैं पर ये वेंटिलेटर/कंसन्ट्रेटर जो पी.एम केयर फंड से भेजे गये थे, जी.जी.एम.सी फ़रीदकोट,पंजाब के स्टोर रूम में पड़े-पड़े धूल खा रहे हैं क्योंकि पंजाब की कोंग्रेस सरकार अभी उन गुंडों और दलालों को प्रोटेक्शन देने में व्यस्त है जो पिछले कई महीनों से किसानों के भेष में उत्पात मचा रहे हैं।  शालिनी कपूर, भाजपा।

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अनुसंधान से पता चलता है…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान पाया कि वायरल हो रहा दावा गलत है। फरीदकोट (पंजाब) के जी.जी.एम.सी अस्पताल के स्टोर रुम में बिगड़े हुये वेंटिलेटरों को रखा गया है व इस बारे में पंजाब सरकार द्वारा क्रेंद्रीय सरकार को सूचना दी गई है।

जाँच की शुरुवात हमने वायरल हो रही तस्वीर को गूगल रीवर्स इमेज सर्च कर की, परिणाम में हमें यही तस्वीर फ्री प्रेस जर्नल द्वारा इस वर्ष 12 मई को प्रकाशित किये गये समाचार लेख में मिली। समाचार लेख के मुताबिक इन वेंटिलेटरों को एक रूम में रख दिया गया था क्योंकि उन्हें इस्तेमाल करने के तुरंत बाद उनमें खराबी पायी गयी थी। अगवा हेल्थकेयर द्वारा पीएम केयर फंड के तहत पंजाब के फरीदकोट स्थित गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज में आपूर्ति किए गए 80 वेंटिलेटरों में से 71 दोषपूर्ण पाये गये थे।

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इस खबर की अधिक जानकारी पाने के लिये इंडिया टुडे (आर्काइव लिंक) द्वारा प्रकाशित समाचार लेख भी पढ़ सकते है।

इसके पश्चात हमने उपरोक्त खबर से सम्बंधित और अधिक जाँच की तो हमें ए.एन.आई द्वारा इस वर्ष 12 मई को किये गये कुछ ट्वीट मिले जिनमें उन्होंने बिगड़े हुये इन वेंटिलेटरों की खबर की पूरी जानकारी दी है। 

ए.एन.आई ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट के वाइस- चान्सेलर डॉ. राज बहादुर से संपर्क किया व उन्होंने कहा कि, “हमें पी.एम केयर फंड के तहत 82 वेंटिलेटर दिए गए। इन 82 वेंटिलेटरों में से, 62 शुरुआत से काम करने की स्थिति में नहीं थे क्योंकि ये अच्छी गुणवत्ता के नहीं हैं। आज, हमारे पास काम करने की स्थिति में केवल 42 वेंटिलेटर हैं।

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जिसके बाद इस वर्ष 11 अप्रैल को पंजाब स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य को प्रदान किए गए वेंटिलेटरों के विषय में पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने लिखा है, “पंजाब को 809 वेंटिलेटर आवंटित किए गए थे, उनमें से केवल 558 वेंटिलेटर स्थापित किए गए जबकि 251 इंस्टॉलेशन लंबित हैं।

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तदनंतर 1 मई को, पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को पीएम केयर फंड के तहत राज्य को प्रदान किए गए 809 वेंटिलेटर के मुद्दे पर पत्र लिखा था कि वेंटिलेटर स्थापित नहीं किये जा रहे है और उनमें खराबी है।

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तत्पश्चात आखिरी में फैक्ट क्रेसेंडो ने पंजाब के मुख्यमंत्री के दफ्तर में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव हुसन लाल से संपर्क किया तो उन्होंने हमें बचाया कि, 

वायरल हो रही खबर गलत व भ्रामक है। पी.एम केयर फंड से तस्वीर में दिख रहे वेंटिलेटर हमारे पास आये थे कुछ वेंटिलेटर स्थापित नहीं किये गये और कुछ वेंटिलेटर स्थापित किये गये थे पर उनमें खराबी होने की वजह वे ठीक काम नहीं कर रहे थे। जब इन वेंटिलेटरों को ठीक करने के लिये इंजिनियर आये तो उन्होंने पाया कि इन वेंटिलेटर के कुछ स्पेयर पार्ट खराब है। इसके बाद हमने इस परेशानी का हल निकालने के लिये केंद्रीय मंत्रालय से संपर्क किया तो उन्होंने इन वेंटिलेटरों को ठीक करने के लिये उनकी एक टीम भेजी है। वर्तमान में वह टीम वेंटिलेटरों की खराबी को ठीक कर रही हैं।

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया कि उपरोक्त दावा गलत है। पंजाब के फरीदकोट के जी.जी.एम.सी अस्पताल के स्टोर रुम में बिगड़े हुये वेंटिलेटर रखे हुये है जिसकी सम्बंधित सूचना पंजाब सरकार द्वारा क्रेंद्रीय सरकार को दी गई थी व इनको ठीक करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय द्वारा एक टीम पंजाब भेजी गई है

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. पुराने व असम्बंधित वीडियो के संकलन को वर्तमान पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं के पलटवार का बता भ्रामकता फैलाई जा रही है।

२. पिछले वर्ष बांगलादेश के चटगांव में एक महिला पर हुये हमले को वर्तमान बंगाल हिंसा से जोड़कर वायरल किया जा रहा है

३. नाक में नींबू का रस डालने से COVID19 (कोरोना वायरस) ठीक नहीं होता है।

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Title:फरीदकोट (पंजाब) के जी.जी.एम.सी अस्पताल के स्टोर में रखे बिगड़े हुये वेंटिलेटरों की तस्वीर को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False


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