
आज हमारे देश में स्मार्टफोन, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ने जिंदगी को आसान बना दिया है। भारत सरकार के अनुसार अब देश के 86 प्रतिशत से ज़्यादा घर इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। लेकिन इस बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन ठगी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
हाल ही में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड्स पर एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट बताती है कि 2022 में जहां 10.29 लाख साइबर घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 22.68 लाख तक पहुंच गई।
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार फरवरी 2025 तक दर्ज मामलों में करीब 36.45 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की रिपोर्ट की गई है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिनके पैसे और निजी जानकारी दोनों चोरी हो गए।
ऐसे स्कैम कैसे होते हैं?
इसका सबसे आम तरीका है ‘स्पूफिंग’ (spoofing)। इसमें ठग खुद को किसी भरोसेमंद कंपनी या बैंक का कर्मचारी बताकर कॉल या मैसेज करता है। संदेश देखने में असली लगता है, जिसमें लिंक या वेरिफिकेशन की बात होती है। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता है, उसकी निजी जानकारी ठगों के पास चली जाती है।
दूसरा तरीका है ‘फिशिंग’ (phishing), जिसमें ठग नकली ईमेल या ऐप के जरिए लोगों से पासवर्ड, OTP या बैंक की जानकारी निकलवाते हैं। हाल के समय में ठग UPI सिस्टम को भी निशाना बना रहे हैं। वे मोबाइल नंबर और पेमेंट ऐप के जरिए पैसे उड़ा लेते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन गेमिंग और इनवेस्टमेंट ऐप्स के नाम पर बड़े रिटर्न का झांसा देकर भी लोगों से पैसे ठगे जा रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने अब तक लाखों फर्जी सिम कार्ड और डिवाइस IMEI ब्लॉक किए हैं। साथ ही साइबर अपराधों की जांच और कार्रवाई के लिए इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और CERT-In जैसी संस्थाएं बनाई गई हैं।
सरकार ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल भी शुरू किया है, जहां कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज कर सकता है। वित्तीय साइबर ठगी के पीड़ित 1930 हेल्पलाइन नंबर पर भी मदद पा सकते हैं। आने वाले बजट में साइबर सुरक्षा के लिए 782 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

स्कैम से कैस बचे?
डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। कोई भी लिंक, मैसेज या ऐप खोलने से पहले सोचें। किसी अनजान कॉल या व्यक्ति को OTP या पासवर्ड न दें।
अगर कोई “जल्दी अमीर बनने” का ऑफर दे रहा है, तो समझ जाइए कि यह एक जाल है। भरोसा हमेशा सिर्फ आधिकारिक वेबसाइटों और ऐप्स पर ही करें।
अगर हम जागरूक रहेंगे और सोच-समझकर डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करेंगे, तो यह तकनीक हमारे लिए वरदान बनेगी, न कि नुकसान का कारण।


