COVID-19 प्रतिबंध के पश्चात बॉर्डर खुलने पर अफगानी नागरिकों का अपने देश में प्रवेश करने के पुराने वीडियो को वर्तमान तालिबान से जोड़ साझा किया जा रहा है |

False International
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तालिबान का अफ़ग़ानिस्तान पर काबिज़ होने के पश्चात इस सन्दर्भ में सोशल मीडिया पर कई भ्रामक तस्वीरें और वीडियो फैलाये जा रहे हैं, पूर्व में भी ऐसे भ्रामक दावों का फैक्ट-चेक कर उनकी प्रमाणिकता फैक्ट क्रेसेंडो अपने पाठकों तक पहुँचाता रहा है | 

जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, लाखों अफगानी नागरिक इस युद्धग्रस्त देश से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। कई लोग पैदल ही पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान और ताजिकिस्तान में बॉर्डर पार कर घुसने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान में अफ़ग़ानिस्तान की अचानक से बदली हुई सत्ता और वहां के नागरिकों की ह्रदय-विदारक अवस्था को दर्शाते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर नज़र आ रहे है जो अफ़ग़ानिस्तान के नागरिकों की असहाय और लाचार अवस्था को दिखाते है |

इसी क्रम में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जिसमें सैकड़ों लोगों को एक गेट की तरफ भागते हुए देखा जा सकता है को इस दावे के साथ साझा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने कुछ देर के लिए अपने बॉर्डर के गेट खोल दिए है जिसके बाद सैकड़ों के संख्या में अफगानी शरणाथी पाकिस्तान में शरण पाने के लिए भाग रहे है | इस वीडियो में हम इस गेट पर पाकिस्तान का झंडा लगे देख सकते है |

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि 

“कुछ देर के लिए पाकिस्तान अफ़गानिस्तान बॉर्डर पर पाकिस्तान अधिकारियों ने कुछ समय के लिए अपना बॉर्डर खोल दिया अब यह नजारा देखें और इसमें उनकी औरतें और लड़कियां बच्चे सब उग्रवादियों को देकर भाग रहे हैं | 1990 में कश्मीरी हिंदुओं के साथ जैसा मुसलमानों ने करा था आज उनके साथ वैसा ही हो रहा है |”

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक 

अनुसन्धान से पता चलता है कि… 

फैक्ट क्रेसेंडो ने शोध कर जाँच में पाया की वायरल वीडियो वर्तमान का नहीं बल्कि अप्रैल २०२० से है जिस वक़्त पाकिस्तान ने कोरोनावायरस के प्रतिबंध के चलते बंद तोरखम बॉर्डर खोला था और सैकड़ों फंसे अफगानी नागरिक उस गेट से अफ़ग़ानिस्तान की तरफ भागे थे |

जाँच की शुरुवात हमने इस वीडियो को इनविड वी वेरीफाई टूल की मदद से छोटे-छोटे कीफ्रेम्स में तोड़कर व गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने से की, जिसके परिणाम में हमें यह वीडियो द टेलिग्राप द्वारा ८ अप्रैल २०२० को अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध मिला | इस वीडियो के शीर्षक में लिखा गया है कि “अधिकारियों द्वारा कोरोनावायरस प्रतिबंध हटाने के बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर लगी हजारों की भीड़ |” 

इस वीडियो के विवरण के अनुसार यह वीडियो खैबर पास के पास तोरखम सीमा पार करने का है, जिसमें अफगानों की बड़ी भीड़ को भागते हुए दिखाया गया है |  वीडियो में दिखाया गया है कि कोरोनावायरस प्रतिबंधों के तहत दो सप्ताह से अधिक समय तक सीमा बंद रहने के बाद अफगानी नागरिक पाकिस्तान से घर वापस आ रहे हैं। वे कागजी कार्रवाई की जांच करने और क्वारंटाइन को लागू करने के आधिकारिक प्रयासों से बचकर निकलने के लिए गेट से भाग रहे थे |

आगे हमने तोरखम बॉर्डर को गूगल मैप्स पर ढूंढा जहाँ हमें इस बॉर्डर के कई तस्वीरें नज़र आयी | 

Google Maps

इन तस्वीरों की हमने द टेलीग्राफ द्वारा प्रसारित वीडियो के स्क्रीनग्रैब के साथ तुलना की, नीचे आप यह तुलनात्मक तस्वीर देख सकते है |

हमने २०२० के वीडियो व अब वायरल हो रहे दावे के वीडियो के स्क्रीनग्रैब की तस्वीरों का तुलनात्मक विश्लेषण किया, जिसमे आप दोनों वीडियो की समानताएं नीचे देख सकतें हैं|

इस वीडियो को ८ अप्रैल २०२० को बी.बी.सी न्यूज़ उर्दू ने इस वीडियो को अपने ट्विटर अकाउंट से साझा करते हुए लिखा है कि “पाकिस्तान ने कोरोनावायरस के चलते अपनी सभी सीमाएं बंद कर दी थी | सरकार ने बाद में ६ अप्रैल से ९ अप्रैल तक तोरखम सीमा खोलने की घोषणा की, जिसके चलते तोरखम गेट को अचानक से खोल दिया गया और अनुमानतः ८,००० से १०,००० अफगान नागरिकों ने बिना किसी अप्रवास के देश (अफ़ग़ानिस्तान) में प्रवेश किया।” इस खबर को “द डौन” ने भी उस समय प्रकाशित किया था |

आर्काइव लिंक

तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़े से संबंधित अन्य फैक्ट चेक को आप नीचे पढ़ सकते है |

निष्कर्ष:

तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त वीडियो के माध्यम से किये गए दावों को गलत पाया है | वायरल वीडियो वर्तमान का नहीं बल्कि अप्रैल २०२० का है जिस वक़्त पाकिस्तान ने कोरोनावायरस के प्रतिबंध के चलते बंद तोरखम बॉर्डर खोला था और सैकड़ों फंसे अफगानी नागरिक उस गेट से अफ़ग़ानिस्तान की तरफ भागे थे | इस वीडियो का वर्तमान में अफ़ग़ानिस्तान में युद्धग्रस्त अवस्था से बचकर भागने वाले नागरिकों से कोई संबंध नहीं है |

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. असम के एक पानी पूरी विक्रेता द्वारा पानी में मूत्र मिलाने के प्रकरण को फर्जी सांप्रदायिक रंग दे सोशल मंचों पर फैलाया जा रहा है।

२. पूर्व न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नाम से फिरसे बना फर्जी अकाउंट जिससे सांप्रदायिक ट्वीट किये गये|

३. बिहार के कटिहार में मुर्हरम जुलूस के दौरान घटी मारपीट की घटना को हिन्दू-मुस्लिम कोण दे सांप्रदायिकता से जोड़ साझा किया जा रहा है|

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Title:COVID-19 प्रतिबंध के पश्चात बॉर्डर खुलने पर अफगानी नागरिकों का अपने देश में प्रवेश करने के पुराने वीडियो को वर्तमान तालिबान से जोड़ साझा किया जा रहा है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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