क्या महुआ मोइत्रा द्वारा लोकसभा में दिया गया भाषण किसी और के लेख से चुराया है?

False National Political
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Photo Credit- BBC

३ जुलाई २०१९ को अविनाश श्रीवास्तव नामक एक फेसबुक यूजर ने एक तस्वीर पोस्ट की | तस्वीर के शीर्षक में लिखा गया है कि “यही है अमेरिकी वेब्सायट का वो लेख जिसे तृणमूल कांग्रेस की सांसद ‘महुआ मोइत्रा’ ने चुराकर लोक सभा में अपने भाषण में इस्तेमाल कर लिया | हुबहू बिलकुल वही शब्द लेख से सीधे उठा लिए और बोल दिए | संसद की गरिमा ख़तरे में है। और फिर यहाँ की लुट्येन दलाल मीडिया ने उसी चोरनी के भाषण में कसीदे पढ़े | #चोरनीइस शीर्षक के साथ एक तस्वीर भी साझा की गई है | तस्वीर में हम फासीवाद के १२ शुरुआती चेतावनी संकेत की सूचि देख सकते है | सूचि में लिखा गया है कि यह संकेत की सूचि मार्टिन लांगमैन नामक किसी व्यक्ति ने ३१ जनवरी २०१७ को लिखी है | 

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा मंगलवार २५ जून २०१९ को लोकसभा में किया गया पहला ही भाषण इंटरनेट पर तूफान ले आया | मोइत्रा ने पहली बार एक भाषण दिया जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला किया | मोइत्रा ने देश में असंतोष और ”फासीवाद’ के संकेतों’ की बात की | संसद में उनके १० मिनट के लंबे भाषण की सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रशंसा की | 

इस भाषण के संदर्भ में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि महुआ मोइत्रा के भाषण में इस्तेमाल किये गए शब्द इसके पहले दुसरे किसी द्वारा लिखे गए है और उसे “चोरी” किया गया था | साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि ऐसे लोगों के वजह से संसद की गरिमा खतरे में है | यह तस्वीर व दावा सोशल मीडिया पर काफ़ी तेजी से साझा किया जा रहा है |

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक | HuffPost | आर्काइव लिंक 

आइए अब महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए उस भाषण को सुनते है |

क्या वास्तव में संसद में महुआ मोइत्रा द्वारा किया गया भाषण किसी और के लेख से चुराया गया है | हमने इस तस्वीर और दावें की सच्चाई जानने की कोशिश की |

संशोधन से पता चलता है कि…

सोशल मीडिया पर इस दावे के बारे में ढूँढने पर हमें ट्विटर पर सुधीर चौधरी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट द्वारा किया गया यही ट्वीट मिला | सुधीर चौधरी ज़ी न्यूज़ के मुख्य संपादक है | ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि “यही है अमेरिकी वेब्सायट का वो लेख जिसे तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने चुराकर लोक सभा में अपने भाषण में इस्तेमाल कर लिया।हुबहू बिलकुल वही शब्द लेख से सीधे उठा लिए और बोल दिए।संसद की गरिमा ख़तरे में है |” साथ ही ज़ी न्यूज़ द्वारा प्रसारित खबर का लिंक भी दिया है | ट्वीट में दो तस्वीरें भी साझा की गई है | तस्वीर में हम फासीवाद के १२ शुरुआती चेतावनी संकेत की सूचि देख सकते है और उन पॉइंट को देख सकते है जिनका महुआ मोइत्रा ने उल्लेख किया है |

आर्काइव लिंक 

ज़ी न्यूज़ द्वारा प्रसारित खबर में सुधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि सांसद के भाषण को २०१७ के एक लेख से नकल किया गया है जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिका में “फासीवाद के १२ शुरुआती चेतावनी संकेतों” के बारे में बात की गई थी | महुआ मोइत्रा के भाषण ने ‘ट्रम्प’ शब्द को ‘मोदी’ से बदल दिया गया है, कैमरे में उक्त लेख का एक प्रिंटआउट रखते हुए पत्रकार ने यह बात कही | 

आर्काइव लिंक 

वायरल छवि में कागज के टुकड़े पर लेख के लेखक का नाम – मार्टिन लांगमैन है | इस खबर को ढूँढने पर हमने पाया कि ३१ जनवरी २०१७ को, वॉशिंगटन मंथली में प्रकाशित खबर में लांगमैन द्वारा वास्तव में इस तरह का एक लेख प्रकाशित किया गया था | लेखक ने कहा कि यह संकेत अमेरिकी होलोकॉस्ट म्यूजियम में एक पोस्टर पर लटका हुआ था |

वॉशिंगटन मंथली | आर्काइव लिंक 

इसके पश्चात हमने plagiarism शब्द को समझने की कोशिश की | लेकसिको ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी ने अनुसार plagiarism शब्द का मतलब “किसी इंसान का किसी और के काम या विचारों को लेने और उन्हें खुद का कहकर दावा करना |” है | यह स्पष्ट है कि मोइत्रा ने अपने ७ अलग-अलग चेतावनी संकेत को एक पहले से मौजूद सूची से लिया था, लेकिन क्या उन्होंने उन्हें अपने विचारों के रूप में पारित किया?

२५ जून २०१९ को, महुआ मोइत्रा ने अपना पहला संसदीय भाषण दिया, जहां उन्होंने भारत में विभिन्न “फासीवाद के शुरुआती संकेतों” को सूचीबद्ध किया | अपने संसदीय संबोधन के अंत में, सांसद ने संबोधन के पीछे अपनी प्रेरणा के सोर्स का उल्लेख किया था | नीचे दिए गए वीडियो में ९ मिनट २०  सेकंड पर उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि “In 2017, the United States Holocaust Memorial Museum put up a poster in its main lobby and it contained a list of all the signs of early fascism. Each of the seven signs I have pointed to you, features on that poster.”

हिंदी में अनुवाद- २०१७ में, संयुक्त राज्य अमेरिका के होलोकॉस्ट म्यूजियम ने अपनी मेन लॉबी में एक पोस्टर लगाया था और इसमें शुरुआती फासीवाद के सभी संकेतों की एक सूची दी गई थी | सात संकेतों में से प्रत्येक जो मैंने आपको इंगित किया है, उस पोस्टर पर उल्लेख की गई विशेषताएं हैं |”

नीचे दी गई वीडियो में, हमने उस भाग को क्रॉप करते हुए दिखाया है जहां वह अपने भाषण में शामिल विचारों के लिए श्रेय देते हुए दिखाई देती है |

इस बात का उल्लेख महुआ मोइत्रा ने उनके ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट करते हुए भी कहा “उन लोगों के लिए जो चुराए (plagiarized) भाषण के बारे में बात कर रहे हैं, मैंने स्पष्ट रूप से भाषण के श्रेय और सोर्स का उल्लेख किया है | यहाँ देखें |” साथ ही एक विडियो साझा  किया है |

आर्काइव लिंक

मार्टिन लोंगमैन ने अपने २०१७ के लेख में, उसी पोस्टर का उल्लेख किया था जिसके बारे में महुआ मोइत्रा ने बात की थी | हमें अमेरिकी वेबसाइट स्नोप्स द्वारा २०१७ के तथ्य-जांच में पाया गया था कि पोस्टर होलोकॉस्ट म्यूजियम में प्रदर्शन पर नहीं था, बल्कि इसकी उपहार की दुकान में उपलब्ध था | स्नोप्स ने लिखा है कि “सूची उपहार की दुकान में बिक्री के लिए थी, म्यूजियम में प्रदर्शन पर नहीं, और अब उस स्थान पर उपलब्ध नहीं है |” 

आर्काइव लिंक

सोशल मीडिया दावा किया जा रहा है कि महुआ मोइत्रा ने वाशिंगटन मंथली लेख से अपने भाषण को कॉपी-पेस्ट किया है | हमें Huffington Post द्वारा प्रकाशित खबर मिली | इस खबर में उन्होंने महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए भाषण को शब्दो में लिखा है | 

आर्काइव लिंक 

हमने महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए इस भाषण की प्रतिलेख की तुलना २०१७ में वाशिंगटन मंथली में प्रकाशित खबर के साथ की और पाया कि दोनों के बीच एकमात्र सामान्य विषय “फासीवाद के चेतावनी संकेत” थे, जो अमेरिका के होलोकॉस्ट म्यूजियम की सूची से प्रेरित थे | इस सूचि में लिखा गया है कि यह पोस्टर में लिखा गए विषय Laurence W. Britt नामक व्यक्ति द्वारा लिखा गया है | 

हमें एक लेख का अंश मिला जिसमें डॉ. ब्रिट ने फ़ैसिस्टवाद के १४ संकेतों के बारे में बताया | यह १५ जुलाई २००३ को फ्री इंक्वायरी मैगज़ीन, वॉल्यूम २२ नंबर २ में प्रकाशित हुआ था |

आर्काइव लिंक 

इस बात की पुष्टि वाशिंगटन मंथली लेख के लेखक मार्टिन लॉन्गमैन ने भी उनके ट्विटर अकाउंट से किया है | ट्वीट के माध्यम से उन्होंने लिखा है कि भारत के राजनीती के जुडी महुआ मोइत्रा पर साहित्यिक चोरी का आरोप गलत है और नाही उन्होंने उनके विचारों को चुराकर अपना कहकर प्रस्तुत किया है |

आर्काइव लिंक | आर्काइव लिंक 

इसके पश्चात हमने इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए महुआ मोइत्रा से संपर्क करने का कोशिश की, लेकिन हम प्रतिक्रिया पाने में असमर्थ रहे | उनसे वार्तालाप करते ही हम इस स्टोरी को अपडेट कर देंगे |

उन्होंने संसद के बाहर एएनआई से बात की, जहाँ उन्होंने वाशिंगटन मंथली लेख के लेखक मार्टिन लॉन्गमैन द्वारा किए गए ट्वीट को दोहराया, जहाँ मार्टिन लॉन्गमैन इस बात से इनकार किया कि मोइत्रा ने उनके काम को चुराया है | 

आर्काइव लिंक 

हम अपने पाठकों को यह अवगत कराना चाहते है कि मार्टिन लॉन्गमैन व महुआ मोइत्रा दोनों ने ही डॉ. ब्रिट के द्वारा लिखे गए एक लेख जो कि फ्री इन्क्वारी नामक मैगज़ीन में १५ जुलाई २००३ को प्रकाशित हुआ था, से प्रेरित थे | इस लेख में डॉ ब्रिट ने फ़ैसिस्टवाद के शुरुवाती १४ चिंग अंकित किये है जिन्हें फ़ैसिस्टवाद के शुरुवाती चेतावनी संकेतों में लिया जाता है | 

निष्कर्ष: तथ्यों के जांच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया | दावें अनुसार महुआ मोइत्रा ने किसी और का भाषण नहीं चुराया था उन्होंने साफ़ साफ़ उनके भाषण में अमेरिका के होलोकॉस्ट म्यूजियम में चिपकाए पोस्टर को उनके भाषण का सोर्स होने का उल्लेख किया था | 

Avatar

Title:क्या महुआ मोइत्रा द्वारा लोकसभा में दिया गया भाषण किसी और के लेख से चुराया है?

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •