सुभाष चंद्र बोस को नेहरू ने युद्ध अपराधी नहीं कहा; बनावटी पत्र वायरल

False Political

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम से सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हो रहा है | जिसमें जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1945 में तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली को पत्र लिखते है की,सुभाष चंद्र बोस को ‘युद्ध अपराधी’ है और रूसी क्षेत्र में प्रवेश कर रहे है | कृपया इस बात का ध्यान रखें और जो आपको उचित और उपयुक्त लगे वह करें।

दावा किया जा रहा है की, जवाहरलाल नेहरू ने 1945 में तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली को पत्र लिख कर सुभाष चंद्र बोस पर कार्रवाई करने की मांग की थी|

फेसबुक | आर्काइव

अनुसंधान से पता चलता है कि…

कीवर्ड सर्च करने पर पता चला कि वायरल पत्र जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखा नही है |

पहली नज़र में ही वायरल पत्र में दो स्पष्ट गलतियाँ सामने आती हैं।

पहली, पत्र में तत्कालीन प्रधानमंत्री का नाम क्लेमेंट ‘एट्टल’ (Attle) लिखा गया है, जो गलत है। सही नाम क्लेमेंट ‘एटली’ (Attlee) है। इसके अलावा, वे इंग्लैंड के नहीं बल्कि यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री थे।

दूसरी, पत्र पर 27 दिसंबर 1945 की तारीख दर्ज है, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को हो चुकी थी।

साथ ही, इस पत्र पर ‘राष्ट्रीय अभिलेखागार’ (National Archives of India) का कोई वॉटरमार्क नहीं है। इसलिए, इस पत्र को प्रामाणिक नहीं माना जा सकता।

आगे जाँच के दौरान हमें वायरल पत्र से मिलती-जुलती सामग्री वाला एक और पत्र मिला। इस पत्र पर राष्ट्रीय अभिलेखागार का वॉटरमार्क मौजूद है और इसमें अंग्रेज़ी भाषा का प्रयोग भी सही प्रतीत होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह पत्र वास्तव में असली है?

पत्रकार राहुल कंवल ने 23 जनवरी 2016 को यह पत्र ट्विटर पर साझा किया था। उन्होंने कैप्शन में लिखा था कि यह पत्र नेहरू के स्टेनोग्राफर द्वारा खोसला आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए गए शपथपत्र का हिस्सा है।

ट्विटर | आर्काइव

खोसला आयोग

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु की जाँच के लिए 1970 के दशक में खोसला आयोग का गठन किया गया था। नेहरू के स्टेनोग्राफर श्यामलाल जैन ने आयोग के समक्ष एक शपथपत्र दाखिल किया था, लेकिन आयोग ने उसे अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल नहीं किया। इसका मतलब यह है कि यह दावा गलत है कि यह पत्र खोसला आयोग की रिपोर्ट का हिस्सा था। (संदर्भ: बिज़नेस स्टैंडर्ड)

पत्रकारों, लेखकों और इतिहासकारों द्वारा प्रस्तुत प्रमाण

राहुल कंवल के ट्वीट के जवाब में पत्रकार रघु कर्नाड ने लिखा कि यह स्टेनोग्राफर की नोट खोसला आयोग से संबंधित नहीं है, बल्कि नेताजी के भतीजे प्रदीप बोस द्वारा वर्ष 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखे गए पत्र का हिस्सा है। इसका उल्लेख सरकार की ‘नेताजी पेपर्स’ वेबसाइट पर उपलब्ध फाइलों में भी मिलता है।

प्रदीप बोस द्वारा लिखी गई पुस्तक “Subhas Bose and India Today: A New Tryst with Destiny?” के पृष्ठ संख्या 277-278 पर श्यामलाल जैन द्वारा उल्लेखित नेहरू का यह कथित पत्र दिया गया है। जैन के दावे के अनुसार, नेहरू ने 26 या 27 दिसंबर 1945 को असफ अली के घर बुलाकर इंग्लैंड के प्रधानमंत्री के लिए यह पत्र लिखवाया था।

हालाँकि, इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने ट्विटर पर एक लेख साझा कर श्यामलाल जैन के इस दावे को गलत साबित किया। उन्होंने प्रमाणों के साथ बताया कि 26 से 29 दिसंबर 1945 के बीच नेहरू इलाहाबाद में थे, न कि नई दिल्ली में असफ अली के घर, जैसा कि जैन ने दावा किया था।

आर्काइव

इसके अलावा, द हिंदू अख़बार ने 24 जनवरी 2016 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में सुभाष चंद्र बोस के शोधकर्ता और लंदन स्थित पत्रकार आशिष रे के हवाले से बताया था कि नेहरू ने कभी भी नेताजी को युद्ध अपराधी बताने वाला कोई पत्र नहीं लिखा। आशिष रे ने कहा था, “कोलकाता में नेहरू-विरोधी और कथित बोस समर्थकों ने इस पत्र की एक बनावटी कहानी गढ़ी है। नेहरू ने ऐसा कोई पत्र कभी नहीं लिखा।”

द हिंदू | आर्काइव

निष्कर्ष

तथ्यों के जांच से यह स्पष्ट है कि, वायरल पत्र वास्तव में जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखा गया नहीं है। गलत दावे के साथ पत्र साझा किया जा रहा है।

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Title:सुभाष चंद्र बोस को नेहरू ने युद्ध अपराधी नहीं कहा; बनावटी पत्र वायरल

Fact Check By: Sagar Rawate 

Result: False