क्या स्वाथ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने चमकी बुखार को लाइलाज बीमारी घोषित किया?

False Medical Social
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२० जून २०१९ को “पटियाला टुडे” नामक एक फेसबुक पेज पर एक विडियो पोस्ट किया गया है | विडियो के शीर्षक में लिखा गया कि “*सूचनार्थ* आप सभी को सूचित किया जाता है कि फिलहाल *लीची* खाने से परहेज करेंअपने बच्चों को कदाचित *लीची* ना दें वरना चमकी बुखार से ग्रसित हो सकते हैफिलहाल अभी स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लाइलाज बीमारी घोषित कर दिया है | अतः जबतक इस वायरस का पूर्णतः रोकथाम नही हो जाता तबतक *लीची* के सेवन से दूर रहे |”

वायरल पोस्ट में दिखाए वीडियो में एक लीची के अंदर एक कीड़ा देखा जा सकता है | एक पुरुष हिंदी में चेतावनी देता है कि “लीची खाने से पहले सौ बार सोचें, ये कीड़े आपके बच्चे को बीमार कर देंगे” |

इस विडियो के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है चमकी बुखार नामक इस बीमारी को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा “लाइलाज” बीमारी घोषित कर दिया गया है | यह विडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी तेजी से साझा किया जा रहा है | फैक्ट चेक किये जाने तक यह पोस्ट ७७ प्रतिक्रियाएं प्राप्त कर चुकी थी | इस विडियो को १३०० व्यूज मिल चुकी है |

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव विडियो लिंक

क्या वास्तव में स्वाथ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने चमकी बुखार को लाइलाज बीमारी घोषित किया? हमने इस दावें की सच्चाई जानने की कोशिश की |

संशोधन से पता चलता है कि

जांच की शुरुआत हमने गूगल सर्च पर चमकी बुखार के बारें में जानकारी प्राप्त करने से की | परिणाम से हमें जागरण जोश द्वारा प्रकाशित खबर मिली | लेख में दी गयी जानकारी के अनुसार एन्सेफलाइटिस को आम तौर पर चमकी बुखार, असेप्टिक एन्सेफलाइटिस या अक्युट वायरल एन्सेफलाइटिस कहा जाता है | इस बीमारी को इसे मस्तिष्क में सूजन के रूप में परिभाषित किया गया है जिससे मस्तिष्क में सूजन या जलन हो सकती है |

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यूके के नेशनल हेल्थ सर्विस की वेबसाइट के अनुसार चमकी बुखार वायरस फैलने की वजह से होता है | इस वायरस को “वायरल एन्सेफलाइटिस” के रूप में जाना जाता है | कई केस में ऐसा देखा गया है कि एन्सेफलाइटिस बैक्टीरिया, कवक या परजीवी के कारण होता है | यहाँ कहीं भी ऐसा नहीं कहा गया है कि चमकी बुखार लीची में मौजूद कीड़े के प्रभाव से होता है |

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चमकी बुखार के बारें में ढूँढने पर हमने पाया कि, मुज़फ़्फ़रपुर से इस साल बच्चों की मौत की खबरें आईं, कई अखबारों ने लीची को मौतों से संबंधित रिपोर्ट दी है | मुज़फ़्फ़रपुर अपने लीची के बागों के लिए प्रसिद्ध है और इस समय इस क्षेत्र में रसीले लाल फलों की कटाई की जा रही है | सरकारी रिपोर्टों के अनुसार १९९५ से लगभग हर साल, इस समय के दौरान मुज़फ़्फ़रपुर में एन्सेफलाइटिस से मौतें हो रही हैं |

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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारक वेबसाइट पर हमें एन्सेफलाइटिस या चमकी बुखार से संबंधित ५ प्रेस विज्ञप्ति मिली | यह पाँचों प्रेस विज्ञप्ति जून २०१९ में जारी की गयी है |

१९ जून २०१९ को, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने उन परिवारों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफ़ाइल पर चर्चा की है, जिन्होंने इस रोज की रिपोर्ट की है, उनके पोषण प्रोफाइल, चल रहे हीटवेव जैसे मुद्दे, मरने वाले बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया के उच्च प्रतिशत की सूचना देते हैं |

इस प्रेस विज्ञप्ति में यह भी लिखा गया है कि “स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय एन्सेफलाइटिस या चमकी बुखार के विकास को रोकने के लिए भोजन में ग्लूकोज के साथ पौष्टिक भोजन के वितरण के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय के साथ समन्वय कर रहा है |”

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अगली प्रेस विज्ञप्ति  १७ जून २०१९ को जारी की गई | लिखा गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एक और हाई लेवल मल्टी स्पेशलिटी टीम को बिहार भेजने का निर्देश दिया है | इस विज्ञप्ति में ज़्यादातर मल्टी स्पेशलिटी टीम में शामिल डॉक्टरों के नाम व विवरण दिया गया है |

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१७ जून २०१९ उपरोक्त प्रेस विज्ञप्ति को अपडेट करते हुए शीर्षक में लिखा गया है कि “बिहार में विभिन्न जिलों में पांच वायरोलॉजिकल लैब स्थापित की जानी हैं” साथ ही “एक वर्ष में राज्य सरकार द्वारा श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में १०० बेड वाली पीडियाट्रिक आईसीयू स्थापित किये जाने वालें है” |

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चौथी प्रेस विज्ञप्ति १९ जून २०१९ को जारी की गई है | इस विज्ञप्ति के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बीमारी फैलने वालें क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए टीमों का गठन किया गया है ताकि वह यह पता लगा सके कि आर्थिक और सामाजिक अवस्था के साथ इस बीमारी का क्या संबंध है | इसके अलावा, जिलों में दस एम्बुलेंसों को बीमारी के पीड़ीत जगहों के लिए रखा गया है ताकि वह चौबीसों घंटे सेवा दे सके |

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इसके अलावा २३ जून २०१९ को एक और प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है | इस प्रेस विज्ञप्ति में लिखा गया है कि “स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मल्टी स्पेशलिटी टीम अब एक सप्ताह से अधिक समय से मुजफ्फरपुर में कैंप कर रही है | साथ ही उन्होंने कहा कि मल्टी स्पेशलिटी टीमों द्वारा एक्यूट एन्सेफैलोपैथी सिंड्रोम (एईएस) का नैदानिक प्रबंधन का भी किया जा रहा है और मरीजों को २४ घंटे क्लिनिकल, डायग्नोस्टिक और ड्रग प्राप्त हो रहा है |” आखिर में लिखा गया है कि मल्टी स्पेशलिटी टीमें बिहार में तैनात रहेंगी जब तक चमकी बुखार (एईएस) के मरीजों का मौत का रेट कम नहीं हो जाता है |

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इन प्रेस विज्ञप्ति में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा गया है कि चमकी बुखार एक लाइलाज बीमारी है | इससे हम स्पष्ट हो सकते है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने चमकी बुखार को लाइलाज बीमारी घोषित नहीं किया है |

हमें “द हिन्दू” द्वारा प्रकाशित खबर मिली जो T. Jacob John द्वारा दी गई है | वे CMC वेल्लोर से वायरोलॉजी के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर है | इस खबर के अनुसार यह बीमारी लाइलाज नहीं है | उन्होंने लिखा है कि अगर दिमागी बीमारी की शुरुआत के चार घंटे के भीतर बीमार बच्चों को १०% ग्लूकोज से संक्रमित किया जाता है, तो रिकवरी तेज और पूरी होती है |

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चमकी बुखार या एन्सेफलाइटिस के बारें में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए फैक्ट क्रेस्सन्डो द्वारा लिखे गए लेख को पढ़ें |

निष्कर्ष: तथ्यों के जांच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | वायरल विडियो के साथ किये गए दावें गलत है क्योंकि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने चमकी बुखार को लाइलाज बीमारी घोषित नहीं किया है |

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Title:क्या स्वाथ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने चमकी बुखार को लाइलाज बीमारी घोषित किया?

Fact Check By: Drabanti Ghosh 

Result: False


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