रस्सी से लटककर नदी पार करने की तस्वीर पुरानी है व इसका भारत से कोई सम्बन्ध नहीं है |

False National
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सोशल मीडिया पर एक तस्वीर जिसमें हम कुछ स्कूली बच्चों को रस्सी के सहारे एक नदी को पार करते हुये दर्शाया गया है, इस तस्वीर को सोशलमंचो पर उत्तराखंड का बताते हुये सरकार के विकास मॉडल पर तंज़ कसा गया है |

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि “ये तस्वीर उसी देश की हैं जहां करोड़ों की लागत से एक भव्य मंदिर बन रहा है | उत्तराखंड की तस्वीर बच्चे स्कूल जाते हुए | देश बुलेट ट्रेन की ओर अग्रसित?

फेसबुक पोस्ट | आर्काइव लिंक

अनुसंधान से पता चलता है कि…

जाँच की शुरुवात हमने इस तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने से की, जिसके परिणाम से हमें १६ सितंबर २०१९ को एक वेबसाइट पर प्रकाशित समान तस्वीर प्राप्त हुई | इस तस्वीर को साझा करते हुए लिखा गया है कि यह तस्वीर नेपाल से है | इस तस्वीर के विवरण में लिखा गया है कि यह नेपाल की तस्वीर है जहाँ बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी पार करना पढता है |

आर्काइव लिंक

२८ सितंबर २०१३ को एक और वेबसाइट ने भी इस तस्वीर को साझा करते हुए कहा है कि यह तस्वीर नेपाल से है |


 यह तस्वीर हमें माय रेपुब्लिकाकी वेबसाइट पर भी नज़र आई जिसके विवरण में लिखा गया है कि छात्र त्रिशूली नदी को पार कर रहे है | बुडसिन गाँव के सभी माध्यमिक स्तर के छात्र दिन में दो बार रस्सी पर लटके हुए नदी के उस पार जाते हैं, पुली के पहियों से जुड़े स्लिंग की मदद से क्योंकि इस क्षेत्र का एकमात्र माध्यमिक विद्यालय नदी के पार स्थित है | गूगल सर्च करने पर हमें पता चला कि त्रिशूली नदी नेपाल में स्थित है |

आर्काइव लिंक

अधिक जाँच करने पर हमें द टेलीग्राफ के २०१६ के एक लेख में भी इसी तरह की तस्वीर साझा मिली जहाँ यह कहा गया है कि यह तस्वीर मध्य नेपाल में स्थित बेनीघाट जिले के ढेडिंग गांव की है। रिपोर्ट के अनुसार, बेनीघाट जिले में त्रिशूलि नदी के पार कई ऐसे तारकी क्रॉसिंग हैं |अल जज़ीरा की एक ग्राउंड रिपोर्ट में कहा गया है कि तस्वीर में देखे गए वायरक्रॉसिंगकी मदद सेहर दिन ५० से अधिक बच्चे नदी पार करते हैं | रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई बच्चे पानी में गिर जाते हैं या हुक का उपयोग करके नदी पार करते समय अपनी उंगलियों को घायल कर देते हैं |

आर्काइव लिंक
२१मई, २०१८को प्रकाशित माय रेपुब्लिकाकी एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के बेनीघाट जिले में त्रिशुली नदी पर बने ११ तार पुलों में से १० को सस्पेंशन पुलों से बदल दिया गया है | इसमें ढेडिंग गांव के पुल भी शामिल हैं |

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निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर जिसमे बच्चों को रस्सी से लटककर नदी पार कर स्कूल जाते हुए देखा जा सकता है उत्तराखंड से नही है बल्कि नेपाल से है |

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Title:रस्सी से लटककर नदी पार करने की तस्वीर पुरानी है व इसका भारत से कोई सम्बन्ध नहीं है |

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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