२०१३ के मुज्जफरनगर दंगो से सम्बंधित एक तस्वीर को वर्तमान किसान आन्दोलन का बता वायरल किया जा रहा है ।

False Social

वर्तमान में देश में हो रहे किसान आंदोलन के चलते सोशल मंचों पर एक तस्वीर काफी तेजी से वायरल होती दिख रही है, तस्वीर में आपको दो व्यक्ति नज़र आएंगे जिसमें एक शख्स के हाथ में आपको पिस्तौल व डंडा नज़र आएगा व दूसरे शख्स के हाथ में एक ईट और एक डंडा दिखाई देगा। तस्वीर को देखकर ऐसा प्रतित हो रहा है कि एक शख्स दूसरे शख्स को बंदूक से गोली मार रहा है। इस तस्वीर के साथ जो दावा वायरल हो रहा है उसके मुताबिक वह शख्स सामने खड़े किसान को बंदूक से गोली मार रहा है। तस्वीर के साथ जो शीर्षक है उसमें लिखा है, 

मत मारो गोलियो से मुझे मैं पहले से एक दुखी इंसान हूँ, मेरी मौत कि वजह यही हैं कि मैं पेशे से एक किसान हूँ। #kishanVirodhiNarendraModi
#KisaanBachaoDeshBachao

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

सबसे पहले हमने इस तस्वीर की जाँच गूगल रीवर्स इमेज सर्च के माध्यम से की तो हमे कई समाचार लेख मिले जहाँ इस तस्वीर को प्रकाशित किया गया है। उन समाचार लेखों के मुताबिक यह तस्वीर वर्तमान की नहीं है बल्की 2013 में हुए मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद की है। 

मुजफ्फरनगर दंगों के बाद मेरठ के खेरा गांव में मुजफ्फरनगर हिंसा के सिलसिले में स्थानीय भाजपा विधायक संगीत सोम पर गिरफ्तारी और थप्पड़ मारने के विरोध में सरधाना के खेड़ा गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपने बच्चों सहित कई गांववालों को इकट्ठा किया था। इसी दौरान झड़प में पुलिसकर्मियों और एक महिला सहित कम से कम 6 लोग घायल हो गए थे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसूगैस के गोले का इस्तेमाल करना पड़ा था। 

वाईरल हो रही तस्वीर तब की है जब ग्रामीणों ने भारी भीड़ जमाकर आगे बढ़कर महापंचायत आयोजित करने का फैसला किया। उन्होंने विधायक सोम पर लगे एन.एस.ए को वापस लेने और दंगों के लिए गिरफ्तार किए गए सैकड़ों लोगों की तत्काल रिहाई की अपनी मांग दोहराई थी।

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अगर आप उपरोक्त दावे को ध्यान से पढ़ेंगे तो उसमें लिखा है “किसान विरोधी नरेंद्र मोदी”, और यह तस्वीर 2013 में हुई घटना की है। आपको यह बता दें की नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने थे। इस तस्वीर का नरेंद्र मोदी के काल में हुई किसी भी घटना से कोई संबन्ध नहीं है।

द इंडियन एक्प्रेस की वैबसाइट पर वायरल हो रही जो तस्वीर नज़र आ रही है वह दरअसल पी.टी.आई न्यूज़ एजन्सी द्वारा खिंची हुई है। इस कारण हमने कीवर्ड सर्च के ज़रिये पी.टी.आई के आर्काइव में इस तस्वीर की खोज की तो हमें यह तस्वीर पी.टी.आई के वैबसाइट पर 29 सितंबर 2013 को प्रकाशित की हुई मिली। तस्वीर के साथ जो शीर्षक है उसमें लिखा है, 

“सरधाना: मुजफ्फरनगर तहसील के संबंध में भाजपा विधायक संगीत सोम पर एनएसए के खिलाफ महापंचायत आयोजित करने के प्रतिबंधात्मक आदेशों की अवहेलना करने के बाद मेरठ के खेड़ा गांव में पुलिस के साथ झड़प के दौरान ग्रामीणों को नियंत्रित करने का प्रयास करने वाला एक अधिकारी।“

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निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त दावे को गलत व भ्रामक पाया है। वाईरल हो रही तस्वीर 2013 में हुए मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद का है। इस तस्वीर का वर्तमान में हो रहे किसान आंदोलन से कोई संबन्ध नहीं है।

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Title:२०१३ के मुज्जफरनगर दंगो से सम्बंधित एक तस्वीर को वर्तमान किसान आन्दोलन का बता वायरल किया जा रहा है ।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False