समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान के नाम से वायरल हो रहा विवादित फेसबुक पोस्ट फर्ज़ी है।

False Political
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आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते सोशल मंचों पर कई गलत व भ्रामक खबरें वायरल होती चली आ रही है। फैक्ट क्रेसेंडो ने ऐसी कई खबरों का अनुसंधान कर उनकी प्रमाणिकता अपने पाठकों तक पहुंचाई है। इन दिनों इंटरनेट पर एक तस्वीर को काफी तेज़ी से साझा किया जा रहा है व दावा किया जा रहा है कि आज़म खान द्वारा इस्लाम और देशभक्ति को लेकर एक विवादित बयान दिया गया है, वायरल हो रही तस्वीर में लिखा है कि, 

धर्मनिरपेक्षता और देशभक्ति इस्लाम में हराम है। हिंदू नेता चाहे कितनी भी बार मुस्लिम टोपी पहनें, लेकिन हम मुस्लिम नेता तिलक नहीं लगाएंगे। हिंदू चाहे नमाज को कितनी ही इज्जत दें लेकिन हम मुसलमान वंदे मातरम का बहिष्कार ज़रुर करेंगे। क्योंकि इस्लाम में धर्मनिरपेक्षता और देशभक्ति दोनों हराम है। आज़म खान, नेता समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश।“

उपरोक्त तस्वीर में दिये गये इस बयान के साथ यह दावा वायरल हो रहा है कि यह बयान उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान ने दिया है।

फेसबुक 

अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान पाया कि समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। उन्होंने वायरल हो रहे बयान के खिलाफ में शिकायत दर्ज करवायी थी व आरोपी को रामपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी किया गया था।

इस दावे की जाँच की शुरुवात हमने गूगल पर कीवर्ड सर्च कर की, परिणाम में हमें ऐसा कोई भी विश्वसनीय समाचार लेख नहीं मिला जो इस बात की पुष्टि कर सके कि समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान ने वायरल हो रहे बयान जैसा कोई विवादित सांप्रदायिक बयान दिया हो।

गूगल कीवर्ड सर्च करने पर हमें 20 जून 2013 को अमर उजाला द्वारा प्रकाशित किया गया एक समाचार लेख मिला जिसके मुताबिक वर्ष 2013 में उपरोक्त बयान के खिलाफ समाजवादी पार्टी नेता आज़म खान ने शिकायत दर्ज करवायी थी व यह स्पष्ट किया था कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।

आर्काइव लिंक

इसके बाद हमने इस सम्बन्ध में और जानकारी हासिल करने हेतु हमने यूट्यूब पर कीवर्ड सर्च किया व हमें 18 मार्च 2015 को टाइम्स नाउ द्वारा प्रसारित किया हुआ एक वीडियो मिला। वीडियो के शीर्षक में लिखा है,“आजम खान के खिलाफ एफ.बी पोस्ट करने के आरोप में 11वीं कक्षा के छात्र को भेजा गया जेल,” इसके नीचे दी गयी जानकारी में लिखा है, सोशल नेटवर्किंग साईट पर कथित आजम विरोधीपोस्ट के आरोप में 11वीं कक्षा के छात्र को यू.पी में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

इस वीडियो में आप एक पुलिस अधिकारी की बाईट देखने को मिलेगी, जिसमें वे स्पष्ट तौर से कह रहीं हैं कि वायरल हो रहे पोस्ट में दिया गया बयान समाजवादी पार्टी नेता आज़म खान द्वारा नहीं दिया गया है। इसके बाद इस वीडियो में आप एक अधिवक्ता द्वारा इस सम्बन्ध में दी गई बाईट को भी देख सकते है।

आर्काइव लिंक 

तदनंतर हमने उपरोक्त वीडियो में दी गयी जानकारी को ध्यान में रखते हुये गूगल पर कीवर्ड सर्च किया, परिणाम में हमें 19 मार्च 2015 को टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित एक समाचार लेख मिला जिसमें लिखा है कि, वर्ष 2015 में रामपुर पुलिस ने बरेली के कक्षा 11 के एक छात्र को आज़म खान के खिलाफ आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट सोशल मंचों पर प्रकाशित करने के जुर्म में 14 दिनों के लिये न्यायिक रिमांड में भेजा। इससे पहले भी आज़म खान से संबन्धित ऐसा ही आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट प्रकाशित करने के लिये कंवल भारती नामक एक सामाजिक कार्यकर्ता को वर्ष 2013 में रामपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। 

आर्काइव लिंक

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया कि वायरल हो रही तस्वीर के साथ किया गया दावा गलत है। समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। उन्होंने वायरल हो रहे बयान के खिलाफ में शिकायत दर्ज करवायी थी व आरोपी को रामपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी किया गया था।

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. असम के एक पानी पूरी विक्रेता द्वारा पानी में मूत्र मिलाने के प्रकरण को फर्जी सांप्रदायिक रंग दे सोशल मंचों पर फैलाया जा रहा है।

२. पूर्व न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नाम से फिरसे बना फर्जी अकाउंट जिससे सांप्रदायिक ट्वीट किये गये|

३. बिहार के कटिहार में मुर्हरम जुलूस के दौरान घटी मारपीट की घटना को हिन्दू-मुस्लिम कोण दे सांप्रदायिकता से जोड़ साझा किया जा रहा है|

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Title:समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान के नाम से वायरल हो रहा विवादित फेसबुक पोस्ट फर्ज़ी है।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False


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