पुणे रेल्वे स्टेशन के मूल प्लेटफॉर्म टिकट को एडिट कर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

False Social

वर्तमान में देश में चल रहे किसान आंदोलनों के चलते कई लोगों में अंबानी व अड़ानी को लेकर काफी आक्रोश है, सोशल मंचो पर लोग इन दोनों बिजनेस टाइकूनस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़कर व सरकार द्वारा उन्हें फायदा पहुँचाने की मंशा को लेकर तंज कसा जा रहा है। इसी दौरान सोशल मंचो पर एक रेल्वे टिकट की तस्वीर बहुत तेज़ी से साझा की जा रही है। उस तस्वीर पर आपको “अडानी रेल्वे लिखा हुआ नज़र आएगा व उसके नीचे लिखा है, रेल्वे हमारी निजी संपत्ति है।“ इस तस्वीर के साथ जो दावा वायरल हो रहा है, उसके मुताबिक पुणे रेल्वे स्टेशन के टिकट पर अडानी का नाम लिखा हुआ है।

वायरल हो रहे पोस्ट के शीर्षक में लिखा है,

रेलवे प्लेटफार्म टिकट अडानी के नाम देश को बर्बाद करने में अंधभक्तों का अहम योगदान।“

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

फैक्ट क्रेसेंडो ने जाँच के दौरान पाया कि वायरल हो रही तस्वीर मूल प्लेटफार्म टिकट को एडिट कर भ्रामक जानकारी जोड़ बनाई गई है। पुणे रेल्वे स्टेशन के मूल टिकट पर अडानी का नाम नहीं है।

जाँच की शुरुवात हमने इस तस्वीर को गूगल रीवर्स इमेज सर्च कर की, परिणाम में हमें एक ट्वीट मिला जिसमें पूणे रेल्वे स्टेशन की टिकट की तस्वीर को प्रकाशित किया गया है। हमने देखा कि यह ट्वीट स्पोकस्पर्सन रेल्वेज़ के आधिकारिक ट्वीट हैंडल से किया गया है, ट्वीट में लिखा है

“पुणे जंक्शन द्वारा प्लेटफार्म टिकट का मूल्य ₹50 रखने का उद्देश्य अनावश्यक रूप से स्टेशन पर आने वालों पर रोक लगाना है जिस से सोशल डिसटेनसिंग का पालन किया जा सके। रेलवे प्लेटफार्म टिकट की दरों को कोरोना महामारी के शुरुवाती दिनों से ही इसी प्रकार नियंत्रित करता आया है। “

यह ट्वीट इस वर्ष 18 अगस्त को किया गया है।

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ट्वीट को देखने पर समझ आएगा कि यह ट्वीट प्रशांत कानोजिया नामक एक आधिकारिक ट्वीटर हैंडल के उपभोक्ता द्वारा किये गये ट्वीट का जवाब है। इस ट्वीट में प्रशांत कानोजिया ने पूणे रेल्वे स्टेशन के टिकट की तस्वीर को प्रकाशित किया है व उसपर प्लेटफॉर्म टिकट के बढ़े हुए दामों पर सवाल उठाया है। इस ट्वीट को इस वर्ष 17 अगस्त को किया गया है।

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इसके पश्चात वायरल हो रही टिकट की तस्वीर व ट्वीट में प्रकाशित की गयी तस्वीर को गौर से देखने पर हमें समझ आया कि दोनों ही तस्वीर बिलकूल एक जैसी है। दोनो ही तस्वीरों का टिकट नंबर, तारीख, समय, एस.ए.सी नंबर सब एक जैसे है। नीचे दिये गये तुलनात्मक तस्वीर में आप वायरल हो रही तस्वीर व ट्वीट में दी गयी तस्वीरों की तुलना कर सकते है व देख सकते है कि दोनों ही टिकट एक ही है।

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उपरोक्त तस्वीर में आप देख सकते है कि मूल तस्वीर में आपको अडानी का नाम नहीं है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि वायरल हो रही तस्वीर को एडिट किया गया है।

तत्पश्चात हमने पुणे रेल्वे स्टेशन के रेल प्राधिकारी से संपर्क किया, उन्होंने कहा, “वायरल हो रही पुणे रेल्वे स्टेशन की टिकट की तस्वीर पर जो अडानी नाम लिखा गया है वह एडिट किया हुआ है। पुणे के रेल्वे टिकट पर ऐसा कोई भी नाम मौजूद नहीं है। यह तस्वीर फेक है।“

हमें पुणे के एक रेल प्राधिकारी ने स्टेशन की मूल टिकट की तस्वीर भी उपलब्ध करायी है।

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तदनंतर गूगल पर कीवर्ड सर्च करने पर हमें पता चला कि पुणे रेल्वे स्टेशन को बी.वी.जी नामक एक निजी एजेंसी को तीन वर्षों के लिए चलाने के लिए दिया गया है। इस एजेंसी के संस्थापक व मलिक हनमंत गायकवाड है, इनका व इनकी कंपनी का अडानी ग्रुप से कोई संबन्ध नहीं है।

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निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने पाया है कि उपरोक्त दावा गलत है। वायरल हो रही तस्वीर एडिट की गयी है। पुणे रेल्वे स्टेशन के मूल टिकट पर अडानी का नाम नहीं है।

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Title:पुणे रेल्वे स्टेशन के मूल प्लेटफॉर्म टिकट को एडिट कर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

Fact Check By: Rashi Jain 

Result: False

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