अयोध्या में साधू की मौत को गलत विवरण के साथ फैलाया गया|

False Social
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वर्तमान में साधू संतों को लेकर सोशल मंचो पर कई प्रकार के वाइरल पोस्ट देखे जा सकतें हैं, महाराष्ट्र के पालघर में हुई दो साधुओं की हत्या के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से भी दो साधुओं की धारदार हथियार से काटकर हत्या के चलते साधू समाज इन दिनों देशभर में काफी चर्चा में है, इन्ही सब के बीच सोशल मीडिया पर एक मृत साधू की तस्वीर को साझा करते हुए दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर उत्तर प्रदेश के अयोध्या से है जहाँ एक साधू की मौत भूख की वजह से हुई है | साथ ही दावा किया जा रहा है कि इस मृत साधू के शव को अयोध्या पुलिस ने बिना क्रियाक्रम करे नदी के पानी में बाहा दिया | 

आर्काइव लिंक

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अनुसंधान से पता चलता है कि…

जाँच की शुरुवात हमने अयोध्या के एस.एस.पी आशीष तिवारी से संपर्क कर इस सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने से की, उन्होंने हमें बताया कि 

“इस साधू की मौत से संबंधित सोशल मीडिया पर चल रहा कथन गलत है | तस्वीर में दिख रहे ८० वर्षीय साधू की मौत स्वाभाविक कारणों से हुई है | कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था जिसके चलते उनकी मौत हो गयी | उनके शव को साधु समाज के साधुओं ने साधु परंपरा के अनुसार अंतिम क्रिया कर जल समाधी दी| साधू समाज के सधुयों के इनके शव का पोस्टमोर्टेम करने से इनकार किया जो उन्होने हमें  लिखित रूप से बताया है | साधु समाज के साधुओं ने सोशल मीडिया पर गलत खबरे फ़ैलाने वालों के खिलाफ अयोध्या कोतवाली में तहरीर दे एक शिकायत पत्र दर्ज कराया है | उन्होंने खुद इस बात कि पुष्टि की है कि उन्हें खाने पीने की कोई असुविधा नही हो रही है |”

उन्होंने हमें बताया कि “इस घटना में देर रात हमें सादे कागज पर लिखीं दो तहरीरें मिलीं, जिससे हमें सबसे पहले मृतक साधु का नाम पता चला | मृतक साधु का नाम विष्णु दास उम्र ८० साल है | इस तहरीर में साफ़ साफ़ यह भी लिखा गया है कि साधुओं को खाने पीने की कोई समस्या नही है | क्योंकि मृत्यु स्वाभाविक कारणों से हुई थी जिसके चलते साधु समाज द्वारा इस मृत साधू के शव को पोस्ट मोर्टेम के लिए नही भेजना था | उनके द्वारा दी गयी तहरीर पर साफ़ साफ़ लिखा है कि साधु समाज ने उनके शव को साधु रीती रिवाज़ के अनुसार जल प्रवाह किया है |”

हमारे द्वारा साधुओं द्वारा दी गयी तहरीर की छायाप्रति व कुछ वीडियो और तस्वीरें प्राप्त की गयी,जिन्हें आप नीचे देख सकते है 


इस घटना का स्पष्टीकरण साधु समाज के साधुओं ने वीडियो के माध्यम से दिया है जिससे आप नीचे देख सकते है | 

फैक्ट क्र्सेंडो ने तद्पश्चात अयोध्या के कोतवाली पुलिस से संपर्क किया, उन्होंने हमें बताया कि

 “सोशल मीडिया पर चल रहे दावे सरासर गलत है | इस अफवाह को फ़ैलाने के कारण तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है, जिनमे से तुफैल जो की 5 समाचार पोर्टल का संचालक है, दूसरा दिलीप मोर्य जो समाचार रिपोर्टर है, तीसरा इंडियन टाइम्स समाचार | इनके खिलाफ ३१०/२० आई.पी.सी धरा १८८ और ५०५(2), डिजास्टर मनागेम्नेट एक्ट के तहत धरा ५४ के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है | उस ८० वर्षीय साधू की मौत स्वाभाविक कारणों से हुई है | यह शिकायत सुखदेव गिरी जो स्वर्गीय श्री मैनहंट प्रेम गिरी के शिष्य है, द्वारा दर्ज कराई गई है |”

अयोध्या पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से इस घटना का स्पष्टीकरण दिया है | उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि “थाना को0अयोध्या क्षेत्र अन्तर्गत एक साधू की स्वाभाविक मृत्यु के संम्बन्ध में फेक न्यूज चलाने पर साधुओं द्वारा प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना स्थानीय पर सुसगंत धाराओं में मु0अ0सं0 310/20 अभियोग पंजीकृत,उक्त के संम्बन्ध में CO अयोध्या की बाईट |”

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निष्कर्ष: तथ्यों के जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त पोस्ट को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर इस मृत साधू की तस्वीर को साझा करते हुए किये गये दावे गलत है | इस साधू की मौत भूख के कारण नही हुई है बल्कि स्वाभाविक कारणों से हुई थी | उनके शव को अयोध्या पुलिस ने पानी में नही बहाया बल्कि साधू समाज द्वारा अपने रीती रिवाज़ के अनुसार जल प्रवाह किया गया है | सोशल  मीडिया पर गलत खबर फ़ैलाने के लिये तीन व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है |

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Title:अयोध्या में साधू की मौत को गलत विवरण के साथ फैलाया गया|

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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