यह वीडियो ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे मौजूदा तनाव से सम्बंधित नहीं है। यह मई 2018 का वीडियो है जिसे अभी का बताकर भ्रामक दावे से फैलाया जा रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे हालिया तनाव के संदर्भ में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया जा रहा है। इसमें दिखाई दे रहा है कि कुछ ईरानी सांसद संसद के अंदर अमेरिकी झंडा जला रहे हैं। यह वीडियो इस दावे से शेयर किया जा रहा है कि यह हाल का वीडियो है, जहां ईरान में अमेरिका के प्रति विरोध जताते हुए वहां की संसद में अमेरिका के झंडे को जलाया गया। वायरल वीडियो के साथ कैप्शन लिखा गया है…
ईरान की संसद भवन में अमेरिका का झंडा जलाया गया।
अनुसंधान से पता चलता है कि…
हमने जांच की शुरुआत में वायरल वीडियो के कीफ्रेम को गूगल लेंस से सर्च किया। परिणाम में हमें कुछ मीडिया आउटलेट द्वारा रिपोर्ट प्रकाशित की हुई मिली, जिससे पता चला कि यह वीडियो अभी के दिनों का नहीं बल्कि मई 2018 का है जब अमेरिका के परमाणु समझौते से बाहर निकलने पर ईरानी की संसद में अमेरिकी झंडे जलाए गए थें।
9 मई 2018 को एनबीसी के फेसबुक पेज पर अपलोड किए गए पोस्ट के अनुसार, परमाणु समझौतों को लेकर ईरान की संसद में अमेरिकी झंडों को जलाया गया था।
9 मई 2018 की सीएनएन की खबर के अनुसार, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु समझौते से पीछे हटने के बाद बुधवार को ईरान के कट्टरपंथी सांसदों ने संसद में कागज के अमेरिकी झंडे को आग के हवाले कर दिया।”
हमें ब्लूमबर्ग के यूट्यूब चैनल पर 9 मई 2018 को यहीं वीडियो अपलोड किया हुआ मिला। इसके साथ लिखे विवरण के अनुसार, “ट्रम्प के देश की न्यूक्लियर डील से बाहर निकलने के बाद ईरानी सांसदों ने संसद में अमेरिकी झंडा जलाया और “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाए।”
बीबीसी, द गार्डियन और द सन की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो 9 मई 2018 को शेयर किया गया था। पता चलता है कि अमेरिका के ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से खुद को अलग करने पर ईरानी संसद में अमेरिकी झंडे जलाए गए थें। संसद सदस्यों ने इस दौरान Death to America के नारे लगाए थे और परमाणु समझौते की प्रतीकात्मक कॉपी को भी जलाया। अमेरिका के आधिकारिक रूप से ईरान के साथ हुए 2015 के न्यूक्लियर डील (JCPOA – Joint Comprehensive Plan of Action) से बाहर होने पर ईरानी संसद के उद्घाटन सत्र में कुछ कट्टरपंथी सांसदों ने अमेरिकी झंडे और JCPOA की प्रति को जलाकर प्रदर्शन किया था।
असल में ट्रंप ने अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान 8 मई 2018 को संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) से अमेरिका के हटने की घोषणा की थी। बराक ओबामा के प्रशासन के तहत जुलाई 2015 में हस्ताक्षरित इस समझौते का उद्देश्य आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना था। ट्रंप ने इसकी आलोचना करते हुए इसे “त्रुटिपूर्ण” बताया था।
निष्कर्ष
तथ्यों के जांच से यह पता चलता है कि,वायरल वीडियो साल 2018 का है जब अमेरिकी सांसदों द्वारा 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने के बाद अमेरिकी झंडे को जलाया गया था। उसी समय के वीडियो को ईरान व अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव से जोड़कर भ्रामक दावे से फैलाया जा रहा है।
Title:ईरानी सांसदों द्वारा अमेरिकी ध्वज जलाने का 2018 का वीडियो, मौजूदा तनाव से जोड़कर वायरल
Fact Check By: Priyanka SinhaResult: False


