इस तस्वीर का हालिया प्रदर्शन का कोई संबंध नहीं है, 7 साल पुरानी तस्वीर को अभी के दिनों का बताकर शेयर किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर को काफी वायरल किया जा रहा है, जिसे ईरान की वर्तमान सरकार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच फैलाया जा रहा है। इसमें दिखाई दे रहा है कि सड़कों पर हजारों की भीड़ दिखाई दे रही है। पोस्ट को हालिया बताकर शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी प्रदर्शन कर रहे हैं। पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा गया है…
न्यूयॉर्क में “माय डियर फ्रेंड डोनाल्ड ट्रम्प” के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर चुके हैं॥

अनुसंधान से पता चलता है कि…
हमने जांच की शुरुआत में वायरल तस्वीर का रिवर्स इमेज सर्च किया। परिणाम में हमें The Mercury News की वेबसाइट पर 6 अप्रैल 2018 को प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली, जिसमें वायरल तस्वीर को देखा जा सकता है। हमने देखा कि रिपोर्ट में मौजूद तस्वीर का क्रेडिट एसोसिएटेड प्रेस के अलेक्स ब्रैंडन को दिया गया है। जबकि रिपोर्ट से पता चलता है कि, वॉशिंगटन में बंदूक नियंत्रण के समर्थन में ‘मार्च फ़ॉर आवर लाइव्स’ रैली के दौरान पेंसिल्वेनिया एवेन्यू पर भारी भीड़ इकट्ठा हुई थी। तस्वीर के कैप्शन में बताया गया है कि उस समय अरबपति जार्ज सोरोस और उनके फाउंडेशन पर यह भी आरोप लगा था कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को प्रति व्यक्ति 300 डॉलर का भुगतान किया था, लेकिन एसोसिएटेड प्रेस ने इन दावों को बेबुनियाद बता दिया था।
हमें मिली वॉक्स डॉट कॉम की वेबसाइट पर रिपोर्ट के अनुसार,’मार्च फ़ॉर आवर लाइव्स’ रैली के दौरान वाशिंटन समेत अमेरिका के कई शहरों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया था। वहीं रिपोर्ट 25 मार्च 2018 को प्रकाशित किया गया है।

mashable डॉट कॉम की 27 मार्च 2018 को छपी खबर में वायरल तस्वीर को शेयर गया है। इसमें बताया गया कि क्राउड काउंटिंग कंसोर्टियम के शोधकर्ताओं एरिका चेनोविथ और जेरेमी प्रेसमैन का अनुमान है कि शनिवार को हुए ‘मार्च फॉर आवर लाइव्स’ प्रदर्शन में अमेरिका भर में 12.5 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की 12 जनवरी 2026 के अनुसार, न्यूयॉर्क के फिफ्थ एवेन्यू पर हजारों लोगों ने डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमीग्रेशन नीतियों, ICE की कार्रवाई और वेनेज़ुएला में अमेरिकी दखल के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “नो जस्टिस, नो पीस” जैसे नारे लगाए गए थें।
इसके अलावा दावे से सम्बंधित रिपोर्ट्स को यहां और यहां पर देख सकते हैं जिनसे यह पुष्टि होती है कि करीब 7 साल पुरानी तस्वीर को हालिया संदर्भ से जोड़कर फैलाया जा रहा है।
निष्कर्ष
तथ्यों के जांच से यह पता चलता है कि, करीब 7 साल पुरानी तस्वीर को अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ हालिया प्रदर्शन के रूप में भ्रामक दावे से फैल्या जा रहा है।
Title:2018 में हुए अमेरिका में प्रदर्शन की पुरानी तस्वीर, ट्रंप की नीतियों के खिलाफ हालिया विरोध का बताकर भ्रामक दावे से वायरल…
Fact Check By: Priyanka SinhaResult: False


