२०१५ में पटना पुलिस द्वारा किये गए लाठीचार्ज की एक पुरानी तस्वीर को वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान का बताकर वायरल किया जा रहा है|

False International
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तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद इस सन्दर्भ में सोशल मीडिया पर कई भ्रामक तस्वीरें और वीडियो फैलाये जा रहे हैं,  पूर्व में भी ऐसे भ्रामक दावों का फैक्ट-चेक कर उनकी प्रमाणिकता फैक्ट क्रेसेंडो अपने पाठकों तक पहुँचाता रहा है | इसी क्रम में सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मीयों द्वारा एक भीड़ पर लाठीचार्ज करने की एक तस्वीर को बड़े पैमाने पर साझा करते हुए दावा किया जा रहा है कि यह ह्रदय-विदारक तस्वीर अफ़ग़ानिस्तान से है जहाँ वहां के मूल निवासियों पर बर्बरता पूर्ण अत्याचार हो रहें हैं | 

पोस्ट के शीर्षक में लिखा गया है कि 

“अफगानिस्तान से आ रही है दिल दहला देने वाली तस्वीर |”

फेसबुक पोस्ट 

फेसबुक पोस्ट 

अनुसंधान से पता चलता है कि..

फैक्ट क्रेसेंडो ने शोध कर जाँच में पाया है कि वायरल हो रही तस्वीर बिहार की राजधानी पटना से है, ये तस्वीर २०१५ में ली गई थी जब पुलिस द्वारा निषाद समुदाय के सदस्यों पर लाठीचार्ज किया गया था | इस तस्वीर का वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान से कोई संबंध नहीं है |

जाँच की शुरुवात हमने इस तस्वीर को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने से की, परिणाम में हमें यह तस्वीर पत्रिका द्वारा प्रकाशित एक खबर पर उपलब्ध मिली | इस खबर के अनुसार यह तस्वीर बिहार की राजधानी पटना से है जहाँ पप्पू यादव की जनाधिकार पार्टी के समर्थकों ने २०१५ में अपनी मांगो को लेकर बिहार विधानसभा का घेराव किया था| विधानसभा का घेराव करने जा रहे समर्थकों को जब पुलिस ने रोकना चाहा तो कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हमला बोल दिया। इसके बाद दोनों तरफ से पथराव की घटना हुई और पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज किया |

आर्काइव लिंक

उपरोक्त खबर के साथ दी गई जानकारी से संकेत लेते हुए हमने गूगल पर सम्बंधित कीवर्ड सर्च किया जिसके परिणाम से हमें गेट्टी इमेज द्वारा प्रकाशित सदृश्य तस्वीर मिली | इस तस्वीर को ४ सितंबर २०१५ को अपलोड किया गया था और इसे ए.ऍफ़.पी द्वारा खींचा गया था| इस तस्वीर के साथ दी गई जानकारी के अनुसार यह तस्वीर पटना में अनुसूचित जाति वर्ग के तहत उचित आचरण की मांग करने पर निषाद समुदाय के सदस्यों पर लाठीचार्ज करते भारतीय पुलिसकर्मियों को दर्शाती है | इस तस्वीर में हम पीछे पुलिस बैरिकेड के ऊपर पटना शब्द लिखा हुआ देख सकते है जिससे यह स्पष्ट है कि वायरल हो रही तस्वीर भारत से है |

आर्काइव लिंक

इस घटना पर ५ सितंबर २०१५ को आज तक के अपने चैनल द्वारा रिपोर्ट की थी | उनके यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध वीडियो में हम इस घटना का वीडियो फुटेज भी देख सकते है | इस वीडियो के विवरण में लिखा गया है कि “निषाद (मछुआरे) समुदाय के सदस्यों द्वारा अनुसूचित दर्जा देने की मांग करते हुए आंदोलन कर रहे लोगों पर आज पुलिस के द्वारा लाठीचार्ज किया गया | इस मामले में कई प्रदर्शनकारी और कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए।”

उपरोक्त वीडियो की फुटेज में हम वायरल हो रही तस्वीर में दिख रही महिला को भी देख सकते है | नीचे आप वायरल तस्वीर में दिख रही पीले रंग की साड़ी पहने महिला को वीडिओ के स्क्रीनग्रैब से ली गई तस्वीर में भी देख सकते है |

तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़े से संबंधित अन्य फैक्ट चेक को आप नीचे पढ़ सकते है |

निष्कर्ष: तथ्यों की जाँच के पश्चात हमने उपरोक्त तस्वीर के माध्यम से किये गये दावे को गलत पाया है | सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर अफ़ग़ानिस्तान से नहीं है अपितु यह तस्वीर २०१५ में पटना पुलिस द्वारा निषाद समुदाय के सदस्यों पर लाठीचार्ज करने से सम्बंधित है | 

फैक्ट क्रेसेंडो द्वारा किये गये अन्य फैक्ट चेक पढ़ने के लिए क्लिक करें :

१. वर्ष 2015 में सीरिया में एक महिला को अल-कायदा द्वारा गोली मारने के वीडियो को वर्तमान अफगानिस्तान से बता वायरल किया जा रहा है।

२. ब्राज़िल के पेरोला शहर के एक वीडियो को श्रीनगर (जम्मू कश्मीर) का बता गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

३. ब्रिटेन में हुये २०१४ के एक नुक्कड़ नाटक वीडियो को अफगानिस्तान में मुस्लिम महिलाओं की सरेआम नीलामी का बता फैलाया जा रहा है|

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Title:२०१५ में पटना पुलिस द्वारा किये गए लाठीचार्ज की एक पुरानी तस्वीर को वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान का बताकर वायरल किया जा रहा है|

Fact Check By: Aavya Ray 

Result: False


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